अरुण साव ने सोशल मीडिया पर एडिटेड फोटो और भ्रामक वीडियो फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की बात कही। नितिन नबीन की कथित एडिटेड तस्वीर मामले में दर्ज एफआईआर को कानून के दायरे में बताते हुए निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया। पढ़ें पूरी खबर।
रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ में सोशल मीडिया पर कथित एडिटेड फोटो और भ्रामक वीडियो को लेकर शुरू हुए राजनीतिक विवाद के बीच उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने स्पष्ट किया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और सोशल मीडिया के माध्यम से फर्जी सामग्री फैलाकर समाज में भ्रम पैदा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी मामले में कार्रवाई राजनीतिक आधार पर नहीं, बल्कि उपलब्ध तथ्यों और कानून के प्रावधानों के अनुसार की जाती है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया आज सूचना का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है, लेकिन कुछ लोग इसका दुरुपयोग कर गलत जानकारी, एडिटेड तस्वीरें और भ्रामक वीडियो प्रसारित कर लोगों को गुमराह करने का प्रयास करते हैं। ऐसे मामलों में कानून अपना काम करेगा और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
नितिन नबीन की तस्वीर से कथित छेड़छाड़ के मामले पर दिया जवाब
अरुण साव ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की कथित एडिटेड तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के मामले में दर्ज एफआईआर को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस मामले में दर्ज एफआईआर पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है और जांच एजेंसियां निष्पक्ष रूप से पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी प्रकार के राजनीतिक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। यदि जांच में किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। वहीं यदि कोई निर्दोष पाया जाता है तो उसके साथ भी न्याय होगा।
‘फर्जी सामग्री से समाज में फैलता है भ्रम’
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गलत सूचना का प्रसार केवल किसी व्यक्ति की छवि को प्रभावित नहीं करता, बल्कि समाज में भ्रम और अविश्वास का वातावरण भी पैदा करता है। उन्होंने कहा कि एडिटेड फोटो, फर्जी वीडियो और भ्रामक पोस्ट लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए भी चुनौती बन सकते हैं।
उनका कहना था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सभी नागरिकों का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार का उपयोग जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए। किसी व्यक्ति या संस्था की छवि धूमिल करने अथवा समाज में भ्रम फैलाने के उद्देश्य से झूठी सामग्री तैयार करना और उसका प्रसार करना कानूनन गलत है।
सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से करें उपयोग
अरुण साव ने आम नागरिकों से भी अपील की कि सोशल मीडिया पर किसी भी फोटो, वीडियो या संदेश को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें। उन्होंने कहा कि बिना पुष्टि के किसी भी सामग्री को आगे बढ़ाना कई बार अनजाने में भी गलत सूचना फैलाने का कारण बन जाता है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार अपनाए और अफवाहों से बचते हुए केवल प्रमाणित जानकारी पर भरोसा करे।
कांग्रेस के आरोपों को बताया निराधार
उपमुख्यमंत्री ने कांग्रेस द्वारा लगाए गए राजनीतिक प्रतिशोध के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी व्यक्ति या दल के खिलाफ राजनीतिक भावना से कार्रवाई नहीं करती। यदि कोई मामला कानून के दायरे में आता है तो पुलिस और जांच एजेंसियां अपने अधिकार क्षेत्र में कार्रवाई करती हैं।
उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और किसी भी मामले में जांच के दौरान तथ्यों को प्राथमिकता दी जाती है। इसलिए राजनीतिक बयानबाजी के बजाय जांच पूरी होने का इंतजार किया जाना चाहिए।
साइबर अपराधों पर सरकार की नजर
अरुण साव ने कहा कि राज्य सरकार साइबर अपराधों और सोशल मीडिया के दुरुपयोग को गंभीरता से ले रही है। तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ-साथ फर्जी अकाउंट, मॉर्फ्ड फोटो, डीपफेक वीडियो और गलत सूचना जैसी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। ऐसे मामलों में पुलिस और साइबर विशेषज्ञ लगातार निगरानी रख रहे हैं ताकि दोषियों के खिलाफ समय पर कार्रवाई की जा सके।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं, बल्कि सोशल मीडिया को सुरक्षित और जिम्मेदार मंच बनाए रखना है।
कानून के अनुसार होगी आगे की कार्रवाई
उपमुख्यमंत्री ने दोहराया कि नितिन नबीन की तस्वीर से कथित छेड़छाड़ के मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर ही आगे की कार्रवाई होगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी को भी फर्जी सामग्री बनाकर समाज में भ्रम फैलाने या लोगों को गुमराह करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वस्थ संवाद आवश्यक है, लेकिन झूठी और भ्रामक सामग्री के जरिए जनमत को प्रभावित करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। सरकार कानून के शासन में विश्वास रखती है और हर मामले में विधिसम्मत कार्रवाई ही की
