रायपुर।(वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) छत्तीसगढ़ में शहरी गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (PMAY-U) पुरस्कार-2026 समारोह में सम्मान ग्रहण करने के लिए छत्तीसगढ़ को आमंत्रित किया गया है। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित होने वाले इस राष्ट्रीय समारोह में प्रदेश की ओर से उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव, विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा तथा राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी-सह-राज्य मिशन संचालक सुमित अग्रवाल की सहभागिता रही।
यह उपलब्धि केवल एक सरकारी योजना के क्रियान्वयन का सम्मान नहीं है, बल्कि उन हजारों शहरी परिवारों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जिनके लिए पक्का मकान लंबे समय से एक जरूरत और सपना दोनों रहा है। सरकार का जोर आवास स्वीकृत करने के साथ-साथ निर्माण की गति, गुणवत्ता, समयबद्ध पूर्णता और पात्र हितग्राहियों तक वास्तविक लाभ पहुंचाने पर है।
शहरी गरीबों के पक्के घरों को राष्ट्रीय पहचान
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी का मूल उद्देश्य शहरों में रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित तथा सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है। छत्तीसगढ़ में इस दिशा में योजना को केवल मकान निर्माण तक सीमित रखने के बजाय जमीन की उपलब्धता, आवासीय परियोजनाओं और मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने की कोशिश की गई है।
राज्य सरकार के अनुसार, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शहरी गरीब परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने के प्रयासों को गति दी जा रही है। वहीं उप मुख्यमंत्री अरुण साव के मार्गदर्शन में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा सूडा द्वारा नगरीय निकायों के साथ समन्वय कर योजना के क्रियान्वयन की लगातार निगरानी की जा रही है।
आवास स्वीकृति से लेकर निर्माण की प्रगति और पूर्णता तक विभिन्न स्तरों पर निगरानी की व्यवस्था को इस पूरी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है।
निजी कॉलोनियों में EWS-LIG के लिए जमीन आरक्षण बना मॉडल
छत्तीसगढ़ को मिली राष्ट्रीय पहचान के पीछे सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के परिवारों के लिए भूमि आरक्षण की व्यवस्था है।
शहरी क्षेत्रों में गरीब परिवारों के लिए पक्का घर बनाने की सबसे बड़ी चुनौतियों में जमीन की उपलब्धता भी शामिल है। जमीन महंगी होने के कारण कई बार आवास योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाना कठिन हो जाता है। छत्तीसगढ़ ने इस चुनौती से निपटने के लिए निजी कॉलोनियों में EWS और LIG वर्ग के लिए भूमि आरक्षण के प्रावधान को प्रभावी ढंग से लागू किया है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस व्यवस्था से प्रदेश में 25,413 आवासों के निर्माण के लिए बिना सरकारी खर्च के भूमि उपलब्ध हुई है। इनमें प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 1.0 के तहत 17,790 और PMAY-U 2.0 के तहत 7,623 आवास शामिल बताए गए हैं।
यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे कमजोर आय वर्ग के परिवारों के लिए आवास केवल शहरों के बाहरी हिस्सों में बनाने के बजाय विकसित या नियोजित शहरी क्षेत्रों से जोड़ने की संभावना बढ़ती है।
AHP मॉडल से किफायती आवास की दिशा में प्रयास
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के तहत Affordable Housing in Partnership यानी AHP मॉडल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस व्यवस्था में सरकार और अन्य भागीदारों के सहयोग से पात्र परिवारों के लिए किफायती आवास तैयार किए जाते हैं।
छत्तीसगढ़ में AHP परियोजनाओं को गति देने के साथ पात्र हितग्राहियों की पहचान, सत्यापन और आवास आवंटन की प्रक्रिया पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे योजना का उद्देश्य सिर्फ भवन तैयार करने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सही परिवार तक सही समय पर आवास पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ता है।
राज्य में PMAY-U 1.0 के AHP घटक के अंतर्गत 36,969 आवास स्वीकृत होने और इनमें से 29,267 आवास पूर्ण होने की जानकारी भी सामने आई है।
इन आंकड़ों से यह समझ आता है कि शहरी आवास योजना में निर्माण के साथ-साथ पूर्णता और हितग्राहियों तक पहुंच को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पक्का मकान सिर्फ छत नहीं, परिवार की सुरक्षा भी
किसी गरीब परिवार के लिए पक्का घर केवल ईंट, सीमेंट और छत का ढांचा नहीं होता। यह बारिश, गर्मी और अन्य मौसम की परेशानियों से सुरक्षा के साथ-साथ परिवार के लिए स्थायित्व और सामाजिक सम्मान का आधार बनता है।
