प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया के बीच लगभग 20 करोड़ डॉलर की ब्रह्मोस मिसाइल डील पर सहमति बनी। जानिए इस समझौते का भारत, इंडोनेशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा।
नई दिल्ली (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। भारत की रक्षा तकनीक को एक और बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता मिली है। दक्षिण-पूर्व एशिया के महत्वपूर्ण देश इंडोनेशिया ने भारत से अत्याधुनिक ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम खरीदने पर सहमति जताई है। करीब 20 करोड़ अमेरिकी डॉलर (लगभग 1,700 करोड़ रुपये) की इस रक्षा डील के तहत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की दो बैटरियां उपलब्ध कराई जाएंगी। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान जकार्ता में हुई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता के प्रमुख परिणामों में से एक माना जा रहा है।
यह सौदा केवल रक्षा उपकरणों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग, रक्षा साझेदारी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन को भी नई मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है।
भारत के रक्षा निर्यात को मिली नई उड़ान
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा उपकरणों के निर्माण और निर्यात को लगातार बढ़ावा दिया गया है।
इंडोनेशिया के साथ हुई यह ब्रह्मोस डील इस बात का संकेत है कि अब भारत केवल रक्षा उपकरणों का आयातक नहीं, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में एक मजबूत निर्यातक के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। इससे भारतीय रक्षा उद्योग को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई विश्वसनीयता मिलेगी।
क्या है ब्रह्मोस मिसाइल की खासियत?
ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज़ ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है। इसका विकास भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया के संयुक्त सहयोग से किया गया है।
यह मिसाइल अपनी गति, सटीक निशाने और आधुनिक तकनीक के कारण विश्व की सबसे प्रभावी मिसाइल प्रणालियों में शामिल मानी जाती है।
इसकी प्रमुख विशेषताएं—
- ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना अधिक रफ्तार।
- ‘फायर एंड फॉरगेट’ तकनीक से लैस।
- समुद्र, जमीन और हवा—तीनों प्लेटफॉर्म से दागी जा सकती है।
- समुद्री जहाजों और जमीनी ठिकानों पर बेहद सटीक हमला करने में सक्षम।
- निर्यात संस्करण की मारक क्षमता लगभग 290 किलोमीटर तक सीमित रखी गई है, जबकि भारतीय सेना के लिए विकसित संस्करण इससे अधिक दूरी तक मार करने में सक्षम हैं।
इंडोनेशिया की तटीय सुरक्षा होगी और मजबूत
समझौते के तहत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की दो बैटरियां दी जाएंगी। एक मानक ब्रह्मोस बैटरी में मोबाइल लॉन्चर, कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम, तैयार मिसाइलें, सपोर्ट वाहन और अन्य तकनीकी उपकरण शामिल होते हैं।
इंडोनेशिया एक विशाल समुद्री राष्ट्र है, जिसके हजारों द्वीप हैं। ऐसे में उसकी समुद्री सीमाओं और तटीय सुरक्षा को मजबूत बनाने में यह मिसाइल प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रह्मोस की तैनाती से इंडोनेशिया की समुद्री सुरक्षा क्षमता पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत होगी।
इंडोनेशिया बना तीसरा विदेशी ग्राहक
ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला इंडोनेशिया तीसरा विदेशी देश बन गया है।
इससे पहले भारत ने फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की आपूर्ति का समझौता किया था। वहीं वियतनाम के साथ भी रक्षा सहयोग के तहत इस मिसाइल प्रणाली को लेकर महत्वपूर्ण समझौते किए जा चुके हैं।
दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में ब्रह्मोस की बढ़ती मौजूदगी भारत की रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करती है तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को नई दिशा देती है।
रक्षा सहयोग के कई और समझौते भी हुए
ब्रह्मोस डील के अलावा भारत और इंडोनेशिया ने रक्षा क्षेत्र में कई अन्य महत्वपूर्ण समझौतों पर भी सहमति जताई है।
इनमें—
- हवा से हवा में मार करने वाली अस्त्र मिसाइल प्रणाली पर सहयोग।
- रक्षा तकनीक का आदान-प्रदान।
- समुद्री सुरक्षा सहयोग।
- रक्षा उद्योगों के बीच साझेदारी।
- संयुक्त अनुसंधान और उत्पादन की संभावनाएं।
इन समझौतों से दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और तकनीकी साझेदारी आने वाले वर्षों में और मजबूत होने की उम्मीद है।
‘एक्ट ईस्ट नीति’ को मिलेगा नया बल
विशेषज्ञों के अनुसार यह रक्षा समझौता भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ को और मजबूती देगा।
भारत लंबे समय से दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ आर्थिक, सामरिक और रक्षा संबंधों को मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रहा है। इंडोनेशिया जैसे महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार के साथ यह समझौता हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका को और प्रभावशाली बनाएगा।
भारत की बढ़ती वैश्विक साख का संकेत
ब्रह्मोस मिसाइल सौदा इस बात का प्रमाण है कि भारतीय रक्षा तकनीक पर अब दुनिया का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। आधुनिक तकनीक, विश्वसनीय प्रदर्शन और प्रतिस्पर्धी लागत के कारण भारत अब वैश्विक रक्षा बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कई अन्य मित्र देश भी भारतीय रक्षा प्रणालियों में रुचि दिखा सकते हैं। इससे न केवल भारत का रक्षा निर्यात बढ़ेगा, बल्कि रणनीतिक साझेदारियों को भी नई मजबूती मिलेगी।
इंडोनेशिया के साथ हुई ब्रह्मोस मिसाइल डील भारत के रक्षा इतिहास की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। यह समझौता केवल एक हथियार प्रणाली के निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की तकनीकी क्षमता, कूटनीतिक सफलता और वैश्विक रक्षा बाजार में बढ़ती विश्वसनीयता का भी प्रतीक है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान हुए इस समझौते से दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंध और मजबूत होंगे, वहीं हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
