कटघोरा थाना में रिश्वत लेने के आरोप में दो आरक्षकों को पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद कार्रवाई की गई। जानिए पूरा मामला, जांच रिपोर्ट और पुलिस विभाग का रुख।
कोरबा (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) जिले के कटघोरा थाना में पदस्थ दो आरक्षकों के खिलाफ रिश्वत लेने की शिकायत सही पाए जाने के बाद पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी ने कड़ी कार्रवाई करते हुए दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई पुलिस विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
बताया जा रहा है कि एक आवेदक ने शपथपत्र के साथ पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कटघोरा थाना में पदस्थ दो आरक्षकों ने एक मामले में कार्रवाई करने के नाम पर उससे अवैध रूप से पैसे की मांग की और रकम भी वसूली। शिकायत मिलने के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया और तत्काल प्रारंभिक जांच के आदेश दिए गए।
4 अगस्त को दर्ज हुई थी शिकायत
जानकारी के अनुसार, 4 अगस्त 2026 को शिकायतकर्ता ने पुलिस अधीक्षक को शपथपत्र सहित आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि थाना स्तर पर मामले में कार्रवाई का दबाव बनाकर उससे रिश्वत ली गई। शिकायत के साथ उपलब्ध कराए गए तथ्यों को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने बिना देरी किए मामले की जांच कटघोरा के एसडीओपी को सौंप दी।
पुलिस विभाग ने यह स्पष्ट किया कि किसी भी पुलिसकर्मी के खिलाफ शिकायत आने पर तथ्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाती है ताकि दोषी और निर्दोष के बीच स्पष्ट अंतर किया जा सके। इसी प्रक्रिया के तहत जांच आगे बढ़ाई गई।
एसडीओपी की जांच में प्रथम दृष्टया सही पाए गए आरोप
कटघोरा के एसडीओपी द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में शिकायत को प्रथम दृष्टया सही पाया गया। जांच रिपोर्ट में दोनों आरक्षकों के कार्य व्यवहार और कर्तव्य निर्वहन पर गंभीर सवाल उठाए गए।
रिपोर्ट के अनुसार—
- दोनों आरक्षकों द्वारा कर्तव्य पालन में गंभीर लापरवाही बरती गई।
- उनकी कार्यशैली संदिग्ध पाई गई।
- विभागीय अनुशासन का पालन नहीं किया गया।
- पुलिस रेगुलेशन के प्रावधानों के विपरीत आचरण सामने आया।
- विभागीय नियमों के अनुरूप अपेक्षित अनुशासन और मर्यादा का पालन नहीं किया गया।
जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि दोनों कर्मचारियों का व्यवहार पुलिस सेवा की गरिमा के अनुरूप नहीं था। इसी आधार पर उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की गई।
एसपी सिद्धार्थ तिवारी ने तत्काल जारी किए निलंबन आदेश
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी ने मामले में तत्काल निर्णय लेते हुए दोनों आरक्षकों को निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए।
निलंबन आदेश के तहत दोनों आरक्षकों का मुख्यालय पुलिस लाइन, कोरबा निर्धारित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान वे बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे तथा विभागीय नियमों के अनुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि निलंबन एक विभागीय प्रक्रिया है और आगे की जांच पूरी होने के बाद नियमों के अनुरूप अंतिम कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस विभाग ने दिया स्पष्ट संदेश
इस कार्रवाई को पुलिस विभाग की जीरो टॉलरेंस नीति के रूप में देखा जा रहा है। विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि कोई पुलिसकर्मी अपने पद का दुरुपयोग करता है या रिश्वतखोरी जैसी गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ बिना किसी पक्षपात के कार्रवाई की जाएगी।
कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसी से जनता निष्पक्षता, ईमानदारी और पारदर्शिता की अपेक्षा करती है। ऐसे में शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई विभाग की विश्वसनीयता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
जनता का विश्वास बनाए रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस और आम नागरिकों के बीच भरोसे का रिश्ता कानून व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी होता है। जब किसी पुलिसकर्मी पर भ्रष्टाचार या रिश्वत लेने जैसे आरोप लगते हैं तो उसका असर केवल संबंधित कर्मचारी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे विभाग की छवि प्रभावित होती है।
ऐसी परिस्थितियों में शिकायतों की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर त्वरित कार्रवाई जनता का विश्वास मजबूत करने का कार्य करती है। कटघोरा थाना का यह मामला भी इसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।
आगे विभागीय जांच भी जारी रहेगी
पुलिस सूत्रों के अनुसार, फिलहाल यह कार्रवाई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। विभागीय जांच की आगामी प्रक्रिया में सभी तथ्यों, दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
यदि आगे की जांच में आरोप पूरी तरह प्रमाणित होते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय सेवा नियमों के तहत कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
भ्रष्टाचार के मामलों पर लगातार बढ़ रही सख्ती
हाल के वर्षों में पुलिस विभाग और राज्य शासन भ्रष्टाचार के मामलों पर लगातार सख्त रुख अपनाते दिखाई दे रहे हैं। शिकायतों की ऑनलाइन निगरानी, वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा समय-समय पर समीक्षा और त्वरित जांच जैसी व्यवस्थाओं के कारण कई मामलों में त्वरित कार्रवाई देखने को मिली है।
कटघोरा थाना के इस मामले में भी शिकायत मिलने के कुछ ही दिनों के भीतर प्रारंभिक जांच पूरी कर निलंबन की कार्रवाई होना इस बात का संकेत है कि विभाग अब भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतना चाहता।
