रायपुर।(वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)
नशे के खिलाफ जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से राजधानी रायपुर में आयोजित नशामुक्ति पदयात्रा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी शामिल हुए। देवेंद्र नगर चौक से लाल चौक तक निकाली गई इस पदयात्रा में बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं, युवा, महिलाएं, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक शामिल हुए। पदयात्रा के दौरान लोगों को नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया।
पदयात्रा के समापन पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने लाल चौक स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने नशामुक्त समाज के निर्माण को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि नशे का असर केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका प्रभाव परिवार और पूरे समाज पर पड़ता है। खासतौर पर युवाओं को नशे से बचाना जरूरी है, क्योंकि युवा किसी भी प्रदेश की महत्वपूर्ण शक्ति होते हैं।
देवेंद्र नगर से लाल चौक तक निकली पदयात्रा
रायपुर में आयोजित यह पदयात्रा नशामुक्ति को लेकर चलाए जा रहे जनजागरूकता अभियान का हिस्सा रही। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अभियान के तहत 30 सितंबर को पदयात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री साय देवेंद्र नगर चौक से आगे यात्रा में शामिल हुए और प्रतिभागियों के साथ लाल चौक तक पहुंचे। इस दौरान अलग-अलग वर्गों के लोगों ने नशे के खिलाफ जागरूकता का संदेश दिया।
इस कार्यक्रम की खास बात युवाओं और विद्यार्थियों की भागीदारी रही। स्कूल-कॉलेज से जुड़े विद्यार्थियों के साथ महिलाएं और आम नागरिक भी पदयात्रा में नजर आए। आयोजकों का उद्देश्य नशामुक्ति के संदेश को केवल एक कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय परिवार और समाज के स्तर तक पहुंचाना रहा।
मुख्यमंत्री साय ने नशामुक्त समाज को बताया सामूहिक जिम्मेदारी
पदयात्रा के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नशामुक्त और स्वस्थ छत्तीसगढ़ ही विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव बन सकता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से स्वयं नशे से दूर रहने के साथ-साथ अपने आसपास के लोगों को भी नशामुक्त जीवन के लिए प्रेरित करने की अपील की।
मुख्यमंत्री के अनुसार युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में ले जाना जरूरी है। उनका कहना था कि युवा यदि स्वस्थ, शिक्षित और कुशल होंगे तथा अपनी क्षमता को शिक्षा, रोजगार, खेल, कौशल और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में लगाएंगे तो प्रदेश के विकास में उनकी भूमिका और बढ़ेगी।
यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब नशामुक्ति को लेकर विभिन्न स्तरों पर जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। पदयात्रा जैसे कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों के बीच सीधे संवाद और सार्वजनिक भागीदारी के माध्यम से नशे के दुष्प्रभावों को लेकर जागरूकता बढ़ाना है।
25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक नशामुक्ति पदयात्रा सप्ताह
रिपोर्टों के अनुसार नशामुक्ति पदयात्रा सप्ताह का आयोजन 25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक किया जा रहा है। इसे सेवा संकल्प अभियान से जोड़ा गया है। अभियान के दौरान नशामुक्ति के अलावा सामाजिक जागरूकता, स्वच्छता, स्वास्थ्य और जनसेवा से संबंधित गतिविधियों पर भी जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने इस पहल को महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर से भी जोड़ा। उनके अनुसार गांधीजी ने संयम, स्वच्छता और स्वस्थ जीवन का संदेश दिया था। ऐसे में नशामुक्ति को लेकर जनजागरूकता अभियान उनके विचारों से जुड़े सामाजिक संदेश को आगे बढ़ाने का माध्यम बन सकता है।
27 वर्षों से नशामुक्ति और सामाजिक जागरूकता की पदयात्रा
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने रायपुर उत्तर के विधायक पुरंदर मिश्रा द्वारा लंबे समय से नशामुक्ति, स्वच्छता और वृक्षारोपण जैसे विषयों को लेकर पदयात्रा आयोजित किए जाने का उल्लेख किया और इसकी सराहना की। सरकारी और मीडिया रिपोर्टों में इस अभियान की अवधि को लेकर अलग-अलग विवरण सामने आए हैं—कुछ स्रोत इसे 27 वर्षों से जारी बताते हैं, जबकि एक हालिया रिपोर्ट में अभियान का 28वां वर्ष बताया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक बदलाव केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। जब किसी सामाजिक मुद्दे पर आम लोग स्वयं आगे आते हैं तो जागरूकता का प्रभाव व्यापक हो सकता है।
युवाओं को नशे से दूर रखने पर जोर
नशामुक्ति अभियान का एक प्रमुख केंद्र युवाओं को बनाया गया है। पदयात्रा में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और युवाओं की मौजूदगी ने भी इसी संदेश को सामने रखा। मुख्यमंत्री ने युवाओं से नशे से दूर रहने और अपने परिवार तथा मित्रों के बीच भी इसके खिलाफ जागरूकता फैलाने की अपील की।
युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार, खेल और उद्यमिता से जोड़ने को लेकर भी मुख्यमंत्री ने सरकार की प्राथमिकताओं का उल्लेख किया। उनका कहना है कि युवा अपनी ऊर्जा सकारात्मक गतिविधियों में लगाएं तो व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक विकास में भी योगदान दे सकते हैं।
सामाजिक अभियान में जनभागीदारी पर फोकस
पदयात्रा में स्कूली विद्यार्थियों के अलावा महिलाओं, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की भागीदारी रही। रिपोर्टों के मुताबिक शहीद स्मारक स्कूल फाफाडीह सहित अन्य शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
इस तरह की पदयात्राओं का महत्व इसलिए भी है क्योंकि नशामुक्ति का मुद्दा केवल कानून-व्यवस्था या स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। इसके सामाजिक प्रभाव परिवार, शिक्षा, रोजगार और युवा पीढ़ी के भविष्य से भी जुड़े होते हैं। इसलिए जागरूकता कार्यक्रमों में परिवारों और समुदाय की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जाता है।
कई जनप्रतिनिधि और नागरिक रहे मौजूद
नशामुक्ति पदयात्रा में राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक पुरंदर मिश्रा, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, राज्य केश शिल्पी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष गौरीशंकर श्रीवास, फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन, राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा और राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ममता साहू सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि और नागरिक मौजूद रहे।
कार्यक्रम के जरिए आयोजकों ने नशे के खिलाफ जागरूकता को घर-घर तक पहुंचाने और विशेष रूप से युवाओं को इससे दूर रखने का संदेश दिया। 2 अक्टूबर तक चलने वाले नशामुक्ति पदयात्रा सप्ताह के दौरान इस तरह की गतिविधियों के माध्यम से लोगों को अभियान से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
रायपुर में देवेंद्र नगर चौक से लाल चौक तक निकली नशामुक्ति पदयात्रा ने राजधानी में नशे के खिलाफ जनजागरूकता का संदेश सामने रखा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम में युवाओं और विद्यार्थियों की भागीदारी खास रही। अभियान का मूल संदेश यही रहा कि नशामुक्ति केवल किसी एक संस्था या सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार, समाज और नागरिकों की साझा जिम्मेदारी है।
नशे से दूर रहने, युवाओं को सकारात्मक अवसरों से जोड़ने और समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए ऐसे अभियानों की निरंतरता महत्वपूर्ण होगी। पदयात्रा के जरिए दिया गया संदेश तभी व्यापक प्रभाव पैदा कर सकता है, जब इसे दैनिक जीवन में व्यवहारिक बदलाव और सामुदायिक भागीदारी से जोड़ा जाए।
