छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर 27 अगस्त 2026 को रायपुर में राज्य स्तरीय परिचयात्मक बैठक आयोजित होगी। बैठक में 200 से अधिक विशेषज्ञ, जनप्रतिनिधि और प्रबुद्ध नागरिक शामिल होकर यूसीसी के सामाजिक, कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं पर सुझाव देंगे। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
छत्तीसगढ़(वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) को लेकर राज्य सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में 27 अगस्त 2026 को राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस स्थित कन्वेंशन हॉल में राज्य स्तरीय परिचयात्मक बैठक आयोजित की जाएगी। यह बैठक राज्य में यूसीसी को लेकर व्यापक संवाद और सुझाव प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
सरकार का उद्देश्य किसी भी निर्णय से पहले समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों की राय जानना है ताकि भविष्य में तैयार होने वाला प्रारूप संतुलित, व्यावहारिक और सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखने वाला हो।
करीब 200 प्रबुद्ध नागरिक और विशेषज्ञ होंगे शामिल
जानकारी के अनुसार इस बैठक में लगभग 200 प्रबुद्ध नागरिक, विधि विशेषज्ञ, शिक्षाविद, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि तथा विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञ भाग लेंगे।
बैठक के दौरान समान नागरिक संहिता के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इसमें यह समझने का प्रयास होगा कि यदि राज्य में यूसीसी लागू किया जाता है तो उसका सामाजिक, प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
बैठक केवल औपचारिक चर्चा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें उपस्थित सभी प्रतिभागियों से लिखित और मौखिक सुझाव भी लिए जाएंगे, ताकि नीति निर्माण की प्रक्रिया अधिक सहभागी और पारदर्शी बन सके।
क्या है समान नागरिक संहिता (UCC)?
समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code) ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने, संपत्ति के बंटवारे और पारिवारिक मामलों से जुड़े नागरिक कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होते हैं, चाहे उनका धर्म या समुदाय कोई भी हो।
वर्तमान में देश में इन विषयों पर अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। यूसीसी का उद्देश्य इन मामलों में एक समान नागरिक कानून लागू करने की अवधारणा है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों के अंतर्गत समान नागरिक संहिता लागू करने का उल्लेख किया गया है। हालांकि यह बाध्यकारी प्रावधान नहीं है, बल्कि सरकारों के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत माना जाता है।
सामाजिक और व्यावहारिक पहलुओं पर होगा विस्तृत मंथन
राज्य स्तरीय बैठक में केवल कानूनी पक्ष ही नहीं, बल्कि यूसीसी के सामाजिक और व्यावहारिक प्रभावों पर भी विशेष चर्चा होने की संभावना है।
विशेषज्ञ इस बात पर विचार रखेंगे कि यदि समान नागरिक संहिता लागू होती है तो उसका महिलाओं के अधिकारों, पारिवारिक कानूनों, सामाजिक संरचना, प्रशासनिक व्यवस्था तथा न्यायिक प्रक्रिया पर क्या असर पड़ सकता है।
इसके अलावा विभिन्न समुदायों की भावनाओं, परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखते हुए संतुलित सुझाव तैयार करने पर भी जोर रहेगा।
सरकार क्यों ले रही है सुझाव?
राज्य सरकार का मानना है कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर निर्णय लेने से पहले समाज के हर वर्ग की भागीदारी आवश्यक है।
इसी कारण परिचयात्मक बैठक के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोगों के विचार लिए जाएंगे। प्राप्त सुझावों का अध्ययन करने के बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।
सरकार का प्रयास है कि यदि भविष्य में कोई प्रारूप तैयार किया जाए तो उसमें समाज के सभी वर्गों के हितों, संवैधानिक मूल्यों और प्रशासनिक व्यवहारिकता के बीच संतुलन बनाया जा सके।
देशभर में बढ़ी है यूसीसी पर चर्चा
पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न राज्यों में समान नागरिक संहिता को लेकर चर्चा तेज हुई है। कुछ राज्यों ने इस दिशा में पहल भी की है, जबकि कई राज्यों में अध्ययन और विचार-विमर्श की प्रक्रिया जारी है।
ऐसे समय में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आयोजित यह राज्य स्तरीय बैठक भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे राज्य में इस विषय पर व्यापक जनसंवाद की शुरुआत होगी।
सुझावों के आधार पर आगे बनेगी रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े कानूनी बदलाव से पहले व्यापक चर्चा और जनभागीदारी आवश्यक होती है। ऐसे में 27 अगस्त को होने वाली यह बैठक भविष्य की नीति निर्माण प्रक्रिया का आधार बन सकती है।
बैठक में प्राप्त सुझावों का संकलन कर उनका अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद आवश्यकतानुसार आगे की कार्यवाही और संभावित प्रारूप पर विचार किया जा सकता है।
जनभागीदारी पर रहेगा विशेष जोर
सरकार की यह पहल केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि संवाद आधारित नीति निर्माण का प्रयास भी मानी जा रही है। यदि विभिन्न वर्गों की राय को समुचित महत्व दिया जाता है तो इससे भविष्य में बनने वाली किसी भी नीति को अधिक स्वीकार्यता मिलने की संभावना रहती है।
यही कारण है कि इस बैठक में विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी लोगों को आमंत्रित किया गया है ताकि विविध दृष्टिकोण सामने आ सकें और किसी भी निर्णय से पहले सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जा सके।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता को लेकर 27 अगस्त को आयोजित होने वाली राज्य स्तरीय परिचयात्मक बैठक राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। करीब 200 विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों की मौजूदगी में होने वाला यह संवाद यूसीसी के कानूनी, सामाजिक और व्यावहारिक पहलुओं पर व्यापक चर्चा का मंच बनेगा। सरकार का उद्देश्य जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय सभी वर्गों की भागीदारी के साथ ऐसा संतुलित प्रारूप तैयार करना है, जो संविधान की भावना के अनुरूप होने के साथ-साथ समाज के व्यापक हितों का भी ध्यान रखे।
