रायपुर के 12 वर्षीय छात्र दिव्यांश सुल्तानिया की पुस्तक ‘थॉट्स अबाउट गॉड’ का राज्यपाल रमेन डेका ने विमोचन किया। दूसरी पुस्तक ‘फ्रॉम पॉकेट मनी टू पोर्टफोलियो’ का कवर भी लॉन्च हुआ। जानिए इस बाल लेखक की प्रेरणादायक कहानी।
रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। उम्र यदि केवल 12 वर्ष हो और उसी उम्र में कोई बच्चा दो पुस्तकों का लेखक बन जाए, तो यह न केवल उसके परिवार के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए गर्व का विषय होता है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के 12 वर्षीय छात्र दिव्यांश सुल्तानिया ने अपनी प्रतिभा, जिज्ञासा और सकारात्मक सोच से ऐसा ही प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
राज्यपाल रमेन डेका ने राजभवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में दिव्यांश की पहली पुस्तक ‘थॉट्स अबाउट गॉड’ का औपचारिक विमोचन किया। इसी अवसर पर उनकी दूसरी पुस्तक ‘फ्रॉम पॉकेट मनी टू पोर्टफोलियो’ के आकर्षक कवर का भी लोकार्पण किया गया। यह पुस्तक बच्चों और युवाओं में बचत, निवेश तथा वित्तीय जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है।
यह अवसर केवल एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम नहीं था, बल्कि नई पीढ़ी की रचनात्मक क्षमता, ज्ञान के प्रति समर्पण और आत्मविश्वास का उत्सव भी बन गया।
कम उम्र में बड़ी सोच का परिचय
आज के दौर में जहां अधिकांश बच्चे डिजिटल मनोरंजन और सोशल मीडिया में अधिक समय बिताते हैं, वहीं दिव्यांश सुल्तानिया ने पढ़ने, सोचने और लिखने की आदत को अपनी पहचान बनाया है। इतनी कम उम्र में दो अलग-अलग विषयों पर पुस्तक लिखना उनकी गहरी अध्ययनशीलता और व्यापक सोच को दर्शाता है।
उनकी पहली पुस्तक ‘थॉट्स अबाउट गॉड’ जीवन, आध्यात्मिकता, नैतिक मूल्यों और ईश्वर के प्रति एक बाल मन की जिज्ञासाओं तथा विचारों को सरल भाषा में प्रस्तुत करती है। वहीं दूसरी पुस्तक ‘फ्रॉम पॉकेट मनी टू पोर्टफोलियो’ बच्चों को छोटी-छोटी बचत से लेकर निवेश की बुनियादी समझ विकसित करने के लिए प्रेरित करती है।
राज्यपाल रमेन डेका ने की खुलकर सराहना

कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल रमेन डेका ने दिव्यांश की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों में पढ़ने, लिखने और नए विषयों पर गंभीरता से विचार करने की आदत विकसित होना अत्यंत आवश्यक है। यही आदत आगे चलकर उनके व्यक्तित्व निर्माण, नेतृत्व क्षमता और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करती है।
उन्होंने कहा कि जब बच्चे कम उम्र में ही सकारात्मक साहित्य का सृजन करते हैं, तो वे केवल अपने लिए नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन जाते हैं। ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहन मिलना चाहिए ताकि अधिक से अधिक बच्चे अपनी रचनात्मक प्रतिभा को पहचान सकें।
राज्यपाल ने यह भी कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि विचारशील और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी है। दिव्यांश जैसी प्रतिभाएं इस दिशा में एक सकारात्मक संदेश देती हैं।
दूसरी पुस्तक का विषय बना चर्चा का केंद्र

समारोह में सबसे अधिक चर्चा दिव्यांश की आगामी पुस्तक ‘फ्रॉम पॉकेट मनी टू पोर्टफोलियो’ को लेकर रही। यह पुस्तक बच्चों और किशोरों को वित्तीय अनुशासन की प्रारंभिक शिक्षा देने का प्रयास करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में वित्तीय साक्षरता को लेकर अभी भी व्यापक जागरूकता की आवश्यकता है। यदि बच्चों को छोटी उम्र से ही बचत, बजट, निवेश और धन प्रबंधन की सही जानकारी दी जाए, तो वे भविष्य में अधिक जिम्मेदार आर्थिक निर्णय लेने में सक्षम बन सकते हैं।
