कोरबा में बजरंग दल ने जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि रक्षाबंधन सहित प्रमुख हिंदू त्योहारों के एक दिन पहले और एक दिन बाद परीक्षाएं आयोजित न की जाएं। संगठन ने विद्यार्थियों के मानसिक दबाव, पारिवारिक दायित्व और सांस्कृतिक मूल्यों का हवाला देते हुए परीक्षा कैलेंडर में बदलाव की मांग की।
कोरबा (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) । रक्षाबंधन सहित प्रमुख हिंदू त्योहारों के दौरान विद्यार्थियों की सुविधा और मानसिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए बजरंग दल कोरबा ने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को एक ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने मांग की है कि भविष्य में परीक्षा कार्यक्रम तैयार करते समय प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक पर्वों को प्राथमिकता दी जाए तथा ऐसे त्योहारों के एक दिन पहले और एक दिन बाद किसी भी प्रकार की परीक्षा आयोजित न की जाए।
बजरंग दल का कहना है कि त्योहार केवल धार्मिक आयोजन नहीं होते, बल्कि भारतीय परिवार व्यवस्था, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे समय में विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को एक साथ समय बिताने, रिश्तेदारों से मिलने तथा धार्मिक आयोजनों में भाग लेने का अवसर मिलना चाहिए। यदि त्योहारों के आसपास परीक्षाएं रखी जाती हैं तो विद्यार्थियों को पढ़ाई और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने में कठिनाई होती है।
जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपा गया ज्ञापन

संगठन के पदाधिकारियों ने जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में कहा कि परीक्षा कैलेंडर तैयार करते समय केवल शैक्षणिक गतिविधियों को ही नहीं, बल्कि प्रदेश और देश में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि रक्षाबंधन, दीपावली, दशहरा, होली, जन्माष्टमी और अन्य प्रमुख पर्वों के दौरान बड़ी संख्या में विद्यार्थी अपने परिवार के साथ यात्रा करते हैं या अपने गृह नगर जाते हैं। कई परिवारों में धार्मिक अनुष्ठान और सामाजिक कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं। ऐसे में परीक्षा की तिथि पड़ने से विद्यार्थियों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
विद्यार्थियों पर बढ़ता है मानसिक दबाव
बजरंग दल का कहना है कि परीक्षा का समय अपने आप में विद्यार्थियों के लिए तनावपूर्ण होता है। यदि उसी दौरान कोई बड़ा पारिवारिक या धार्मिक पर्व भी आ जाए तो मानसिक दबाव और बढ़ जाता है।
संगठन के अनुसार कई विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी और पारिवारिक कार्यक्रमों के बीच उलझ जाते हैं। कुछ विद्यार्थी त्योहारों में शामिल नहीं हो पाते, जबकि कुछ को परीक्षा के कारण यात्रा रद्द करनी पड़ती है। इससे उनकी पढ़ाई भी प्रभावित होती है और वे मानसिक रूप से भी असहज महसूस करते हैं।
संगठन ने शिक्षा विभाग से आग्रह किया कि परीक्षा कार्यक्रम इस प्रकार तैयार किया जाए जिससे विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ अपने पारिवारिक और सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करने का भी पर्याप्त अवसर मिल सके।
संस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव भी जरूरी
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए। भारतीय संस्कृति में परिवार, सामाजिक सहभागिता और धार्मिक परंपराओं का विशेष महत्व है।
बजरंग दल का कहना है कि विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक परंपराओं से जोड़ना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य होना चाहिए। यदि त्योहारों के दौरान लगातार परीक्षा का दबाव बना रहेगा तो नई पीढ़ी इन सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय रूप से भाग नहीं ले पाएगी।
संगठन ने कहा कि शिक्षा और संस्कृति दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। इसलिए परीक्षा कार्यक्रम बनाते समय इन पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
अभिभावकों की भी बढ़ती है परेशानी
संगठन का कहना है कि केवल विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि अभिभावकों को भी परीक्षा और त्योहार के बीच संतुलन बनाने में कठिनाई होती है।
त्योहारों के दौरान कई परिवार पहले से यात्रा की योजना बनाते हैं। रिश्तेदारों के यहां जाने या धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने की तैयारी भी रहती है। यदि उसी समय परीक्षा निर्धारित हो जाए तो पूरी योजना प्रभावित हो जाती है। कई मामलों में विद्यार्थियों को परीक्षा के कारण घर पर ही रुकना पड़ता है।
बजरंग दल का मानना है कि यदि परीक्षा तिथियों का निर्धारण सोच-समझकर किया जाए तो ऐसी परिस्थितियों से आसानी से बचा जा सकता है।
परीक्षा कैलेंडर में विशेष ध्यान देने की मांग
संगठन ने शिक्षा विभाग से आग्रह किया है कि आगामी शैक्षणिक सत्रों के लिए परीक्षा कार्यक्रम तैयार करते समय राज्य और राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख त्योहारों की सूची को ध्यान में रखा जाए।
इसके साथ ही मांग की गई है कि किसी भी बड़े त्योहार के एक दिन पहले और एक दिन बाद परीक्षा निर्धारित न की जाए, ताकि विद्यार्थियों को पर्याप्त समय मिल सके और वे बिना तनाव के परीक्षा की तैयारी भी कर सकें।
बजरंग दल ने उम्मीद जताई कि शिक्षा विभाग विद्यार्थियों और अभिभावकों की भावनाओं को समझते हुए इस सुझाव पर सकारात्मक निर्णय लेगा।
शिक्षा और संस्कृति के बीच संतुलन की जरूरत
शिक्षा विशेषज्ञ भी समय-समय पर यह राय देते रहे हैं कि परीक्षा कैलेंडर तैयार करते समय स्थानीय परिस्थितियों, सामाजिक आयोजनों और प्रमुख सार्वजनिक अवकाशों का समुचित ध्यान रखा जाना चाहिए। इससे न केवल विद्यार्थियों का तनाव कम होता है बल्कि उनकी शैक्षणिक तैयारी भी बेहतर होती है।
बजरंग दल का कहना है कि उनका उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था का विरोध करना नहीं है, बल्कि परीक्षा कार्यक्रम को अधिक व्यावहारिक और विद्यार्थी हितैषी बनाना है। संगठन का मानना है कि यदि शिक्षा विभाग इस दिशा में सकारात्मक पहल करता है तो विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ अपने परिवार और संस्कृति से जुड़े रहने का भी अवसर मिलेगा।
