रायपुर।(वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) छत्तीसगढ़ में वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और उनकी यात्रा को आसान बनाने की दिशा में एक ऐसी पहल सामने आई है, जिसने प्रदेश को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई है। राज्य में 80 वर्ष और उससे अधिक आयु के 1810 वरिष्ठ नागरिकों को देशभर में निःशुल्क यात्रा के लिए बस पास उपलब्ध कराने की पहल को Golden Book of World Records में दर्ज किया गया है। यह उपलब्धि केवल एक रिकॉर्ड के तौर पर नहीं, बल्कि बुजुर्गों को सम्मान, सुविधा और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने वाली पहल के रूप में देखी जा रही है।
यह पहल अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर रायपुर में आयोजित सियान सेवा महाकुंभ के दौरान सामने आई। कार्यक्रम का आयोजन सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत समाज कल्याण विभाग द्वारा किया गया था। इस दौरान 80 वर्ष से अधिक आयु के 1810 वरिष्ठ नागरिकों को देशभर में यात्रा के लिए निःशुल्क बस पास प्रदान किए गए। कार्यक्रम में 4 हजार से अधिक वरिष्ठजन विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं से लाभान्वित हुए।
बुजुर्गों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
उम्र बढ़ने के साथ यात्रा करना कई वरिष्ठ नागरिकों के लिए आसान नहीं रहता। स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें, अस्पताल जाना, परिवार के सदस्यों से मिलने के लिए दूसरे शहर की यात्रा, धार्मिक स्थल या अन्य जरूरी कामों के लिए आवागमन—इन सबके बीच सार्वजनिक परिवहन का खर्च भी कई परिवारों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
ऐसे में 80 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को निःशुल्क बस यात्रा की सुविधा देना उनके रोजमर्रा के जीवन में सीधा लाभ पहुंचाने वाला कदम है। खास बात यह है कि यह सुविधा केवल किसी एक स्थानीय क्षेत्र तक सीमित नहीं बताई गई, बल्कि संपूर्ण भारत में यात्रा के लिए बस पास दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इसमें वरिष्ठ नागरिकों को केवल सरकारी सहायता पाने वाले हितग्राही के रूप में नहीं देखा गया, बल्कि उनके जीवन अनुभव और समाज में योगदान को सम्मान देने की भावना भी जुड़ी हुई है।
गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुई पहल
1810 वरिष्ठ नागरिकों को निःशुल्क बस पास देने की पहल को Golden Book of World Records में दर्ज किया गया है। परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि को प्रदेश के वरिष्ठ नागरिकों को समर्पित बताया है। उनके अनुसार, 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों ने अपने अनुभव और परिश्रम से समाज तथा प्रदेश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में उनके लिए यात्रा को आसान बनाना सम्मान और सेवा दोनों से जुड़ा विषय है।
विश्व रिकॉर्ड की यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी सरकारी या सामाजिक पहल की सफलता का मूल्यांकन केवल उसके आंकड़ों से नहीं होता। जब किसी योजना का सीधा असर लोगों के जीवन पर पड़ता है और उसे व्यापक स्तर पर पहचान मिलती है, तो वह पहल दूसरे क्षेत्रों के लिए भी उदाहरण बन सकती है।
सियान सेवा महाकुंभ में वरिष्ठजनों को मिली कई सुविधाएं
रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम, बूढ़ापारा में आयोजित सियान सेवा महाकुंभ में वरिष्ठ नागरिकों को केवल बस पास ही नहीं दिए गए। कार्यक्रम के दौरान जरूरत के अनुसार 2 हजार छड़ियां, 1 हजार श्रवण यंत्र और 20 ट्राइसाइकिल भी वितरित की गईं। इसका उद्देश्य बुजुर्गों की रोजमर्रा की जरूरतों को आसान बनाना और उन्हें अधिक आत्मनिर्भर बनाने में मदद करना था।
कार्यक्रम में समाज कल्याण तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने वरिष्ठजनों से संवाद भी किया। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों को समाज की सांस्कृतिक विरासत और जीवन अनुभव का महत्वपूर्ण वाहक बताते हुए उनके सम्मान और सहभागिता पर जोर दिया।
सरकार का फोकस सिर्फ पेंशन तक सीमित नहीं
