कटघोरा-उरगा एनएच परियोजना से प्रभावित क्षेत्र को छोड़कर बाकी जमीनों की रजिस्ट्री शुरू करने की मांग तेज। उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कोरबा कलेक्टर को पत्र लिखकर आम नागरिकों को राहत देने की अपील की। पढ़ें पूरी खबर।
कोरबा (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। कटघोरा-उरगा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) परियोजना से प्रभावित क्षेत्र में लंबे समय से जमीनों की खरीदी-बिक्री पर लगी रोक के कारण हजारों लोगों को आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में अब इस मुद्दे को लेकर राहत की उम्मीद जगी है। प्रदेश के उद्योग मंत्री एवं कोरबा विधायक लखन लाल देवांगन ने कोरबा कलेक्टर को पत्र लिखकर मांग की है कि केवल राष्ट्रीय राजमार्ग से प्रभावित भूमि को छोड़कर शेष अप्रभावित जमीनों की रजिस्ट्री तत्काल प्रभाव से शुरू की जाए, ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके।
मंत्री ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि वर्तमान व्यवस्था के कारण केवल एनएच से प्रभावित भूमि ही नहीं, बल्कि उससे असंबंधित अन्य जमीनों की खरीदी-बिक्री भी प्रभावित हो रही है। इससे लोगों के व्यक्तिगत, पारिवारिक और आर्थिक कार्य लंबे समय से अटके हुए हैं। उन्होंने प्रशासन से इस मामले में शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया है।
लोगों की रोजमर्रा की जरूरतें हो रही हैं प्रभावित
भूमि की खरीदी-बिक्री पर लगी रोक का असर केवल संपत्ति के लेन-देन तक सीमित नहीं है। कई परिवार ऐसे हैं, जिन्हें बच्चों की पढ़ाई, इलाज, शादी-विवाह, व्यवसाय शुरू करने या बैंक ऋण चुकाने जैसी जरूरतों के लिए अपनी जमीन बेचनी पड़ती है। लेकिन रजिस्ट्री बंद होने के कारण वे अपनी संपत्ति का उपयोग भी नहीं कर पा रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि ही अधिकांश परिवारों की सबसे बड़ी पूंजी होती है। ऐसे में जब जमीन की रजिस्ट्री पर रोक लग जाती है तो लोगों की आर्थिक गतिविधियां भी ठप पड़ जाती हैं। मंत्री ने अपने पत्र में इसी मानवीय पहलू को प्रमुखता से उठाते हुए कहा है कि प्रशासन को आम नागरिकों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर समझना चाहिए।
केवल प्रभावित भूमि पर ही रहे प्रतिबंध
लखन लाल देवांगन ने अपने पत्र में यह सुझाव दिया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के लिए जिन भूखंडों का अधिग्रहण प्रस्तावित है या जो सीधे परियोजना से प्रभावित हैं, उन पर प्रतिबंध जारी रखा जा सकता है। लेकिन जिन जमीनों का एनएच परियोजना से कोई संबंध नहीं है, वहां रजिस्ट्री रोकने का कोई औचित्य नहीं बनता।
उनका कहना है कि यदि अप्रभावित भूमि की खरीदी-बिक्री शुरू कर दी जाती है तो इससे प्रशासनिक प्रक्रिया भी सरल होगी और नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों से मुक्ति मिलेगी।
लंबे समय से उठ रही थी मांग
स्थानीय नागरिकों, किसानों, व्यापारियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा काफी समय से यह मांग उठाई जा रही थी कि एनएच परियोजना के नाम पर पूरे क्षेत्र में रजिस्ट्री पर लगी रोक हटाई जाए। लोगों का कहना है कि परियोजना से प्रभावित सीमित क्षेत्र के कारण आसपास की पूरी जमीनों की खरीद-फरोख्त रोक देना उचित नहीं है।
कई लोगों ने अपनी जीवनभर की बचत से जमीन खरीदने की योजना बनाई थी, लेकिन रजिस्ट्री बंद होने के कारण उनके सौदे अधूरे रह गए। वहीं कुछ लोग आर्थिक संकट के चलते अपनी जमीन बेचकर आवश्यक खर्च पूरे करना चाहते थे, लेकिन वे भी ऐसा नहीं कर सके।
बाजार और निवेश पर भी पड़ा असर
भूमि रजिस्ट्री बंद होने का असर स्थानीय रियल एस्टेट बाजार पर भी देखने को मिला है। संपत्ति की खरीद-बिक्री रुकने से निवेशकों की रुचि कम हुई है। छोटे व्यवसायियों और बिल्डरों की कई योजनाएं प्रभावित हुई हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अप्रभावित क्षेत्रों में रजिस्ट्री शुरू होती है तो इससे बाजार में फिर से गतिविधियां बढ़ेंगी। भूमि से जुड़े कारोबार, निर्माण कार्य और अन्य आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी, जिससे रोजगार के अवसरों में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
प्रशासन से शीघ्र निर्णय की अपेक्षा
उद्योग मंत्री ने कलेक्टर से आग्रह किया है कि इस विषय पर राजस्व विभाग और संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा कर जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई की जाए। उनका मानना है कि एक व्यावहारिक और संतुलित निर्णय से हजारों परिवारों को राहत मिलेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य विकास कार्यों को आगे बढ़ाना है, लेकिन विकास के साथ-साथ आम नागरिकों की सुविधाओं और अधिकारों का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। यदि केवल प्रभावित भूमि पर ही रोक रखी जाए और बाकी क्षेत्रों में रजिस्ट्री शुरू कर दी जाए तो इससे विकास कार्य भी प्रभावित नहीं होंगे और जनता को भी राहत मिलेगी।
नागरिकों में जगी उम्मीद
मंत्री द्वारा कलेक्टर को पत्र लिखे जाने के बाद क्षेत्र के लोगों में उम्मीद बढ़ी है कि प्रशासन जल्द ही सकारात्मक निर्णय लेगा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि अप्रभावित जमीनों की रजिस्ट्री शुरू होती है तो लंबे समय से रुके कई पारिवारिक और व्यावसायिक कार्य पूरे हो सकेंगे।
ग्रामीणों का मानना है कि प्रशासन यदि जमीनों का स्पष्ट सीमांकन कर प्रभावित और अप्रभावित क्षेत्रों की अलग सूची जारी कर दे तो भविष्य में किसी तरह का भ्रम भी नहीं रहेगा और लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
विकास और जनहित के बीच संतुलन जरूरी
राष्ट्रीय राजमार्ग जैसी परियोजनाएं किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। बेहतर सड़क संपर्क से व्यापार, परिवहन और निवेश को बढ़ावा मिलता है। हालांकि विकास परियोजनाओं के दौरान यह भी आवश्यक है कि आम नागरिकों के अधिकारों और आवश्यकताओं की अनदेखी न हो।
इसी सोच के साथ अब यह मांग जोर पकड़ रही है कि एनएच परियोजना से प्रभावित भूमि पर आवश्यक प्रतिबंध जारी रखते हुए बाकी क्षेत्रों में सामान्य रजिस्ट्री व्यवस्था बहाल की जाए। यदि प्रशासन इस दिशा में जल्द निर्णय लेता है तो यह हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।
