छत्तीसगढ़ के 25 बछर के सफर मं इतिहास, संस्कृति, खनिज संपदा, कृषि, पर्यटन, उद्योग अऊ 2047 तक के विकास के विजन ला जानव। पढ़व छत्तीसगढ़ के अतीत ले भविष्य तक के विस्तृत चिट्ठा छत्तीसगढ़ी भाखा मं।
रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)।एक नवंबर 2000 के दिन छत्तीसगढ़ भारत के 26वां राज के रूप मं अस्तित्व मं आइस। आज 25 बछर बाद ये प्रदेश अपन मेहनत, संसाधन, संस्कृति अऊ जनशक्ति के दम मं देश के सबसे तेजी ले बढ़त राज मन मं गिनाय जाथे। बस्तर के घना जंगल, सरगुजा के पहाड़, कोरबा के बिजली घर, भिलाई के इस्पात संयंत्र, रायपुर के आधुनिक शहर अऊ गांव-गांव मं बसत लोक संस्कृति – ए सब्बो मिलके छत्तीसगढ़ के अलग पहचान बनाथें।
छत्तीसगढ़ के कहानी सिरिफ विकास के नई, बल्कि हजारों बछर पुराना इतिहास, संघर्ष, परंपरा अऊ भविष्य के भरोसा के कहानी घलो आय।
तीन हजार बछर ले जियात इतिहास
इतिहासकार मन के मुताबिक छत्तीसगढ़ के पुराना नाव दक्षिण कोसल रहिस। बस्तर के सिंघनपुर अऊ काबरा पहाड़ मं मिले शैलचित्र ये बात के सबूत देथें कि इहां हजारों बछर पहिली मानव बसाहट रहिस। ए चित्र मन आज घलो प्रदेश के गौरव हवंय।
मौर्य अऊ गुप्त शासन के समय छत्तीसगढ़ के धार्मिक अऊ सांस्कृतिक महत्व बढ़िस। सरगुजा इलाका मं सम्राट अशोक के शिलालेख आज घलो इतिहास के गवाही देथें। ओकर बाद कलचुरी राजवंश के शासन मं रतनपुर अऊ तुम्मान सांस्कृतिक अऊ राजनीतिक केंद्र बनिस। मल्हार, पाली, खरौद जइसन मंदिर आज घलो ओ जमाना के समृद्ध विरासत ला बताथें।
मराठा शासन के समय ‘छत्तीसगढ़’ नाम के प्रचलन होइस, जऊन ला 36 गढ़ मन के आधार मं जोड़े जाथे। अंग्रेज शासन मं ए इलाका सेंट्रल प्रोविंस के हिस्सा बनिस, फेर अपन अलग पहचान बनाय रखिस।
आजादी के लड़ई मं घलो छत्तीसगढ़ के योगदान कम नई रहिस। बस्तर के प्रसिद्ध भूमकाल विद्रोह मं वीर गुण्डाधूर के नेतृत्व आज घलो इतिहास मं सम्मान के संग याद करे जाथे।
अलग राज्य बनाय के सपना होइस पूरा
1990 के दशक मं अलग छत्तीसगढ़ राज के मांग तेज होइस। लोगन के मानना रहिस कि प्राकृतिक संपदा से भरपूर होय के बाद घलो इलाका विकास ले पिछड़ गे हवय। आखिरकार संसद मं कानून पारित होइस अऊ 1 नवंबर 2000 के दिन छत्तीसगढ़ अलग राज्य बन गे। रायपुर ला राजधानी बनाय गीस अऊ प्रदेश के विकास के नई सफर शुरू होइस।
आज के छत्तीसगढ़: संसाधन अऊ संभावना के धरती
आज छत्तीसगढ़ लगभग 1.35 लाख वर्ग किलोमीटर मं फइलाय हवय। प्रदेश के आबादी करीब 3 करोड़ हे, जेमां लगभग एक तिहाई हिस्सा आदिवासी समाज के हवय।
प्रदेश के लगभग 46 प्रतिशत इलाका जंगल ले ढंकाय हवय, जऊन देश के सबसे जादा वन क्षेत्र वाले राज्य मन मं शामिल करथे।
खनिज संपदा के बात करन त छत्तीसगढ़ कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, डोलोमाइट अऊ टिन उत्पादन मं देश के अग्रणी राज्य मन मं गिनाय जाथे। कोरबा ला देश के ऊर्जा राजधानी कहे जाथे, काबर इहां हजारों मेगावाट बिजली उत्पादन होथे।
खेती-किसानी घलो प्रदेश के अर्थव्यवस्था के मजबूत आधार आय। करीब 40 लाख हेक्टेयर मं धान के खेती होथे, एही से छत्तीसगढ़ ला धान के कटोरा कहे जाथे।
लोक संस्कृति – छत्तीसगढ़ के असली पहचान
छत्तीसगढ़ के असली ताकत ओकर संस्कृति मं बसत हवय। पंडवानी, राउत नाचा, कर्मा, सुआ, ददरिया जइसन लोककला मन आज घलो गांव-गांव मं जीवित हवंय।