दिव्यांश की यह पुस्तक इसी सोच को आगे बढ़ाती है कि जेब खर्च केवल खर्च करने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की वित्तीय समझ विकसित करने का भी माध्यम बन सकता है।
परिवार की भूमिका भी रही महत्वपूर्ण
किसी भी बच्चे की सफलता के पीछे परिवार का सहयोग सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस अवसर पर दिव्यांश के माता-पिता और अन्य परिजन भी मौजूद रहे।
परिवार ने दिव्यांश की पढ़ाई, लेखन और नए विषयों पर अध्ययन करने की रुचि को लगातार प्रोत्साहित किया। यही कारण है कि उन्होंने इतनी कम उम्र में लेखक के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई।
शिक्षाविदों का मानना है कि यदि बच्चों को घर में पढ़ने का अनुकूल वातावरण, पुस्तकें और सकारात्मक मार्गदर्शन मिले, तो उनकी रचनात्मक क्षमता कई गुना बढ़ सकती है।
बच्चों के लिए प्रेरणा बनेगी यह उपलब्धि
दिव्यांश सुल्तानिया की सफलता यह संदेश देती है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। यदि किसी बच्चे में सीखने की इच्छा, अनुशासन और निरंतर प्रयास करने का संकल्प हो, तो वह कम उम्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर सकता है।
आज जब नई शिक्षा नीति भी रचनात्मक सोच, नवाचार और कौशल आधारित शिक्षा पर जोर दे रही है, ऐसे उदाहरण विद्यार्थियों को प्रेरित करने का काम करते हैं। विद्यालयों में भी इस प्रकार की उपलब्धियों को साझा करने से अन्य विद्यार्थियों को लेखन, अध्ययन और शोध के प्रति रुचि विकसित करने का अवसर मिलेगा।
साहित्य और वित्तीय शिक्षा का अनूठा संगम
दिव्यांश की दोनों पुस्तकों के विषय एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। एक ओर आध्यात्मिक चिंतन और जीवन मूल्यों पर आधारित पुस्तक है, वहीं दूसरी ओर वित्तीय जागरूकता जैसे व्यावहारिक विषय को सरल तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
यह विविधता दर्शाती है कि नई पीढ़ी केवल पारंपरिक विषयों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज की बदलती जरूरतों को भी समझ रही है। यही सोच भविष्य के जिम्मेदार, जागरूक और नवाचारी भारत की नींव बन सकती है।
समाज के लिए सकारात्मक संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की उपलब्धियों को केवल पुरस्कारों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें समाज के सामने प्रेरक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इससे अन्य बच्चों में भी पढ़ने, लिखने और नए विषयों पर सोचने की प्रेरणा मिलती है।
राज्यपाल द्वारा दिव्यांश की पुस्तकों का विमोचन इस बात का प्रतीक है कि राज्य स्तर पर भी युवा प्रतिभाओं को सम्मान और प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इससे शिक्षा, साहित्य और नवाचार के क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार होगा।
रायपुर के 12 वर्षीय दिव्यांश सुल्तानिया ने यह सिद्ध कर दिया है कि सपनों को साकार करने के लिए उम्र नहीं, बल्कि जिज्ञासा, मेहनत और सकारात्मक सोच की आवश्यकता होती है। उनकी दोनों पुस्तकें न केवल ज्ञान और विचारों का माध्यम हैं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी हैं।
राज्यपाल रमेन डेका द्वारा किया गया यह सम्मान उन सभी बच्चों के लिए उत्साहवर्धक संदेश है जो अपने भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानकर समाज के लिए कुछ नया और सार्थक करना चाहते हैं। आने वाले समय में दिव्यांश जैसे युवा लेखक निश्चित रूप से देश की बौद्धिक और रचनात्मक शक्ति को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।