भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन की कथित एडिटेड तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने और कांग्रेस नेता अरुण साहू पर एफआईआर दर्ज होने के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार पर राजनीतिक बदले की कार्रवाई का आरोप लगाया। पढ़िए पूरा घटनाक्रम।
छत्तीसगढ़ (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) की राजनीति में सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक कथित एडिटेड तस्वीर को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नबीन की कथित रूप से संपादित (एडिटेड) तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के मामले में कांग्रेस नेता अरुण साहू के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं। इस कार्रवाई को लेकर दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है। उनका आरोप है कि सरकार कानून का इस्तेमाल निष्पक्ष तरीके से नहीं कर रही, बल्कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है।
दीपक बैज ने सरकार पर लगाया पक्षपात का आरोप
मीडिया से बातचीत के दौरान दीपक बैज ने कहा कि यदि सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक या भ्रामक सामग्री साझा करने पर कार्रवाई की जाती है तो उसका एक समान मापदंड होना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल विपक्ष से जुड़े नेताओं पर कार्रवाई करना और अन्य मामलों में चुप्पी साध लेना लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।
बैज का कहना है कि कानून सभी नागरिकों और राजनीतिक दलों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति ने नियमों का उल्लंघन किया है तो निष्पक्ष जांच के बाद कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन चयनात्मक कार्रवाई से सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं।
एफआईआर के बाद कांग्रेस ने उठाए कई सवाल
प्रदेश कांग्रेस ने इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सोशल मीडिया पर आए दिन कई तरह की भ्रामक और एडिटेड तस्वीरें तथा पोस्ट वायरल होती रहती हैं, लेकिन कार्रवाई केवल चुनिंदा मामलों में ही होती है।
कांग्रेस का आरोप है कि यदि सरकार वास्तव में फर्जी सामग्री के खिलाफ सख्त है तो उसे सभी मामलों में समान रूप से कार्रवाई करनी चाहिए। विपक्ष का कहना है कि राजनीतिक विरोध को दबाने के लिए कानून का उपयोग नहीं होना चाहिए।
भाजपा का रुख
भाजपा का मानना है कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति की छवि खराब करने या सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रामक जानकारी फैलाने की कोशिश कानून के दायरे में आती है। पार्टी नेताओं का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गलत और भ्रामक सामग्री समाज में भ्रम फैलाती है तथा राजनीतिक माहौल को भी प्रभावित करती है। ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई आवश्यक है ताकि सोशल मीडिया का दुरुपयोग रोका जा सके।
भाजपा का यह भी कहना है कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाता है, लेकिन किसी व्यक्ति की छवि धूमिल करने या गलत जानकारी फैलाने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।
वंदे मातरम और स्वतंत्रता आंदोलन का भी किया जिक्र
इस विवाद के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने केवल एफआईआर के मुद्दे तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने वंदे मातरम, स्वतंत्रता आंदोलन और वर्तमान राजनीतिक माहौल का भी उल्लेख किया।
बैज ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशभक्ति और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए अनेक लोगों ने संघर्ष किया था। ऐसे में लोकतंत्र में विचारों की असहमति को देश विरोध या अपराध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक और राजनीतिक दल को अपनी बात रखने का अधिकार है।
प्रधानमंत्री के बयान पर भी साधा निशाना
दीपक बैज ने प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए ‘दिमागी नक्सली’ संबंधी बयान का उल्लेख करते हुए भी भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की वैचारिक असहमति को इस तरह के विशेषणों से जोड़ना उचित नहीं है। उनका कहना है कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत विचारों की विविधता और असहमति का सम्मान है।
बैज ने कहा कि यदि कोई सरकार की नीतियों से असहमत है या सवाल उठाता है तो उसे लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।
सोशल मीडिया बना राजनीतिक संघर्ष का नया मंच
बीते कुछ वर्षों में सोशल मीडिया राजनीतिक संवाद का सबसे प्रभावशाली माध्यम बनकर उभरा है। चुनावी रणनीति से लेकर जनसंपर्क और प्रचार तक लगभग हर राजनीतिक दल सोशल मीडिया का व्यापक उपयोग कर रहा है। इसके साथ ही फर्जी तस्वीरों, एडिटेड वीडियो और भ्रामक पोस्ट को लेकर विवाद भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा की जाने वाली किसी भी सामग्री की सत्यता की जांच करना आवश्यक है। वहीं राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है कि वे तथ्यात्मक जानकारी साझा करें और भ्रामक सामग्री से बचें।
आगे क्या होगा?
अरुण साहू के खिलाफ दर्ज एफआईआर के बाद अब पूरे मामले की जांच महत्वपूर्ण होगी। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। दूसरी ओर कांग्रेस इस मुद्दे को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए सरकार को लगातार घेरने की रणनीति पर काम कर रही है, जबकि भाजपा इसे कानून के अनुसार की गई कार्रवाई बता रही है।
स्पष्ट है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक कथित एडिटेड तस्वीर ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
