कोरबा के रजगामार म घायल मिले मॉटल्ड वुड आउल (उल्लू) ला वन विभाग अऊ नोवा नेचर के संयुक्त प्रयास ले बचाय गीस। इलाज के बाद स्वस्थ होके फेर जंगल म छोड़ाय गीस। जानव पूरा खबर अऊ ए पक्षी के महत्व।
कोरबा (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला अपन हरियर जंगल, जैव विविधता अऊ दुर्लभ वन्यजीव मन बर देशभर म पहचान रखथे। एही समृद्ध प्रकृति के बीच एक प्रेरणादायक घटना सामने आइस, जिहां घायल अवस्था म मिले एक मॉटल्ड वुड आउल (Strix ocellata) ला वन विभाग अऊ सामाजिक संस्था नोवा नेचर के संयुक्त प्रयास ले नई जिनगी मिलिस। इलाज अऊ देखभाल के कई दिन बाद जब उल्लू पूरी तरह स्वस्थ होगे, त ओकर ला फेर ओकर प्राकृतिक रहवास जंगल म सुरक्षित छोड़ देय गीस।
ए घटना सिरिफ एक पक्षी के बचाय के कहानी नइये, बल्कि वन्यजीव संरक्षण बर काम करत अधिकारी, कर्मचारी अऊ जागरूक नागरिक मन के संवेदनशीलता के सुंदर उदाहरण घलो आय।
रजगामार म घायल हालत म मिलिस उल्लू
कुछ दिन पहिली कोरबा जिला के रजगामार गांव म रहइया होमेश के घर लगे एक उल्लू घायल अवस्था म मिलिस। जानकारी के मुताबिक, कई कौवा मिलके उल्लू ऊपर हमला कर दीस, जेन ले वो गंभीर रूप ले जख्मी होगे अऊ उड़ पाय के हालत म नई रहिस।
गांव के लोगन मन जब ए स्थिति देखिन, त ओमन अपन जिम्मेदारी निभावत तुरंत वन विभाग ला सूचना दिन। समय रहते जानकारी मिलना ए बचाव अभियान बर सबसे महत्वपूर्ण साबित होइस।
वन विभाग अऊ नोवा नेचर के टीम तुरते पहुंचिस
सूचना मिलत ही वन विभाग के रेस्क्यू टीम अऊ नोवा नेचर के वन्यजीव विशेषज्ञ जितेंद्र सारथी तत्काल घटना स्थल पहुंचिन। टीम सावधानीपूर्वक घायल उल्लू ला रेस्क्यू करके सुरक्षित इलाज केंद्र लानिस।
ए पूरा अभियान प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (छत्तीसगढ़) अरुण पांडे के वन्यजीव संरक्षण संबंधी दिशा-निर्देश, मुख्य वन संरक्षक बिलासपुर मनोज पांडेय, कोरबा वनमंडलाधिकारी श्रीमती प्रेमलता यादव के मार्गदर्शन अऊ उप वनमंडलाधिकारी (दक्षिण) सूर्यकांत सोनी, उप वनमंडलाधिकारी (उत्तर) श्रीराम सिंह राठिया के निगरानी म संचालित होइस। पूरा रेस्क्यू अभियान के नेतृत्व वन परिक्षेत्र अधिकारी मृत्युंजय शर्मा करिन।
डॉक्टर के इलाज ले धीरे-धीरे स्वस्थ होइस उल्लू
रेस्क्यू के बाद घायल उल्लू के इलाज वेटरनरी चिकित्सक डॉ. अनिकेत के देखरेख म शुरू होइस। ओकर शरीर म बने घाव मन के रोजाना सफाई करे गीस, नियमित ड्रेसिंग कराय गीस अऊ ताकत वापस लाय बर प्रतिदिन मांस के टुकड़ा खिलाय गीस।
लगातार कई दिन तक देखभाल करे के बाद उल्लू धीरे-धीरे पूरी तरह स्वस्थ होगे। जब डॉक्टर मन संतुष्ट होगिन कि अब वो अपन दम म उड़ सकथे, त ओकर ला फेर प्रकृति म छोड़ई के फैसला लेय गीस।
जंगल म फेर मिलिस आजादी
इलाज पूरा होए के बाद फॉरेस्ट बिट ऑफिसर कमलेश कुम्हार अऊ वन्यजीव विशेषज्ञ जितेंद्र सारथी के मौजूदगी म स्वस्थ उल्लू ला ओकर प्राकृतिक रहवास, घने जंगल म सुरक्षित छोड़ देय गीस।
जंगल म उड़त उल्लू ला देखके वन विभाग के टीम अऊ बचाव अभियान म जुड़े लोगन मन बर ए पल सबसे खुशी के रहिस। ए घटना साबित करथे कि समय रहते बचाव अऊ सही इलाज मिलय, त घायल वन्यजीव मन के जान बचाय जा सकथे।
का होथे मॉटल्ड वुड आउल?
