मिनीमाता हसदेव बांगो बांध से पानी छोड़े जाने के बाद हसदेव नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। सीतामढ़ी के तटीय क्षेत्रों में 10 से 15 मकानों में पानी घुस गया है। ग्रामीणों ने बिना पूर्व सूचना पानी छोड़े जाने और राहत टीम के देर से पहुंचने पर प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। जानिए पूरी रिपोर्ट।
कोरबा (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) जिले में लगातार हो रही बारिश और मिनीमाता हसदेव बांगो बांध से छोड़े गए पानी के कारण हसदेव नदी एक बार फिर उफान पर है। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के बाद सीतामढ़ी के तटीय इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बनने लगे हैं। नदी किनारे बसे कई परिवारों के घरों में पानी घुस गया है, जिससे लोगों को अपना जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की मशक्कत करनी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पानी बढ़ने की रफ्तार इतनी तेज थी कि उन्हें संभलने का भी पर्याप्त समय नहीं मिला। कई परिवार अपने घरों से घरेलू सामान, अनाज, कपड़े और जरूरी दस्तावेज निकालकर ऊंचे स्थानों पर ले जाने में जुटे रहे। बच्चों और बुजुर्गों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए ग्रामीण एक-दूसरे की मदद करते नजर आए।
10 से 15 मकानों में घुसा पानी, लोगों में बढ़ी चिंता

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सीतामढ़ी के तटीय क्षेत्र में करीब 10 से 15 मकानों में पानी प्रवेश कर चुका है। हालांकि अभी तक किसी जनहानि की सूचना नहीं है, लेकिन लगातार बढ़ते जलस्तर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
घरों में पानी भरने से घरेलू सामान खराब होने का खतरा पैदा हो गया है। कई परिवारों ने अपने पशुओं को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था शुरू कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा और नदी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो प्रभावित परिवारों की संख्या और बढ़ सकती है।
ग्रामीणों का आरोप—बिना सूचना छोड़ा गया पानी

तटीय क्षेत्र के निवासियों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बांध से पानी छोड़े जाने से पहले किसी प्रकार की मुनादी, सार्वजनिक घोषणा या आधिकारिक सूचना नहीं दी गई।
ग्रामीणों के मुताबिक यदि समय रहते जानकारी मिल जाती तो वे पहले ही अपने घरों से जरूरी सामान और पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा सकते थे। अचानक जलस्तर बढ़ने के कारण कई लोगों को नुकसान उठाना पड़ा।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नदी किनारे रहने वाले परिवार हर वर्ष बारिश के मौसम में ऐसी स्थिति का सामना करते हैं, इसलिए प्रशासन को पहले से अलर्ट जारी करना चाहिए ताकि लोगों को सुरक्षित निकलने का पर्याप्त समय मिल सके।
राहत और बचाव टीम के इंतजार में लोग

ग्रामीणों का कहना है कि पानी घरों तक पहुंचने के बाद भी लंबे समय तक राहत और बचाव दल मौके पर नहीं पहुंचा। इससे लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंच जाती तो लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, जरूरी सामान निकालने और संभावित नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती थी।
हालांकि प्रशासन की ओर से लगातार हालात पर नजर रखने की बात कही जा रही है, लेकिन प्रभावित परिवारों का कहना है कि जमीनी स्तर पर तत्काल सहायता की जरूरत है।
लगातार बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें
पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही है। बारिश के कारण नदी-नाले पहले से ही उफान पर हैं। ऐसे में बांध से छोड़े गए पानी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार वर्षा होने पर नदी में पानी की आवक बढ़ना स्वाभाविक है। यदि जलग्रहण क्षेत्र में तेज बारिश जारी रहती है तो नदी का जलस्तर और बढ़ सकता है। ऐसे में तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
तटीय इलाकों में बना बाढ़ का खतरा
हसदेव नदी के किनारे बसे कई गांव हर वर्ष मानसून के दौरान जलभराव और बाढ़ जैसी परिस्थितियों का सामना करते हैं। इस बार भी नदी का बढ़ता जलस्तर लोगों की चिंता का कारण बन गया है।
यदि आने वाले दिनों में बारिश जारी रहती है और बांध से पानी छोड़ने की आवश्यकता पड़ती है, तो निचले इलाकों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में प्रशासन के लिए समय रहते राहत एवं बचाव की तैयारी करना बेहद जरूरी होगा।
प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण समय
मानसून के दौरान जल प्रबंधन प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बन जाता है। एक ओर बांध में लगातार पानी की आवक बनी रहती है, वहीं दूसरी ओर जलस्तर नियंत्रित रखने के लिए समय-समय पर पानी छोड़ना भी जरूरी होता है।
लेकिन इसके साथ ही सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को समय रहते सूचित करना और राहत व्यवस्था सुनिश्चित करना भी होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक सूचना तंत्र, मोबाइल अलर्ट, मुनादी और स्थानीय प्रशासन के माध्यम से लोगों को पहले से सतर्क किया जा सकता है।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
नदी किनारे रहने वाले लोगों से अपील की जा रही है कि वे अनावश्यक रूप से नदी के पास न जाएं और प्रशासन द्वारा जारी किसी भी निर्देश का पालन करें। बच्चों को नदी के आसपास खेलने से रोकें तथा आवश्यक दस्तावेज, दवाइयां और जरूरी सामान सुरक्षित स्थान पर रखें।
यदि जलस्तर लगातार बढ़ता है तो लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने में देरी नहीं करनी चाहिए। स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी किसी भी चेतावनी पर तत्काल अमल करना आवश्यक है।
स्थिति पर लगातार नजर
फिलहाल हसदेव नदी का जलस्तर लगातार निगरानी में है। प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा स्थिति का आकलन किया जा रहा है। यदि बारिश का दौर जारी रहता है तो प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा सकती है।
स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी मांग यही है कि भविष्य में बांध से पानी छोड़े जाने से पहले पर्याप्त समय देकर सूचना दी जाए, ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि या आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।
