कोरबा के कटघोरा वनमंडल के केंदई वन परिक्षेत्र के ग्राम छिरहिड़िया में खुले कुएं में गिरे जंगली भालू को वन विभाग ने 15 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बाहर निकालकर जंगल में छोड़ा। पढ़ें पूरी खबर, रेस्क्यू अभियान और वन विभाग की अपील।
कोरबा (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कटघोरा वनमंडल में वन विभाग ने धैर्य, तकनीकी सूझबूझ और टीमवर्क का परिचय देते हुए एक जंगली भालू की सफलतापूर्वक जान बचाई। केंदई वन परिक्षेत्र के अंतर्गत ग्राम छिरहिड़िया में एक वयस्क जंगली भालू खुले कुएं में गिर गया था। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और करीब 15 घंटे तक चले चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू अभियान के बाद भालू को सुरक्षित बाहर निकालकर उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया।
इस सफल अभियान ने न केवल वन विभाग की तत्परता को साबित किया, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के प्रति विभाग की गंभीरता और विशेषज्ञता को भी सामने रखा। स्थानीय ग्रामीणों ने भी पूरे अभियान के दौरान सहयोग किया, जिससे बिना किसी अप्रिय घटना के रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा हो सका।
सुबह मिली सूचना, तुरंत हरकत में आया वन विभाग
जानकारी के अनुसार ग्राम छिरहिड़िया के ग्रामीणों ने सुबह खेतों की ओर जाते समय एक खुले कुएं से अजीब आवाजें सुनीं। जब लोगों ने कुएं के भीतर झांककर देखा तो उसमें एक जंगली भालू फंसा हुआ था। घटना की सूचना तत्काल वन विभाग को दी गई।
सूचना मिलते ही केंदई वन परिक्षेत्र की टीम वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में मौके पर पहुंची। सबसे पहले कुएं के आसपास सुरक्षा घेरा बनाया गया ताकि भीड़ इकट्ठी न हो और भालू तनावग्रस्त न हो। वन कर्मचारियों ने ग्रामीणों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की।
रेस्क्यू ऑपरेशन आसान नहीं था
वन अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि भालू को बिना किसी चोट के सुरक्षित बाहर निकाला जाए। कुआं गहरा होने के कारण सामान्य तरीके से रेस्क्यू संभव नहीं था। वहीं यदि भालू को ट्रैंकुलाइज (बेहोश) किया जाता तो पानी या सीमित जगह में उसकी जान को खतरा हो सकता था।
इसी कारण विशेषज्ञों ने प्राकृतिक और सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करने की रणनीति बनाई। कई घंटों तक लगातार स्थिति का आकलन किया गया और भालू के व्यवहार पर नजर रखी गई। टीम ने ऐसे उपाय किए जिससे भालू स्वयं बाहर निकल सके।
करीब 15 घंटे तक लगातार चले अभियान के दौरान वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी पूरी मुस्तैदी के साथ डटे रहे। आखिरकार प्रयास सफल रहा और भालू सुरक्षित कुएं से बाहर निकल आया।
प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया भालू
रेस्क्यू के बाद वन विभाग ने भालू की स्थिति का निरीक्षण किया। प्राथमिक परीक्षण में वह सामान्य और स्वस्थ पाया गया। इसके बाद उसे सुरक्षित तरीके से जंगल के भीतर उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
वन अधिकारियों के अनुसार रेस्क्यू के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि भालू को कम से कम तनाव हो और उसे किसी प्रकार की शारीरिक क्षति न पहुंचे। यही कारण रहा कि पूरे अभियान में अत्यधिक सावधानी बरती गई।
तकनीकी सूझबूझ और टीमवर्क बना सफलता की कुंजी
वन विभाग ने बताया कि इस पूरे अभियान में तकनीकी समझ, धैर्य और टीमवर्क की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बिना ट्रैंकुलाइज किए किसी जंगली भालू को सुरक्षित बाहर निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में यदि जानवर को घबराहट से बचाया जाए और उसे प्राकृतिक रूप से बाहर निकलने का अवसर दिया जाए तो उसके घायल होने की संभावना काफी कम हो जाती है। इसी रणनीति को अपनाकर वन विभाग ने सफल रेस्क्यू किया।
खुले कुएं वन्यजीवों के लिए बन रहे खतरा

वन क्षेत्रों से लगे गांवों में बड़ी संख्या में ऐसे खुले कुएं मौजूद हैं, जिन पर सुरक्षा जाली या मजबूत मुंडेर नहीं बनी है। यही कारण है कि अक्सर जंगली भालू, तेंदुआ, हिरण, नीलगाय और अन्य वन्यजीव इनमें गिर जाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इन खुले कुओं को सुरक्षित नहीं किया गया तो भविष्य में इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आती रहेंगी। इससे वन्यजीवों के साथ-साथ ग्रामीणों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि जिन कुओं का नियमित उपयोग नहीं हो रहा है, उन्हें जाली, मजबूत मुंडेर या अन्य सुरक्षा उपायों से ढंकने की दिशा में पहल करें।
वन विभाग की ग्रामीणों से महत्वपूर्ण अपील
रेस्क्यू अभियान के बाद वन विभाग ने क्षेत्रवासियों से महत्वपूर्ण अपील करते हुए कहा है कि यदि किसी भी वन्यजीव के आबादी क्षेत्र में आने, घायल होने या किसी दुर्घटना में फंसने की जानकारी मिले तो स्वयं उसे बचाने का प्रयास न करें।
ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग को सूचना दें ताकि प्रशिक्षित टीम मौके पर पहुंचकर सुरक्षित रेस्क्यू कर सके। अनियंत्रित भीड़ या बिना प्रशिक्षण के किए गए प्रयास वन्यजीव और इंसानों दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।
मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ रहा संपर्क
कोरबा, कटघोरा और आसपास के वन क्षेत्रों में मानव और वन्यजीवों का संपर्क पिछले कुछ वर्षों में बढ़ा है। जंगलों के समीप खेती, ग्रामीण बस्तियों का विस्तार और जल स्रोतों की कमी जैसी परिस्थितियों के कारण जंगली जानवर अक्सर आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं।
वन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में लोगों की जागरूकता और वन विभाग के साथ समन्वय बेहद आवश्यक है। समय पर सूचना मिलने से अधिकांश मामलों में वन्यजीवों को सुरक्षित बचाया जा सकता है और किसी बड़े हादसे से बचा जा सकता है।
वन्यजीव संरक्षण का सकारात्मक उदाहरण बना यह अभियान
कटघोरा वनमंडल में चला यह 15 घंटे का रेस्क्यू अभियान वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आया है। इस अभियान ने साबित किया कि धैर्य, वैज्ञानिक सोच और प्रशिक्षित टीम की मदद से कठिन परिस्थितियों में भी वन्यजीवों की जान बचाई जा सकती है।
स्थानीय लोगों ने भी वन विभाग के प्रयासों की सराहना की और भविष्य में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए प्रशासन के साथ सहयोग करने का भरोसा जताया।
