कटघोरा नगर पालिका के अटल परिसर में स्थापित भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी की कांस्य प्रतिमा गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरने के मामले में नगरीय प्रशासन विभाग ने उप अभियंता चन्द्र प्रकाश जायसवाल को निलंबित कर दिया। जानिए जांच रिपोर्ट, कार्रवाई की वजह और पूरे मामले की विस्तृत जानकारी।
रायपुर, 31 जुलाई 2026 (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने कोरबा जिले के कटघोरा नगर पालिका क्षेत्र में स्थित अटल परिसर में स्थापित भारतरत्न एवं देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की कांस्य प्रतिमा से जुड़े मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। विभाग ने प्रतिमा निर्माण में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने के बाद तत्कालीन उप अभियंता चन्द्र प्रकाश जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
यह कार्रवाई विभागीय जांच में सामने आई उन तथ्यों के आधार पर की गई है, जिनमें प्रतिमा निर्माण कार्य को स्वीकृत प्राक्कलन और निर्धारित तकनीकी मानकों के विपरीत पाया गया। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि प्रतिमा में शुरुआती समय से ही गुणवत्ता संबंधी गंभीर खामियां मौजूद थीं, जिसके कारण प्रतिमा लगातार क्षतिग्रस्त होती रही।
जांच रिपोर्ट के आधार पर हुई कार्रवाई
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, कटघोरा स्थित अटल परिसर में स्थापित प्रतिमा को लेकर लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। शिकायतों में प्रतिमा की गुणवत्ता, निर्माण सामग्री तथा उसकी मजबूती पर सवाल उठाए गए थे।
इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने बिलासपुर संभागीय क्षेत्रीय कार्यालय के संयुक्त संचालक से पूरे मामले की जांच कराई। विस्तृत निरीक्षण और तकनीकी परीक्षण के बाद प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में कई गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि हुई।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि प्रतिमा का निर्माण स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप नहीं किया गया। इसके अलावा प्रतिमा की बाहरी सतह से कई स्थानों पर परत उखड़ने लगी थी, जिससे उसकी वास्तविक गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लग गया।
कांस्य प्रतिमा के मानकों का नहीं हुआ पालन
जांच में सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि जिस प्रतिमा को कांस्य (ब्रॉन्ज) प्रतिमा के रूप में स्थापित किया गया था, वह निर्धारित गुणवत्ता एवं तकनीकी मानकों पर खरी नहीं उतरी।
विशेषज्ञों ने निरीक्षण के दौरान पाया कि प्रतिमा के कई हिस्सों में सतह क्षतिग्रस्त हो रही थी और उसकी बाहरी परत लगातार उखड़ रही थी। इससे यह स्पष्ट हुआ कि निर्माण प्रक्रिया में गुणवत्ता नियंत्रण का पर्याप्त पालन नहीं किया गया।
सरकारी परियोजनाओं में स्थापित सार्वजनिक स्मारकों और प्रतिमाओं के लिए निर्धारित निर्माण मानकों का पालन अनिवार्य होता है, ताकि वे वर्षों तक सुरक्षित और आकर्षक बनी रहें। इस मामले में इन मानकों की अनदेखी सामने आने के बाद विभाग ने जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई की।
उप अभियंता को माना गया जिम्मेदार

विभागीय जांच में पाया गया कि प्रतिमा निर्माण कार्य के दौरान तत्कालीन उप अभियंता चन्द्र प्रकाश जायसवाल की भूमिका निर्माण प्रक्रिया की निगरानी और तकनीकी परीक्षण से जुड़ी हुई थी।
जांच प्रतिवेदन के अनुसार, निर्माण कार्य में हुई अनियमितताओं के लिए उन्हें उत्तरदायी माना गया। उनके द्वारा अपने पदीय दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं किए जाने और निर्माण प्रक्रिया में आवश्यक तकनीकी सतर्कता नहीं बरतने के कारण उनके विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की गई।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने संचालनालय से जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि यह निलंबन तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
सार्वजनिक संपत्तियों की गुणवत्ता पर सरकार का सख्त रुख
राज्य सरकार पिछले कुछ समय से सरकारी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दे रही है। सड़क, भवन, जल संरचना, पार्क, प्रतिमा और अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों में किसी भी प्रकार की तकनीकी लापरवाही या वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है।
कटघोरा अटल परिसर का यह मामला भी इसी दिशा में सरकार की जवाबदेही तय करने की नीति का हिस्सा माना जा रहा है। विभाग का मानना है कि सार्वजनिक धन से निर्मित परिसंपत्तियों में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
पहले भी उठ चुके थे सवाल
कटघोरा नगर पालिका के अटल परिसर में स्थापित पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा को लेकर स्थानीय स्तर पर पहले भी कई बार सवाल उठाए गए थे। प्रतिमा की गुणवत्ता और उसकी निर्माण सामग्री को लेकर शिकायतें सामने आई थीं।
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों द्वारा भी समय-समय पर प्रतिमा की स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई थी। शिकायतों के बाद विभाग ने तकनीकी जांच कराई, जिसमें सामने आए तथ्यों के आधार पर अब प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।
अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का महत्व
भारतरत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी देश के लोकप्रिय और सम्मानित प्रधानमंत्रियों में गिने जाते हैं। उनके सम्मान में विभिन्न राज्यों में प्रतिमाएं और स्मारक स्थापित किए गए हैं।
ऐसे में किसी भी सार्वजनिक स्थल पर स्थापित उनकी प्रतिमा का निर्माण उच्च गुणवत्ता और निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप होना अपेक्षित माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय व्यक्तित्वों की प्रतिमाओं के निर्माण में गुणवत्ता और दीर्घकालिक संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
आगे क्या हो सकता है?
निलंबन के बाद विभागीय स्तर पर आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। यदि विस्तृत विभागीय जांच में अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों या संबंधित एजेंसियों की भूमिका सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई संभव है।
साथ ही प्रतिमा की गुणवत्ता को लेकर तकनीकी सुधार अथवा पुनर्निर्माण संबंधी निर्णय भी विभाग द्वारा भविष्य में लिया जा सकता है, ताकि सार्वजनिक स्थल पर स्थापित प्रतिमा निर्धारित मानकों के अनुरूप रहे।
पारदर्शिता और जवाबदेही का संदेश
इस कार्रवाई को प्रशासनिक जवाबदेही के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकारी परियोजनाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता और तकनीकी मानकों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना आवश्यक माना जाता है।
कटघोरा अटल परिसर प्रतिमा प्रकरण में हुई यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि सार्वजनिक निर्माण कार्यों में लापरवाही या मानकों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध विभाग सख्त रुख अपनाने के लिए तैयार है।