कच्चे या अस्थायी मकान में रहने वाले परिवारों के लिए हर बारिश चिंता लेकर आती है। घर की छत, दीवार और पानी भरने की समस्या के बीच बच्चों की पढ़ाई और परिवार की दिनचर्या भी प्रभावित होती है। पक्का आवास मिलने के बाद इन परेशानियों में कमी आने की संभावना रहती है।
यही वजह है कि प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी को केवल आवास निर्माण की सरकारी योजना के रूप में देखना इसके व्यापक प्रभाव को सीमित कर देता है। सुरक्षित आवास का सीधा संबंध स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवार की सुरक्षा और सामाजिक गरिमा से भी है।
महिलाओं के लिए भी बढ़ती है आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा
PMAY-U 2.0 के राष्ट्रीय स्तर के आंकड़े भी आवास योजना के सामाजिक प्रभाव को रेखांकित करते हैं। सितंबर 2026 तक PMAY-U 2.0 के तहत 18.77 लाख मकानों को मंजूरी दी जा चुकी थी। इनमें 92 प्रतिशत यानी 17.19 लाख मकान महिलाओं के नाम या संयुक्त स्वामित्व में आवंटित किए गए हैं। योजना के तहत वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी 1.80 लाख मकानों का आवंटन दर्ज किया गया है।
महिलाओं के नाम पर या संयुक्त स्वामित्व में घर होने से परिवार में उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति मजबूत होने की संभावना बढ़ती है। ऐसे में आवास योजना का प्रभाव केवल मकान उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार के भीतर संपत्ति और सुरक्षा से जुड़े अधिकारों पर भी पड़ता है।
PMAY-U 2.0 के तहत छत्तीसगढ़ को भी लगातार मंजूरी
छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत भी नए आवासों के लिए केंद्रीय सहायता जारी की जा रही है। भारत सरकार के PMAY-U पोर्टल पर जुलाई 2026 में छत्तीसगढ़ के लिए 11,477 आवासों से जुड़े 160 BLC प्रोजेक्ट्स के लिए पहली किस्त की केंद्रीय सहायता स्वीकृत होने का उल्लेख है। इसके अलावा 7,434 आवासों के लिए दूसरी किस्त की केंद्रीय सहायता भी दर्ज है।
इससे यह संकेत मिलता है कि राज्य में शहरी आवास की जरूरत को पूरा करने के लिए PMAY-U 2.0 के तहत भी काम आगे बढ़ रहा है।
नगरीय निकायों की भूमिका भी अहम
किसी भी आवास योजना की सफलता केवल राज्य स्तर पर बनाई गई नीति से तय नहीं होती। वास्तविक बदलाव जमीन पर तब दिखाई देता है, जब नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत स्तर पर पात्र हितग्राहियों की पहचान, दस्तावेजों का सत्यापन, निर्माण की निगरानी और आवास आवंटन जैसी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हों।
छत्तीसगढ़ में PMAY-U के क्रियान्वयन में नगरीय निकायों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, तकनीकी अमले और हितग्राहियों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया गया है। यही जमीनी समन्वय योजना को कागज से निकालकर वास्तविक आवास तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है।
राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ के लिए बड़ा अवसर
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी पुरस्कार-2026 के राष्ट्रीय समारोह में छत्तीसगढ़ की सहभागिता प्रदेश के शहरी आवास क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को देश के सामने रखने का अवसर भी है।
विशेष रूप से EWS और LIG परिवारों के लिए भूमि आरक्षण तथा AHP मॉडल के माध्यम से आवास उपलब्ध कराने की व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा मिलना इस दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है। हालिया जानकारी के अनुसार, इन प्रयासों के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी मिला है।
आगे की चुनौती क्या है?
राष्ट्रीय सम्मान निश्चित रूप से उपलब्धि है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि आने वाले समय में कितने पात्र परिवारों को वास्तव में पक्का और सुविधायुक्त घर मिलता है। निर्माणाधीन आवासों को समय पर पूरा करना, गुणवत्ता बनाए रखना, पात्रता प्रक्रिया को पारदर्शी रखना और आवासों को सड़क, पानी, बिजली तथा स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाओं से जोड़ना भी उतना ही जरूरी है।
छत्तीसगढ़ के लिए PMAY-U पुरस्कार-2026 में मिली पहचान इस दिशा में एक प्रोत्साहन के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ाती है। शहरी गरीब परिवारों के लिए पक्का घर उपलब्ध कराने की मुहिम तभी पूरी मानी जाएगी, जब योजना का लाभ अंतिम पात्र परिवार तक पहुंचे और उसे सिर्फ मकान नहीं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का आधार मिले।
यही वजह है कि प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी में छत्तीसगढ़ की यह उपलब्धि प्रदेश के लिए सिर्फ एक पुरस्कार नहीं, बल्कि शहरी गरीबों के जीवन में बदलाव की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की राष्ट्रीय पहचान के रूप में देखी जा रही है।