वरिष्ठ नागरिकों के लिए शुरू की गई इन पहलों से यह संकेत मिलता है कि वृद्धजन कल्याण को केवल पेंशन तक सीमित रखने के बजाय स्वास्थ्य, आवागमन, देखभाल, सामाजिक सहभागिता और गरिमापूर्ण जीवन जैसे विषयों से भी जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम में दी गई जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के लिए 400 करोड़ रुपये और मुख्यमंत्री पेंशन योजना के लिए 450 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। विभाग के अनुसार उसकी विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से प्रदेश में करीब 15.90 लाख वरिष्ठजन लाभान्वित हो रहे हैं।
इसके अलावा मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से भी अब तक बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिकों को धार्मिक और आध्यात्मिक यात्रा का अवसर मिलने की जानकारी दी गई है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए सियान हेल्पलाइन 155326 सहित अन्य व्यवस्थाओं का भी उल्लेख किया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़ाई जा रही बस कनेक्टिविटी
वरिष्ठ नागरिकों के लिए मुफ्त बस पास की पहल को राज्य में सार्वजनिक परिवहन के विस्तार से अलग करके नहीं देखा जा सकता। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में नियमित बस सेवा पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत भी काम किया जा रहा है।
परिवहन विभाग से संबंधित रिपोर्टों के अनुसार, योजना के तहत 69 चयनित मार्गों पर बस संचालन शुरू किया गया है और इससे 450 गांव पहली बार नियमित यात्री बस सेवा से जुड़े हैं। इसके अलावा वर्ष 2026-27 में 200 नई बसें चलाने की कार्ययोजना भी बताई गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बस सेवा का विस्तार बुजुर्गों के लिए भी विशेष महत्व रखता है। गांव में रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों को अस्पताल, बाजार, बैंक, सरकारी कार्यालय या रिश्तेदारों के घर जाने के लिए कई बार निजी वाहन या दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है। नियमित बस सेवा उपलब्ध होने से उनकी आवाजाही अपेक्षाकृत आसान हो सकती है।
परिवहन को सुविधा के साथ संवेदनशील बनाने पर जोर
परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने इस विश्व रिकॉर्ड को वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान से जोड़ते हुए कहा है कि परिवहन व्यवस्था को केवल आधुनिक और सुविधाजनक बनाने के साथ-साथ संवेदनशील बनाना भी जरूरी है। वरिष्ठ नागरिकों के अलावा महिलाओं, दिव्यांगजनों और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले यात्रियों के लिए बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
दरअसल, सार्वजनिक परिवहन किसी भी राज्य के सामाजिक ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सड़क और बस सेवा सिर्फ लोगों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बाजार और प्रशासनिक सेवाओं से भी जोड़ती है। यही वजह है कि ग्रामीण बस सेवा और वरिष्ठ नागरिकों के लिए मुफ्त यात्रा जैसी पहलों का असर केवल परिवहन क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता।
रिकॉर्ड से आगे, सम्मान की पहल
1810 बुजुर्गों को मुफ्त बस पास मिलने और इस पहल के गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज होने की खबर निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। लेकिन इस पहल की असली अहमियत उस सुविधा में है, जो इससे वरिष्ठ नागरिकों के जीवन में जुड़ती है।
जिन बुजुर्गों ने दशकों तक अपने परिवार, समाज और प्रदेश के निर्माण में योगदान दिया, उनके लिए उम्र के इस पड़ाव पर यात्रा को आसान और सम्मानजनक बनाना सामाजिक जिम्मेदारी का भी हिस्सा है। अगर ऐसी सुविधाएं जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों तक समय पर और पारदर्शी तरीके से पहुंचती हैं, तो इसका लाभ आंकड़ों से कहीं अधिक व्यापक होगा।
छत्तीसगढ़ में 1810 वरिष्ठ नागरिकों को निःशुल्क बस पास देने की यह पहल इसी सोच को सामने रखती है—वरिष्ठ नागरिकों की सुविधा केवल कल्याण योजना का विषय नहीं, बल्कि सम्मान और गरिमा से जुड़ा विषय भी है। विश्व रिकॉर्ड में दर्ज हुई यह पहल आने वाले समय में प्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के लिए सार्वजनिक परिवहन को और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकती है।
