बिलासपुर जिला के खोंगसरा-टेंगनमाड़ा मार्ग के सुखानाला म एक वृद्ध भालू के शव मिलिस। ग्रामीण मन के दावा हे कि भालू कई दिन ले भोजन अऊ पानी के तलाश म गांव म भटकत रहिस। वन विभाग जांच म जुटे हे। पढ़व पूरा खबर छत्तीसगढ़ी म।
बिलासपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला ले एक दुखद अऊ चिंताजनक मामला सामने आइस हे। खोंगसरा-टेंगनमाड़ा मार्ग के सुखानाला इलाका म एक वृद्ध भालू के शव मिलिस। ए घटना ले सिरिफ वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था ऊपर सवाल नई उठे हे, बल्कि समय पर रेस्क्यू नई होए के आरोप घलो सामने आइस हे।
ग्रामीण मन के मुताबिक, ए भालू पिछले कई दिन ले जंगल ले निकलके गांव अऊ तेंदूपत्ता फड़ के आसपास भोजन अऊ पानी के तलाश म भटकत रहिस। भालू के कमजोर हालत ला देखके स्थानीय लोगन मन वन विभाग ला जानकारी देय के बात कहिथें, फेर समय रहते रेस्क्यू नई होए के कारण अब भालू के मौत होगे। हालांकि, वन विभाग ए दावा के जांच करत हे अऊ मौत के असली कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आही तबे स्पष्ट होही।
सुखानाला म मिलिस वृद्ध भालू के शव
मंगलवार के दिन सुखानाला इलाका म लोगन मन एक भालू ला मृत अवस्था म देखिन। खबर फैलतेच आसपास के गांव ले भारी संख्या म लोगन घटना स्थल पहुंच गइन।
ग्रामीण मन के सूचना मिलतेच वन विभाग के टीम तत्काल मौके म पहुंचिस अऊ पूरा इलाका के निरीक्षण करके शव ला अपन कब्जा म ले लिस। अधिकारी मन के शुरुआती जांच म ए बात सामने आइस कि भालू काफी बूढ़ा अऊ कमजोर रहिस।
फिलहाल शव के पोस्टमार्टम कराय जावत हे ताकि मौत के सही कारण के जानकारी मिल सके।
ग्रामीण मन के दावा – कई दिन ले भटकत रहिस भालू
स्थानीय ग्रामीण मन बताथें कि ए भालू पिछले कई दिन ले जंगल छोड़के गांव अऊ तेंदूपत्ता संग्रहण केंद्र (फड़) के आसपास लगातार दिखाई देत रहिस।
उनकर कहना हे कि भालू शायद भोजन अऊ पानी के कमी के कारण जंगल ले बाहर निकल आए रहिस। कई लोगन ओकर कमजोर हालत देखके चिंता जताइन अऊ वन विभाग तक जानकारी पहुंचाय के बात घलो कहिन।
ग्रामीण मन के आरोप हे कि अगर समय रहते भालू के रेस्क्यू करके इलाज करे जातिस, त शायद ओकर जान बच सकत रहिस।
हालांकि, ए बात के आधिकारिक पुष्टि अभी तक वन विभाग के तरफ ले नई करे गे हे।
वन विभाग जांच म जुटिस
घटना के जानकारी मिलतेच वन विभाग के अधिकारी मन जांच शुरू कर दिहिन। विभाग के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आवत तक मौत के कारण बताय संभव नई हे।
वन विभाग के टीम आसपास के जंगल, घटनास्थल अऊ भालू के आवाजाही के रास्ता के घलो जांच करत हे। अधिकारी मन ए बात के घलो पता लगावत हें कि भालू प्राकृतिक कारण ले मरिस, बीमारी ले या फेर दूसर कोनो कारण जिम्मेदार रहिस।
