कोरबा में राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर भाजपा युवा मोर्चा ने कांग्रेस के खिलाफ पदयात्रा निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और तिरंगा देश की अस्मिता के प्रतीक हैं तथा इनके कथित अपमान को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर।
कोरबा (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में सोमवार को भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर राष्ट्रगीत के सम्मान के विपरीत कथित आचरण करने का आरोप लगाते हुए पदयात्रा निकाली और जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, युवा मोर्चा के कार्यकर्ता तथा समर्थक शामिल हुए।
भाजपा नेताओं का कहना था कि राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज किसी भी राजनीतिक दल से ऊपर हैं। इनका सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक और संवैधानिक दायित्व है। इसी भावना के साथ कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रसम्मान के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद की और कांग्रेस नेतृत्व से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
पदयात्रा निकालकर जताया विरोध
प्रदर्शन के दौरान भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने शहर के प्रमुख मार्गों से पदयात्रा निकाली। हाथों में तिरंगा और पार्टी के झंडे लिए कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रसम्मान के समर्थन में नारे लगाए। इस दौरान उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान देश की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा विषय है, जिसे किसी भी राजनीतिक विवाद से अलग रखा जाना चाहिए।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि जब भी राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा कोई विषय सामने आता है, तब हर नागरिक की जिम्मेदारी बनती है कि वह उसके संरक्षण और सम्मान के लिए आगे आए। इसी उद्देश्य से यह शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया।
उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने कांग्रेस पर साधा निशाना
प्रदर्शन के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार के उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और तिरंगा भारत की अस्मिता, गौरव और करोड़ों देशवासियों की भावनाओं के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि इन राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति किसी भी प्रकार का कथित अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि भाजपा का यह प्रदर्शन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रसम्मान की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। उनके अनुसार, राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के विषय पर किसी भी प्रकार की लापरवाही या असंवेदनशीलता उचित नहीं मानी जा सकती।
मंत्री देवांगन ने यह भी कहा कि यदि किसी घटना से देशवासियों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो संबंधित पक्ष को स्पष्ट रूप से अपनी स्थिति रखनी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर जनता से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग की।
भाजपा ने इसे बताया राष्ट्रहित का विषय
भाजपा नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान संविधान की मूल भावना से जुड़ा हुआ विषय है। उनका कहना था कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत और तिरंगे के सम्मान पर किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।
भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना था कि देश की आजादी के लिए लाखों स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति दी है। ऐसे में राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है।
बड़ी संख्या में शामिल हुए कार्यकर्ता
विरोध प्रदर्शन में भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं, जनप्रतिनिधियों और युवा मोर्चा के पदाधिकारियों ने भाग लिया। पदयात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से भी आवश्यक इंतजाम किए गए थे।
कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रभक्ति से जुड़े नारे लगाए और राष्ट्रीय एकता तथा अखंडता को मजबूत बनाए रखने का संकल्प भी दोहराया। प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
राजनीतिक माहौल में बढ़ी बयानबाजी
राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर उठे इस विवाद के बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा इस मुद्दे को राष्ट्रसम्मान से जोड़कर कांग्रेस पर सवाल उठा रही है, जबकि कांग्रेस की ओर से भी इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े विषय हमेशा संवेदनशील होते हैं और ऐसे मामलों में सभी राजनीतिक दलों से जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा की जाती है।
राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान का महत्व
भारत का राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान देश की सांस्कृतिक विरासत, स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक माने जाते हैं। इनसे करोड़ों भारतीयों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। सार्वजनिक कार्यक्रमों और राष्ट्रीय आयोजनों में इनका सम्मान करना नागरिकों के कर्तव्यों का हिस्सा माना जाता है।
राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत केवल प्रतीक नहीं हैं, बल्कि देश की पहचान, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय गौरव का प्रतिनिधित्व करते हैं। यही कारण है कि इनसे जुड़े किसी भी विवाद पर समाज और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं स्वाभाविक रूप से सामने आती हैं।
आगे क्या?
फिलहाल भाजपा ने इस मुद्दे को राष्ट्रसम्मान से जुड़ा बताते हुए कांग्रेस से सार्वजनिक माफी की मांग की है। आने वाले दिनों में यदि इस विषय पर कांग्रेस की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है, तो राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। वहीं आम नागरिकों की भी नजर इस बात पर रहेगी कि राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर सभी दल किस प्रकार अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।