पद्म विभूषण तीजन बाई ह पंडवानी ला अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाइस। हरेली, तीजा, मड़ई, पोला अऊ दीपावली जइसन पर्व सिरिफ त्योहार नई, बल्कि समाज ला जोड़इया परंपरा हवंय।
चीला, फरा, बोर-बासी, अंगाकर रोटी अऊ महुआ जइसन पारंपरिक खान-पान आज घलो छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक पहचान बने हवय। एही बीच छत्तीसगढ़ी भाखा ला संविधान के आठवीं अनुसूची मं शामिल करे के मांग घलो लगातार उठत हवय।
2030 तक के विकास के नई दिशा
आने वाला बछर मन मं छत्तीसगढ़ हरित ऊर्जा, उद्योग, पर्यटन अऊ तकनीक के क्षेत्र मं नई पहचान बनाय के तैयारी मं हवय।
बस्तर अऊ सरगुजा मं बड़े सौर ऊर्जा परियोजना ऊपर काम चलत हवय। कोरबा अऊ रायगढ़ मं ग्रीन हाइड्रोजन जइसन नई तकनीक के संभावना देखे जात हवय।
खेती मं कोदो-कुटकी, रागी जइसन मोटा अनाज ला बढ़ावा देके किसान मन के आमदनी बढ़ाय के योजना बनत हवय। फूड प्रोसेसिंग अऊ वनोपज आधारित उद्योग आदिवासी इलाका मन बर रोजगार के नई अवसर बन सकत हवंय।
प्रदेश मं 600 ले जादा औषधीय पौधा पाय जाथे। हर्बल उद्योग अऊ आयुष चिकित्सा ला बढ़ावा देके छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख हर्बल हब बने के दिशा मं काम करत हवय।
पर्यटन मं अपार संभावना
चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़, कुटुमसर गुफा, सिरपुर, डोंगरगढ़, बारनवापारा, गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान अऊ राम वन गमन पथ जइसन स्थल मन हर साल लाखों पर्यटक ला अपन तरफ खींचथें।
अगर पर्यटन ढांचा अऊ सुविधामन के अउ बढ़ोतरी होही त हजारों स्थानीय युवा मन बर रोजगार के अवसर बन सकही।
युवा, उद्योग अऊ तकनीक बनहीं भविष्य के आधार
नवा रायपुर ला आईटी अऊ स्टार्टअप हब के रूप मं विकसित करे के प्रयास होवत हवय। ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल सेवा अऊ MSME उद्योग मन मं निवेश के संभावना लगातार बढ़त हवय।
रायपुर मं AIIMS, IIT अऊ IIM जइसन राष्ट्रीय संस्थान प्रदेश के युवा मन ला उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर देत हवंय। आने वाला समय मं कौशल विकास अऊ तकनीकी शिक्षा रोजगार के नई रास्ता खोल सकथे।
चुनौती अभी घलो कम नइये
प्रदेश के विकास यात्रा मं कुछ चुनौती घलो हवंय। बस्तर के कुछ इलाका मं नक्सल समस्या, गांव ले शहर पलायन, पर्यावरण संरक्षण अऊ संतुलित औद्योगिक विकास ऊपर लगातार काम करे के जरूरत हवय।
सरकार मन विकास अऊ सुरक्षा ला संग-संग लेके चले के प्रयास करत हवंय, ताकि हर गांव तक शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क अऊ रोजगार पहुंच सके।
2047 के सपना: समृद्ध अऊ आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़
आने वाला समय छत्तीसगढ़ बर बेहद महत्वपूर्ण हो सकथे। प्राकृतिक संपदा, मेहनती किसान, समृद्ध संस्कृति, युवा आबादी अऊ आधुनिक सोच – ए पांचों ताकत अगर सही दिशा मं काम करहीं, त छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्य मन मं शामिल हो सकथे।
2047 तक हरित विकास, मजबूत अर्थव्यवस्था, बढ़िया शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य अऊ लोक संस्कृति के संरक्षण के संग छत्तीसगढ़ अपन अलग पहचान अउ मजबूत कर सकथे।
छत्तीसगढ़ के माटी सिरिफ खनिज नई, बल्कि मेहनत, संस्कृति अऊ आत्मविश्वास ले भरपूर हवय। एही माटी के खुशबू आज प्रदेश ला नई ऊंचाई तक ले जाए बर तैयार दिखत हवय।