उम्र अऊ कमजोरी घलो हो सकथे कारण
वन्यजीव विशेषज्ञ मन के अनुसार, जेन भालू जियादा बूढ़ा हो जाथे, ओकर शिकार करे के क्षमता कम हो जाथे। भोजन खोजे म दिक्कत होथे अऊ कई बार वो जंगल छोड़के गांव के आसपास पहुंच जाथे।
अगर जंगल म पानी अऊ भोजन के उपलब्धता कम होवय, त ए स्थिति अउ घलो गंभीर हो सकथे।
हालांकि, विशेषज्ञ मन कहिथें कि सिरिफ उम्र के आधार म मौत के कारण तय नई करे जा सकय। ए बर वैज्ञानिक जांच अऊ पोस्टमार्टम रिपोर्ट जरूरी होथे।
वन्यजीव संरक्षण ऊपर फेर उठिस सवाल
ए घटना के बाद वन्यजीव संरक्षण अऊ रेस्क्यू व्यवस्था ऊपर एक बार फेर सवाल उठे लागिस। सामाजिक कार्यकर्ता अऊ पर्यावरण प्रेमी मन के कहना हे कि जंगल ले बाहर निकले घायल, बीमार या कमजोर वन्यजीव मन के सूचना मिलतेच तत्काल कार्रवाई होना चाही।
समय पर रेस्क्यू अऊ इलाज मिले ले कई वन्यजीव मन के जान बचाय जा सकथे।
विशेषज्ञ मन के मुताबिक, मानव अऊ वन्यजीव संघर्ष के घटना लगातार बढ़त जावत हे। एखर सेती वन विभाग, स्थानीय प्रशासन अऊ ग्रामीण मन के बीच बेहतर समन्वय बहुत जरूरी होगे हे।
जंगल म भोजन अऊ पानी के कमी बनत हे चुनौती
गर्मी अऊ बरसात के बीच कई इलाका म जंगल के प्राकृतिक संसाधन प्रभावित होथें। कई बखत पानी के स्रोत सूख जाथें या भोजन के कमी हो जाथे।
अइसने स्थिति म भालू, हाथी, तेंदुआ अऊ दूसर वन्यजीव गांव के आसपास पहुंच जाथें, जेन ले मानव-वन्यजीव संघर्ष के संभावना घलो बढ़ जाथे।
वन विशेषज्ञ मन के कहना हे कि जंगल म पर्याप्त जलस्रोत, फलदार पेड़ अऊ प्राकृतिक भोजन के व्यवस्था बने रहना बहुत जरूरी हे ताकि वन्यजीव मन ला जंगल छोड़के बाहर नई आना पड़े।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद साफ होही तस्वीर
फिलहाल वन विभाग भालू के शव के पोस्टमार्टम करावत हे। रिपोर्ट आवत के बादे ए बात साफ हो पाही कि भालू के मौत प्राकृतिक कारण ले होइस, बीमारी ले, भूख-प्यास ले या फेर कोनो दूसर वजह जिम्मेदार रहिस।
जांच रिपोर्ट के आधार म जरूरत पड़य त विभाग आगू के कार्रवाई घलो कर सकथे।
वन्यजीव संरक्षण म जनभागीदारी घलो जरूरी
वन्यजीव विशेषज्ञ मन कहिथें कि जंगल म रहइया जीव-जंतु के सुरक्षा सिरिफ वन विभाग के जिम्मेदारी नई हे। आम नागरिक मन घलो ए म महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकथें।
अगर कोनो घायल, बीमार या कमजोर वन्यजीव दिखाई देवय, त ओकर नजदीक जाए के बजाय तुरंत वन विभाग ला सूचना देना चाही। समय पर मिले जानकारी कई बखत एक बेजुबान जीव के जान बचा सकथे।
बिलासपुर के ए घटना एक बार फेर याद दिलाथे कि वन्यजीव संरक्षण बर संवेदनशीलता, त्वरित कार्रवाई अऊ बेहतर समन्वय के जरूरत आज पहले ले जियादा हे।
