बिलासपुर। (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। जिला शिक्षा विभाग की डिजिटल निगरानी में जिले के चार विकासखंडों में 1,618 शिक्षक बिना पूर्व सूचना के स्कूलों से अनुपस्थित पाए गए हैं। यह आंकड़ा सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने अनुपस्थित शिक्षकों की उपस्थिति की जांच और नियमानुसार वेतन संबंधी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
इस पूरे मामले में विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) ऐप की भूमिका अहम रही। डिजिटल माध्यम से स्कूलों की निगरानी और शिक्षकों की उपस्थिति की जानकारी जुटाई गई, जिसके बाद बड़ी संख्या में शिक्षकों के ड्यूटी से अनुपस्थित रहने की स्थिति सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक, बिल्हा विकासखंड में सबसे ज्यादा 659 शिक्षक अनुपस्थित मिले, जबकि मस्तूरी में 384, तखतपुर में 323 और कोटा में 252 शिक्षकों की गैरहाजिरी दर्ज की गई।
चार विकासखंडों में सामने आई बड़ी संख्या
VSK ऐप के जरिए सामने आए आंकड़ों ने जिले के अलग-अलग हिस्सों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चार विकासखंडों को मिलाकर अनुपस्थित मिले शिक्षकों की संख्या 1,618 है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो बिल्हा में 659 शिक्षक बिना सूचना अनुपस्थित पाए गए। यह चारों विकासखंडों में सबसे अधिक संख्या है। इसके बाद मस्तूरी में 384, तखतपुर में 323 और कोटा में 252 शिक्षक गैरहाजिर मिले।
इन आंकड़ों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि शिक्षक की स्कूल में मौजूदगी सीधे तौर पर विद्यार्थियों की पढ़ाई से जुड़ी होती है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों पर बड़ी संख्या में परिवार अपने बच्चों की शिक्षा के लिए निर्भर हैं। ऐसे में यदि निर्धारित समय पर शिक्षक स्कूल में मौजूद नहीं रहते, तो इसका असर केवल उपस्थिति रजिस्टर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बच्चों की नियमित पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
ग्रामीण स्कूलों पर सबसे ज्यादा असर की चिंता
डिजिटल निगरानी के दौरान सामने आए विवरण में ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में भी शिक्षकों की अनुपस्थिति का मुद्दा सामने आया है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाते हैं। इन स्कूलों में शिक्षक ही बच्चों की पढ़ाई, पाठ्यक्रम पूरा कराने, मूल्यांकन और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों की मुख्य कड़ी होते हैं।
ऐसे में बड़ी संख्या में शिक्षकों का बिना सूचना अनुपस्थित मिलना विभाग के लिए गंभीर प्रशासनिक विषय माना जा रहा है। रिपोर्टों में कुछ स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में भी शिक्षकों के अनुपस्थित पाए जाने का उल्लेख है।
स्वामी आत्मानंद स्कूलों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इसलिए इन स्कूलों में भी यदि शिक्षक नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहते हैं, तो विभाग की निगरानी व्यवस्था और स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
VSK App बना निगरानी का अहम माध्यम
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू डिजिटल निगरानी व्यवस्था है। बिलासपुर जिला प्रशासन पहले से ही स्कूलों की निगरानी के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करता रहा है। जिला प्रशासन की वेबसाइट पर भी स्कूलों की निगरानी के लिए शिक्षक-सहायता प्रणाली का उल्लेख है, जिसमें प्रतिदिन उपस्थित शिक्षकों, अवकाश पर रहने वाले शिक्षकों, आधिकारिक कार्य से बाहर गए शिक्षकों और बिना सूचना अनुपस्थित शिक्षकों की जानकारी दर्ज करने की व्यवस्था बताई गई है।
अब VSK यानी विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति को डिजिटल तरीके से मॉनिटर करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे विभाग के पास केवल कागजी उपस्थिति रजिस्टर पर निर्भर रहने के बजाय वास्तविक समय के डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर निगरानी करने का विकल्प उपलब्ध होता है।
रिपोर्टों के अनुसार, आगे शिक्षकों की डिजिटल उपस्थिति को और सख्ती से लागू किया जाएगा। VSK ऐप के माध्यम से हाजिरी दर्ज करने के लिए शिक्षक का संबंधित स्कूल के 100 मीटर के दायरे में मौजूद होना जरूरी बताया गया है। डिजिटल उपस्थिति के आधार पर ही वेतन प्रक्रिया को जोड़ने की बात भी सामने आई है।
