कोरबा के कटघोरा में भगवान शिव और भगवान राम पर कथित अभद्र टिप्पणी के आरोप में इंस्टाग्राम पोस्ट को लेकर मामला दर्ज। भाजपा पदाधिकारियों की शिकायत के बाद पुलिस ने बीएनएस की धारा 299 के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की।
कोरबा (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कटघोरा क्षेत्र में सोशल मीडिया पर भगवान शिव और भगवान राम को लेकर कथित अभद्र टिप्पणी किए जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों में नाराजगी देखने को मिली। शिकायत मिलने के बाद कटघोरा पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 299 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर साझा किए गए पोस्ट, वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की बारीकी से जांच की जा रही है तथा जांच के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कटघोरा निवासी नितेश मिरी उर्फ मिंटू मिरी पर आरोप है कि उसने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से सावन माह में मांस सेवन से जुड़े एक वीडियो को साझा किया। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उक्त वीडियो में भगवान शिव और भगवान राम सहित सनातन धर्म के देवी-देवताओं के संबंध में कथित रूप से आपत्तिजनक और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणियां की गई थीं।
बताया जा रहा है कि वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित होने लगा, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। मामले की जानकारी मिलते ही कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कार्रवाई की मांग की।
भाजपा पदाधिकारियों ने थाने पहुंचकर दी शिकायत
घटना के विरोध में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य मीना शर्मा, भाजपा जिला उपाध्यक्ष मनोज डिकसेना सहित अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता कटघोरा थाना पहुंचे। उन्होंने पुलिस को लिखित शिकायत सौंपते हुए आरोपी के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग की।
शिकायत में कहा गया कि सोशल मीडिया पर इस प्रकार की कथित टिप्पणियां समाज में धार्मिक सौहार्द बिगाड़ सकती हैं और लोगों की आस्था को ठेस पहुंचा सकती हैं। शिकायतकर्ताओं ने पुलिस से संबंधित पोस्ट को सुरक्षित रखने और मामले की निष्पक्ष जांच करने का आग्रह किया।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
शिकायत मिलने के बाद कटघोरा पुलिस ने प्रथम दृष्टया उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 299 के तहत अपराध दर्ज किया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच के दौरान सोशल मीडिया अकाउंट, साझा किए गए वीडियो, पोस्ट और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। यदि जांच में अन्य कानूनी प्रावधान लागू पाए जाते हैं तो उन्हें भी विवेचना में शामिल किया जाएगा।
डिजिटल साक्ष्यों की हो रही जांच
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच का प्रमुख आधार डिजिटल साक्ष्य होंगे। इसमें यह देखा जाएगा कि संबंधित वीडियो मूल रूप से किसने बनाया, किस अकाउंट से साझा किया गया, उसमें क्या सामग्री थी और उसका उद्देश्य क्या था। साथ ही पोस्ट की पहुंच, प्रतिक्रिया और उससे जुड़े अन्य तकनीकी पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया से जुड़े मामलों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का संरक्षण और तकनीकी विश्लेषण जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी की जरूरत
हाल के वर्षों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोगों के विचार साझा करने का प्रमुख माध्यम बन गए हैं। लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी बढ़ी है। किसी भी धर्म, समुदाय या व्यक्ति के संबंध में आपत्तिजनक या भड़काऊ सामग्री साझा करने से सामाजिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ कानून द्वारा निर्धारित सीमाओं का पालन करना भी आवश्यक है। यदि कोई सामग्री धार्मिक भावनाओं को आहत करने या सार्वजनिक शांति भंग करने की आशंका उत्पन्न करती है तो संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
लोगों से संयम बरतने की अपील
स्थानीय स्तर पर घटना के बाद लोगों में नाराजगी देखी गई, हालांकि पुलिस ने सभी पक्षों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी प्रकार की अफवाह या अपुष्ट जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा करने से बचें तथा कानून को अपना कार्य करने दें।
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई होगी।
जांच जारी
फिलहाल कटघोरा पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी के पास मामले से संबंधित कोई तथ्य या डिजिटल साक्ष्य हो तो वह पुलिस को उपलब्ध कराए।
