छत्तीसगढ़ के धमतरी में हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां बलौदाबाजार के युवक मोतीलाल विश्वकर्मा को मृत समझकर अंतिम संस्कार कर दिया गया था, लेकिन 17 दिन बाद वह जिंदा मिल गया। अब पुलिस अज्ञात शव की पहचान और पूरे मामले की जांच में जुटी है।
धमतरी (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ स्थानीय लोगों को बल्कि पुलिस प्रशासन को भी हैरानी में डाल दिया है। बलौदाबाजार जिले के 28 वर्षीय युवक मोतीलाल विश्वकर्मा को परिवार ने मृत समझकर अंतिम संस्कार तक कर दिया था, लेकिन 17 दिन बाद वही युवक जिंदा हालत में धमतरी में मिल गया। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और अब यह मामला एक गहरी रहस्यपूर्ण जांच का विषय बन गया है।
28 जुलाई को मिली थी क्षत-विक्षत लाश, पहचान बनी थी आधार

यह पूरा मामला 28 जुलाई से शुरू होता है, जब धमतरी जिले के सेमरा नाला के पास एक अज्ञात युवक का क्षत-विक्षत शव बरामद किया गया था। शव की हालत इतनी खराब थी कि उसकी पहचान करना लगभग असंभव हो गया था।
पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों में गुमशुदा लोगों की जानकारी जुटानी शुरू की। इसी दौरान बलौदाबाजार जिले से लापता मोतीलाल विश्वकर्मा के परिजनों को सूचना दी गई। परिजन धमतरी पहुंचे और कपड़े, शरीर के निशान और अन्य पहचान के आधार पर शव को मोतीलाल का बताया।
भावनात्मक रूप से टूट चुके परिवार ने पुलिस की औपचारिकताओं के बाद शव को स्वीकार कर लिया और अंतिम संस्कार कर दिया। उस समय किसी को भी अंदाजा नहीं था कि यह पहचान एक बड़ी भूल साबित होने वाली है।
17 दिन बाद जिंदा मिला मोतीलाल, मच गया हड़कंप
14 अगस्त को जब धमतरी में मोतीलाल विश्वकर्मा को जिंदा देखा गया, तो यह खबर आग की तरह फैल गई। परिवार, पुलिस और स्थानीय प्रशासन सभी हैरान रह गए।
जिस परिवार ने अपने बेटे का अंतिम संस्कार कर दिया था, वही परिवार अब उसे जिंदा देखकर भावनात्मक रूप से टूट भी गया और खुश भी। यह स्थिति किसी चमत्कार से कम नहीं थी।
मोतीलाल के जिंदा मिलने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया कि आखिर 28 जुलाई को मिला शव किसका था, जिसे मोतीलाल समझकर अंतिम संस्कार किया गया।
अज्ञात शव की पहचान बनी सबसे बड़ी पहेली
इस घटना के बाद पुलिस ने पूरे मामले की जांच दोबारा शुरू कर दी है। अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि सेमरा नाला से मिला वह शव आखिर किस व्यक्ति का था।
पुलिस आसपास के जिलों से गुमशुदा लोगों की रिपोर्ट खंगाल रही है। साथ ही वैज्ञानिक जांच जैसे डीएनए टेस्ट की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि असली पहचान सामने आ सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब शव अत्यधिक क्षत-विक्षत अवस्था में होता है, तो पहचान में गलती होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे मामलों में भावनात्मक दबाव भी गलत पहचान का कारण बन सकता है।
पुलिस करेगी डीएनए जांच, हर एंगल से जांच जारी
धमतरी पुलिस अब इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है। अधिकारियों के अनुसार, यदि आवश्यक हुआ तो परिजनों के डीएनए सैंपल लेकर वैज्ञानिक जांच कराई जाएगी।
इसके अलावा पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मोतीलाल पिछले 17 दिनों तक कहां था, वह परिवार से संपर्क में क्यों नहीं था और धमतरी कैसे पहुंचा।
पुलिस का कहना है कि जब तक सभी तथ्यों की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
परिवार पर टूटा भावनात्मक संकट
इस पूरे घटनाक्रम ने मोतीलाल के परिवार को गहरे मानसिक और भावनात्मक आघात में डाल दिया है। पहले बेटे की मौत का दुख, फिर अंतिम संस्कार और उसके बाद जिंदा लौट आना—यह सब परिवार के लिए किसी भावनात्मक झटके से कम नहीं है।
गांव और आसपास के लोग भी इस घटना को लेकर हैरान हैं और लगातार चर्चा कर रहे हैं। यह मामला अब पूरे क्षेत्र में एक रहस्य बन चुका है।
स्थानीय लोगों में चर्चा का विषय बना मामला
धमतरी और बलौदाबाजार दोनों जिलों में यह घटना चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है। लोग इसे या तो प्रशासनिक चूक मान रहे हैं या फिर एक बेहद दुर्लभ और रहस्यमयी घटना।
सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से वायरल हो रहा है, जहां लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी गलती कैसे हो सकती है।
जांच के बाद ही खुलेगा पूरा सच
धमतरी का यह मामला केवल एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक प्रक्रिया और पहचान प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। एक तरफ जहां परिवार अपने बेटे को जिंदा पाकर राहत महसूस कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अज्ञात शव की पहचान अब भी एक अनसुलझी पहेली बनी हुई है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि 28 जुलाई को मिला शव आखिर किसका था और यह पूरी गलती कैसे हुई।
