राजधानी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान योग गुरु बाबा रामदेव ने धर्मांतरण, सामाजिक समरसता, सनातन संस्कृति, भारत की अर्थव्यवस्था और विकास सहित कई अहम विषयों पर अपने विचार रखे। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
राजधानी (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए योग गुरु बाबा रामदेव ने धर्मांतरण, सामाजिक समरसता, सनातन संस्कृति, देश की अर्थव्यवस्था और पड़ोसी देशों में हिंदुओं की स्थिति जैसे विभिन्न विषयों पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान केवल उसकी आर्थिक प्रगति से नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक मूल्यों और सामाजिक एकता से भी होती है। इसलिए देश को आगे बढ़ाने के लिए विकास और सामाजिक सौहार्द दोनों को समान महत्व देना आवश्यक है।
बाबा रामदेव ने कहा कि भारत की सनातन परंपरा हजारों वर्षों से मानवता को जीवन जीने की दिशा देती रही है। यह केवल एक धार्मिक व्यवस्था नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, नैतिक और मानवीय बनाने का मार्ग है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे सनातन संस्कृति के मूल सिद्धांतों को समझें और उन्हें अपने दैनिक जीवन में अपनाने का प्रयास करें।
सनातन संस्कृति को बताया दुनिया की सबसे प्राचीन परंपराओं में से एक
बाबा रामदेव ने कहा कि सनातन संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध परंपराओं में से एक मानी जाती है। इसके मूल में मानव कल्याण, प्रकृति के प्रति सम्मान, परिवार व्यवस्था, सत्य, अहिंसा और सेवा की भावना निहित है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ने हमेशा पूरी दुनिया को “वसुधैव कुटुंबकम्” का संदेश दिया है, जिसका अर्थ है कि संपूर्ण विश्व एक परिवार है।
उन्होंने कहा कि यदि समाज अपने मूल सांस्कृतिक मूल्यों को आत्मसात करेगा तो सामाजिक तनाव और विभाजन जैसी समस्याओं में भी कमी आएगी। उनके अनुसार आधुनिक जीवनशैली के साथ-साथ भारतीय परंपराओं और नैतिक मूल्यों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है।
सामाजिक समरसता पर दिया विशेष जोर
सामाजिक समरसता के विषय पर बोलते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि समाज में कहीं-कहीं ऊंच-नीच, भेदभाव और सामाजिक असमानता जैसी स्थितियां देखने को मिलती हैं, लेकिन इन्हें धर्म की मूल भावना से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की मजबूती उसकी एकता और आपसी सम्मान में होती है।
उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि जाति, वर्ग, भाषा या क्षेत्र के आधार पर भेदभाव से बचते हुए सभी नागरिकों को समान सम्मान देने की भावना विकसित करनी चाहिए। उनके अनुसार जब समाज एकजुट रहेगा, तभी देश विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेगा।
भगवान राम, श्रीकृष्ण, हनुमान और भगवान शिव के आदर्श अपनाने की अपील
बाबा रामदेव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में भगवान राम मर्यादा के प्रतीक हैं, श्रीकृष्ण नीति और कर्मयोग का संदेश देते हैं, हनुमान सेवा, समर्पण और शक्ति के प्रतीक हैं, जबकि भगवान शिव त्याग, करुणा और संतुलन का संदेश देते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि लोग इन आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करें तो समाज में नैतिकता, अनुशासन और भाईचारा स्वतः मजबूत होगा। उनका मानना है कि धार्मिक आस्था का वास्तविक उद्देश्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना होना चाहिए।
धर्मांतरण के मुद्दे पर रखे अपने विचार
पत्रकारों के सवालों के जवाब में बाबा रामदेव ने धर्मांतरण के विषय पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अलग-अलग समय में लालच, भय, चमत्कार और भ्रम जैसे माध्यमों से धर्म परिवर्तन के आरोप सामने आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस विषय पर समाज को गंभीरता से विचार करना चाहिए और लोगों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि समाज में शिक्षा, संवाद और जागरूकता के माध्यम से लोगों को अपने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों की सही जानकारी मिलनी चाहिए। उनके अनुसार किसी भी प्रकार के सामाजिक विवाद से बचते हुए शांति और सौहार्द का वातावरण बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है।
पड़ोसी देशों में हिंदुओं की स्थिति पर जताई चिंता
बाबा रामदेव ने पड़ोसी देशों में रहने वाले हिंदुओं की स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों और हिंदू समुदाय की सुरक्षा, सम्मान और सांस्कृतिक पहचान भी महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वैश्विक स्तर पर सभी समुदायों के साथ समान व्यवहार और धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की दिशा में सकारात्मक प्रयास होने चाहिए।
विकास और मजबूत अर्थव्यवस्था को बताया देश की प्राथमिकता
देश की अर्थव्यवस्था पर बोलते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि भारत तेजी से आर्थिक प्रगति कर रहा है और आने वाले वर्षों में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि रोजगार, उद्योग, कृषि, स्वदेशी उत्पादन, योग, आयुर्वेद और नवाचार जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देकर भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में और आगे बढ़ सकता है। उनके अनुसार सामाजिक स्थिरता और आर्थिक मजबूती एक-दूसरे की पूरक हैं और दोनों पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।
सामाजिक सद्भाव और राष्ट्र निर्माण का दिया संदेश
बातचीत के अंत में बाबा रामदेव ने कहा कि देश को विकास, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से सकारात्मक सोच अपनाने, समाज में सहयोग की भावना बढ़ाने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति उसकी विविधता, संस्कृति और एकता में निहित है। यदि सभी नागरिक मिलकर सामाजिक समरसता, नैतिक मूल्यों और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ेंगे तो देश और अधिक मजबूत बनेगा।