मॉटल्ड वुड आउल (Strix ocellata) भारत के प्रमुख रात्रिचर शिकारी पक्षी मन म ले एक आय। दिनभर ए बड़े-बड़े पुराना पेड़ के घना डार म आराम करथे अऊ रात होवत ही भोजन के खोज म निकलथे।
ए पक्षी के सबसे बड़ी खासियत ओकर बेहद तेज नजर, तीव्र सुनई क्षमता अऊ लगभग बिना आवाज के उड़ान आय। ए गुण मन ओकर ला प्रकृति के सबसे कुशल शिकारी पक्षी मन म शामिल करथें।
किसान मन बर प्राकृतिक साथी
वन्यजीव विशेषज्ञ मन के मुताबिक, मॉटल्ड वुड आउल पर्यावरण संतुलन बनाए रखे म महत्वपूर्ण भूमिका निभाथे। ए मुख्य रूप ले चूहा, छिपकली, मेंढक, छोटे पक्षी अऊ कई किसिम के छोटे जीव मन के शिकार करथे।
चूहा जइसने कृंतक फसल ला भारी नुकसान पहुंचाथें। उल्लू ए मन के संख्या नियंत्रित करके किसान मन के अप्रत्यक्ष रूप ले मदद करथे। ए कारण ले एकर ला किसान के प्राकृतिक मित्र घलो कहे जाथे।
कानूनी संरक्षण मिलिस हे
हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर म मॉटल्ड वुड आउल के स्थिति “लीस्ट कंसर्न (Least Concern)” श्रेणी म रखे गे हे, फेर भारत म ए पक्षी ला वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अनुसूची-1 (Schedule-I) के तहत सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त हे।
एखर मतलब ए आय कि ए पक्षी के शिकार करना, पकड़ना, नुकसान पहुंचाना या व्यापार करना कानूनन गंभीर अपराध आय, जेन ऊपर कड़ी कार्रवाई के प्रावधान हे।
अभी घलो बनेच चुनौती सामने हे
विशेषज्ञ मन बताथें कि जंगल के लगातार कटाई, बड़े पुराना पेड़ के कमी, प्राकृतिक आवास के नष्ट होना, अंधविश्वास के कारण अवैध शिकार अऊ खेती म अत्यधिक कीटनाशक के उपयोग ए दुर्लभ पक्षी बर बड़ा खतरा बनत जावत हे।
अगर जंगल अऊ प्राकृतिक आवास सुरक्षित राखे जाही अऊ आम नागरिक मन म वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ही, त ए महत्वपूर्ण पक्षी के भविष्य घलो सुरक्षित रहिही।
प्रकृति संरक्षण बर प्रेरणा देथे ए घटना
कोरबा म घायल उल्लू के सफल रेस्क्यू सिरिफ एक वन्यजीव बचाव अभियान नइये, बल्कि ए संदेश घलो देथे कि जब प्रशासन, सामाजिक संस्था अऊ आम नागरिक एकजुट होके काम करथें, त प्रकृति के अमूल्य धरोहर ला बचाय जा सकथे।
वन विभाग अऊ नोवा नेचर के ए पहल दूसर लोगन बर घलो प्रेरणा आय कि अगर कहीं घायल वन्यजीव दिखे, त ओकर मदद खुद करे के बजाय तुरंत वन विभाग ला सूचना देवय। समय पर मिले मदद कई बखत एक जीव के नई जिनगी दे सकथे।
