कोरबा रेलवे परिसर में कथित रूप से मैले राष्ट्रीय ध्वज लगाए जाने के विरोध में युवा कांग्रेस ने अनोखा प्रदर्शन किया। अधिकारियों को ‘बेशर्म फूल’ भेंट कर कार्रवाई, नया तिरंगा लगाने, ट्रेनों की लेटलतीफी दूर करने और गेवरा स्टेशन से बंद यात्री ट्रेनों को फिर शुरू करने की मांग की।
कोरबा (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) में रेलवे परिसर में कथित रूप से मैले और धूमिल राष्ट्रीय ध्वज लगाए जाने के मामले ने राजनीतिक रंग पकड़ लिया है। राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान से जुड़े इस मुद्दे को लेकर युवा कांग्रेस ने रेलवे प्रशासन के खिलाफ अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने रेलवे अधिकारियों को ‘बेशर्म फूल’ का गुलदस्ता भेंट कर अपनी नाराजगी व्यक्त की और इसे सरकारी तंत्र की लापरवाही का प्रतीक बताया।
युवा कांग्रेस का कहना है कि राष्ट्रीय ध्वज देश की अस्मिता, सम्मान और गौरव का प्रतीक है। ऐसे में यदि सार्वजनिक स्थल पर फटा, मैला या सम्मानजनक स्थिति में नहीं रखा गया तिरंगा दिखाई देता है तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा गंभीर विषय है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने रेलवे प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कई जनहित के मुद्दे भी उठाए।
मधुसूदन दास के नेतृत्व में हुआ प्रदर्शन
यह विरोध प्रदर्शन युवा कांग्रेस के जिला महासचिव मधुसूदन दास के नेतृत्व में आयोजित किया गया। प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं ने रेलवे अधिकारियों के कार्यालय पहुंचकर उन्हें ‘बेशर्म फूल’ का गुलदस्ता सौंपा। यह प्रतीकात्मक विरोध इस संदेश के साथ किया गया कि जिस प्रकार बेशर्म का पौधा उपेक्षा और अनियंत्रित स्थिति में भी बढ़ता रहता है, उसी तरह रेलवे प्रशासन भी जनता की शिकायतों और व्यवस्थागत कमियों के प्रति उदासीन बना हुआ है।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि रेलवे जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक संस्थान में राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा बनाए रखना अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि इसमें भी लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
राष्ट्रीय ध्वज बदलने की प्रमुख मांग

युवा कांग्रेस ने सबसे पहले रेलवे परिसर में लगे कथित मैले राष्ट्रीय ध्वज को तत्काल हटाकर उसकी जगह नया और सम्मानजनक तिरंगा लगाने की मांग की। कार्यकर्ताओं का कहना था कि भारतीय ध्वज संहिता के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज को सदैव सम्मानपूर्वक फहराया जाना चाहिए। यदि ध्वज क्षतिग्रस्त, गंदा या फीका पड़ जाए तो उसे समय पर बदलना संबंधित विभाग का दायित्व है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस और राष्ट्रीय पर्वों के दौरान देशभर में तिरंगे के सम्मान की बात की जाती है, ऐसे में सरकारी संस्थानों को स्वयं इस दिशा में उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।
रेलवे की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल
प्रदर्शन केवल राष्ट्रीय ध्वज तक सीमित नहीं रहा। युवा कांग्रेस ने रेलवे की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई गंभीर मुद्दे उठाए। संगठन का कहना था कि कोरबा क्षेत्र के यात्रियों को लंबे समय से ट्रेनों की अनियमितता और लेटलतीफी का सामना करना पड़ रहा है।
यात्रियों का आरोप है कि कई महत्वपूर्ण ट्रेनें निर्धारित समय से काफी देर से चलती हैं, जिससे छात्रों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और मरीजों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। प्रदर्शनकारियों ने रेलवे से समयबद्ध संचालन सुनिश्चित करने और यात्रियों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने की मांग की।
गेवरा स्टेशन से बंद यात्री ट्रेनों को फिर शुरू करने की मांग

युवा कांग्रेस ने गेवरा स्टेशन से बंद की गई यात्री ट्रेनों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। कार्यकर्ताओं का कहना था कि गेवरा और आसपास के क्षेत्रों के हजारों लोग रोजमर्रा के आवागमन के लिए रेलवे सेवाओं पर निर्भर हैं। कुछ यात्री ट्रेनों के बंद होने से लोगों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ और समय की बर्बादी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने रेलवे प्रशासन से मांग की कि स्थानीय जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बंद की गई यात्री ट्रेनों का संचालन जल्द से जल्द दोबारा शुरू किया जाए। इससे न केवल आम यात्रियों को राहत मिलेगी बल्कि क्षेत्रीय व्यापार और रोजगार गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
रेलवे अधिकारियों ने दिया सकारात्मक आश्वासन
विरोध प्रदर्शन के दौरान रेलवे अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा की और उनकी मांगों को गंभीरता से सुना। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि रेलवे परिसर में लगे राष्ट्रीय ध्वज की स्थिति का तत्काल निरीक्षण कराया जाएगा और आवश्यकता होने पर नया तिरंगा लगाया जाएगा।
इसके साथ ही अधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ट्रेनों की समयपालन व्यवस्था और गेवरा स्टेशन से जुड़ी मांगों को भी उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने का भरोसा दिया गया।
रेलवे प्रशासन के इस आश्वासन के बाद युवा कांग्रेस ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया, लेकिन स्पष्ट किया कि यदि तय समय में मांगों पर अमल नहीं हुआ तो आगे और बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान को लेकर बढ़ी संवेदनशीलता

भारत में राष्ट्रीय ध्वज केवल एक कपड़ा नहीं बल्कि देश की एकता, अखंडता और स्वतंत्रता का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान को लेकर आम नागरिकों के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठन भी बेहद संवेदनशील रहते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक संस्थानों में ध्वज की नियमित निगरानी और रखरखाव आवश्यक है, ताकि किसी प्रकार की अनदेखी या विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो। समय-समय पर ध्वज की स्थिति की जांच और आवश्यकता पड़ने पर उसे बदलना प्रशासनिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।
जनहित के मुद्दों पर भी चाहिए ठोस कार्रवाई
स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे से जुड़ी समस्याएं केवल राष्ट्रीय ध्वज तक सीमित नहीं हैं। ट्रेनों की लेटलतीफी, यात्री सुविधाओं की कमी, प्लेटफॉर्म पर साफ-सफाई, पेयजल व्यवस्था और स्थानीय ट्रेनों के संचालन जैसे मुद्दे लंबे समय से लोगों की चिंता बने हुए हैं।
नागरिकों का मानना है कि यदि रेलवे प्रशासन इन समस्याओं के समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करे तो लाखों यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही जनता और रेलवे के बीच विश्वास भी मजबूत होगा।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर रेलवे प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। यदि अधिकारियों द्वारा दिए गए आश्वासन के अनुसार नया राष्ट्रीय ध्वज लगाया जाता है, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होती है और यात्री सुविधाओं में सुधार की दिशा में कदम बढ़ते हैं तो यह प्रदर्शन अपने उद्देश्य में सफल माना जाएगा। वहीं यदि मांगों पर अमल नहीं हुआ तो राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की ओर से आंदोलन और तेज होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