अनुपस्थिति पर वेतन संबंधी कार्रवाई
1,618 शिक्षकों के गैरहाजिर मिलने के बाद विभाग ने मामले को हल्के में नहीं लिया है। जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से अनुपस्थित शिक्षकों के संबंध में वेतन रोकने की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य केवल अनुपस्थित कर्मचारियों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि स्कूलों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना भी है।
विभाग की यह कार्रवाई शिक्षकों के लिए एक स्पष्ट संदेश के तौर पर देखी जा रही है कि बिना सूचना ड्यूटी से अनुपस्थित रहने को अब केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखा जाएगा। डिजिटल निगरानी के जरिए उपस्थिति की जांच होने से स्कूल स्तर पर जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।
हालांकि, किसी भी शिक्षक की अनुपस्थिति के मामले में वास्तविक स्थिति जानना भी जरूरी होगा। अवकाश, विभागीय कार्य, प्रशिक्षण, आकस्मिक परिस्थितियों या अन्य स्वीकृत कारणों से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों और बिना सूचना अनुपस्थित रहने वालों के मामलों में विभागीय नियमों के अनुसार अंतर किया जाना चाहिए। इसलिए अंतिम कार्रवाई संबंधित रिकॉर्ड और स्पष्टीकरण की जांच के बाद ही तय होना महत्वपूर्ण है।
क्या बदलेगा स्कूलों में?
इस मामले का सबसे बड़ा असर स्कूलों की दैनिक कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है। यदि डिजिटल हाजिरी नियमित और पारदर्शी तरीके से लागू होती है, तो स्कूल प्रबंधन को हर दिन शिक्षकों की उपस्थिति पर नजर रखनी होगी। वहीं शिक्षकों के लिए भी समय पर स्कूल पहुंचना और निर्धारित अवधि तक विद्यालय में उपलब्ध रहना ज्यादा जरूरी हो जाएगा।
इससे अभिभावकों को भी उम्मीद है कि बच्चों की पढ़ाई नियमित होगी। खासकर उन ग्रामीण परिवारों के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण हो सकती है, जिनके पास निजी स्कूलों का विकल्प सीमित है और वे सरकारी स्कूलों पर निर्भर हैं।
डिजिटल निगरानी से बढ़ेगी जवाबदेही, लेकिन व्यवस्था की विश्वसनीयता भी जरूरी
VSK ऐप से सामने आया यह मामला यह बताता है कि डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल केवल आंकड़े जुटाने के लिए नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के लिए भी किया जा सकता है। हालांकि किसी भी डिजिटल व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि उसका इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से हो और तकनीकी समस्याओं का समाधान समय पर किया जाए।
इससे पहले भी छत्तीसगढ़ में VSK ऐप से जुड़ी उपस्थिति व्यवस्था को लेकर शिक्षकों की ओर से तकनीकी दिक्कतों की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इसलिए विभाग के सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर बिना सूचना अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई करना और दूसरी ओर वास्तविक तकनीकी या प्रशासनिक समस्या के कारण उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाने वाले मामलों को निष्पक्ष तरीके से देखना।
बच्चों की पढ़ाई सबसे बड़ा मुद्दा
आखिरकार इस पूरे मामले का केंद्र शिक्षक नहीं, बल्कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे हैं। शिक्षक की नियमित उपस्थिति का सीधा संबंध कक्षा संचालन और विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया से है। अगर किसी स्कूल में शिक्षक समय पर नहीं पहुंचता या लगातार अनुपस्थित रहता है, तो इसका असर पाठ्यक्रम, बच्चों की समझ और परीक्षा परिणाम तक दिखाई दे सकता है।
बिलासपुर में 1,618 शिक्षकों के बिना सूचना अनुपस्थित पाए जाने का आंकड़ा इसलिए बड़ा है क्योंकि यह शिक्षा विभाग के लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई का विषय नहीं है। यह स्कूलों में निगरानी, जवाबदेही और शिक्षा की गुणवत्ता—तीनों को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत है।
अब देखने वाली बात होगी कि विभाग आगे इस मामले में कितनी प्रभावी कार्रवाई करता है और डिजिटल उपस्थिति व्यवस्था को किस तरह लागू किया जाता है। यदि VSK की निगरानी व्यवस्था नियमित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से विश्वसनीय तरीके से चलती है, तो इससे स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति सुधारने और बच्चों को नियमित कक्षाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
