त्योहारी सीजन से पहले शक्कर की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है। डेढ़ महीने में थोक बाजार में चीनी 42-43 रुपये से बढ़कर 70-71 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। जानिए कीमतें बढ़ने की वजह, एथेनॉल उत्पादन का असर और रक्षाबंधन, दशहरा व दीपावली पर महंगाई का प्रभाव।
रक्षाबंधन (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया), दशहरा और दीपावली जैसे बड़े त्योहारों की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। घरों में मिठाइयां बनाने की योजना बन रही है तो बाजारों में भी हलचल तेज हो गई है। लेकिन इस बार त्योहारी खुशियों के बीच महंगाई का असर साफ दिखाई देने लगा है। सबसे ज्यादा चिंता की बात शक्कर यानी चीनी की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी है।
करीब डेढ़ महीने पहले तक थोक बाजार में 42 से 43 रुपये प्रति किलो बिकने वाली शक्कर अब 70 से 71 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। यानी बहुत कम समय में इसकी कीमत में लगभग 65 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो खुदरा बाजार में भी कीमतें और बढ़ सकती हैं।
थोक बाजार में तेजी का सीधा असर खुदरा ग्राहकों पर

व्यापारियों का कहना है कि थोक बाजार में लगातार बढ़ती कीमतों का असर धीरे-धीरे खुदरा बाजार तक पहुंच रहा है। दुकानदार पहले से खरीदे गए स्टॉक के कारण फिलहाल कुछ हद तक कीमतों को नियंत्रित किए हुए हैं, लेकिन नया माल महंगा मिलने से जल्द ही ग्राहकों को अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो त्योहारों के दौरान आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
क्यों बढ़ रही हैं शक्कर की कीमतें?

कारोबारियों और उद्योग से जुड़े जानकारों के अनुसार कीमतों में तेजी आने के पीछे कई प्रमुख कारण हैं।
1. बाजार में सीमित आवक
मिलों से बाजार में शक्कर की आपूर्ति अपेक्षाकृत कम हो रही है। मांग अधिक और आपूर्ति सीमित होने से कीमतों में लगातार उछाल देखा जा रहा है।
2. एथेनॉल उत्पादन में बढ़ा उपयोग
हाल के वर्षों में सरकार ने एथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blending) को बढ़ावा दिया है। इसके चलते गन्ने के रस और शीरे (Molasses) का बड़ा हिस्सा एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे चीनी उत्पादन पर असर पड़ा है और बाजार में उपलब्धता घटने लगी है।
3. सीमित स्टॉक
व्यापारियों के अनुसार कई स्थानों पर स्टॉक सामान्य से कम है। भविष्य में और तेजी आने की संभावना को देखते हुए कुछ कारोबारी भी सीमित बिक्री कर रहे हैं, जिससे बाजार में दबाव और बढ़ गया है।
मिठाई और बेकरी उद्योग पर पड़ेगा असर
शक्कर केवल घरेलू रसोई तक सीमित नहीं है। इसका सबसे अधिक उपयोग मिठाई, बेकरी, चॉकलेट, बिस्कुट, नमकीन, कोल्ड ड्रिंक और विभिन्न खाद्य उत्पादों में होता है।
यदि शक्कर की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहती हैं तो—
- मिठाइयों के दाम बढ़ सकते हैं।
- बेकरी उत्पाद महंगे हो सकते हैं।
- हलवाई और छोटे कारोबारियों की लागत बढ़ेगी।
- त्योहारी ऑर्डर की कीमतों में बदलाव देखने को मिल सकता है।
मिठाई कारोबारियों का कहना है कि त्योहारी सीजन में मांग कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे समय में कच्चे माल की कीमत बढ़ने से उत्पादन लागत सीधे प्रभावित होती है।
घरेलू बजट पर भी पड़ेगा असर
शक्कर हर घर की दैनिक जरूरत का हिस्सा है। चाय, कॉफी, मिठाई, खीर, हलवा और अन्य व्यंजनों में इसका नियमित उपयोग होता है। ऐसे में कीमत बढ़ने से मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों का मासिक रसोई बजट प्रभावित होना तय माना जा रहा है।
विशेष रूप से त्योहारों में बड़ी मात्रा में मिठाइयां और पकवान बनाने वाले परिवारों को अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ सकता है।
रक्षाबंधन से दीपावली तक बढ़ सकती है मांग

अगले कुछ महीनों में रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेश उत्सव, नवरात्रि, दशहरा और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहार आने वाले हैं। इन अवसरों पर शक्कर की खपत सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है।
व्यापारियों का कहना है कि यदि मांग बढ़ने के साथ आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि स्थिति पूरी तरह उत्पादन, मिलों की आपूर्ति और बाजार की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।
क्या आगे और महंगी हो सकती है शक्कर?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल कीमतों में नरमी के संकेत कम दिखाई दे रहे हैं। यदि उत्पादन में सुधार होता है और बाजार में पर्याप्त आपूर्ति आती है तो कीमतों में स्थिरता आ सकती है। लेकिन यदि मांग लगातार बढ़ती रही और स्टॉक सीमित रहा तो आने वाले सप्ताहों में और बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता।
उद्योग जगत का मानना है कि सरकार की नीतियां, एथेनॉल उत्पादन का स्तर और चीनी मिलों की आपूर्ति आने वाले समय में कीमतों की दिशा तय करेंगे।
उपभोक्ताओं और कारोबारियों की नजर बाजार पर

त्योहारी खरीदारी शुरू होने के साथ उपभोक्ता फिलहाल कीमतों पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं मिठाई विक्रेता और बेकरी संचालक भी लागत और बिक्री के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यदि महंगाई का यही दौर जारी रहा तो त्योहारों की मिठास इस बार लोगों की जेब पर भारी पड़ सकती है।
