भिलाई रेलवे के वरिष्ठ डीएमई अनमोल उइके के खिलाफ कथित रिश्वत मांगने की शिकायत पर सीबीआई की टीम जांच के लिए भिलाई पहुंची। जानिए पूरा मामला, पीपी यार्ड में चल रही जांच, रेलवे अधिकारियों की भूमिका और इससे जुड़े सभी अहम अपडेट।
छत्तीसगढ़ (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) के भिलाई स्थित रेलवे परिसर में गुरुवार देर शाम उस समय हलचल बढ़ गई, जब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की एक टीम वरिष्ठ रेलवे अधिकारी अनमोल उइके के खिलाफ मिली कथित रिश्वत शिकायत की जांच के लिए पहुंची। शुरुआती जानकारी के अनुसार, रेलवे के एक ठेकेदार ने आरोप लगाया है कि उसके रनिंग बिल (Running Bill) को पास करने के बदले अवैध रूप से रकम की मांग की गई थी। शिकायत सीधे दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय तक पहुंचने के बाद एजेंसी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार शाम लगभग 8:30 बजे सीबीआई के करीब आठ अधिकारियों की टीम भिलाई पहुंची। टीम सीधे रेलवे के पीपी यार्ड कार्यालय पहुंची, जहां देर रात तक दस्तावेजों की जांच और अधिकारियों से पूछताछ का सिलसिला चलता रहा।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि रेलवे में कार्य कर रहे एक कॉन्ट्रैक्टर के लंबित रनिंग बिल को पास कराने के लिए कथित रूप से रिश्वत मांगी गई। शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले की जानकारी सीबीआई को उपलब्ध कराई, जिसके बाद एजेंसी ने प्रारंभिक जांच शुरू की।
हालांकि, अभी तक सीबीआई या रेलवे प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि जांच प्रारंभिक सत्यापन के स्तर पर है या नियमित जांच की दिशा में आगे बढ़ रही है।
पीपी यार्ड क्यों है महत्वपूर्ण?
जिस पीपी यार्ड में सीबीआई की टीम जांच कर रही है, वह रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी परिसर माना जाता है। यहां मुख्य रूप से मालगाड़ियों के रेलवे वैगनों का रखरखाव, मरम्मत, निरीक्षण और तकनीकी परीक्षण किया जाता है।
इस यार्ड में समय-समय पर करोड़ों रुपये के रखरखाव और तकनीकी कार्यों से जुड़े अनुबंध जारी किए जाते हैं। ऐसे में यहां विभिन्न निजी ठेकेदारों और रेलवे अधिकारियों के बीच वित्तीय लेन-देन और बिल भुगतान की प्रक्रिया भी लगातार चलती रहती है। यही कारण है कि किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता या रिश्वत संबंधी शिकायत को गंभीर माना जाता है।
दस्तावेजों की हो रही है जांच
सूत्रों के अनुसार, सीबीआई की टीम ने कार्यालय में उपलब्ध कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों, फाइलों और बिलों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की। अधिकारियों से आवश्यक जानकारी भी ली गई। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों का कोई दस्तावेजी आधार मौजूद है या नहीं।
बताया जा रहा है कि संबंधित फाइलों और भुगतान प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड का भी परीक्षण किया जा रहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बिल पास करने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई या नहीं।
वर्ष 2023 में भी हुई थी CBI की कार्रवाई
भिलाई का यही रेलवे परिसर इससे पहले भी सीबीआई की कार्रवाई का केंद्र बन चुका है। वर्ष 2023 में भी इसी पीपी यार्ड में कथित कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सीबीआई ने कार्रवाई की थी। उस समय भी रेलवे अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच आर्थिक लेन-देन से जुड़े मामलों की जांच हुई थी।
ऐसे में एक बार फिर इसी परिसर में सीबीआई की मौजूदगी ने रेलवे महकमे में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
रेलवे विभाग में बढ़ी हलचल
सीबीआई टीम के पहुंचने की सूचना मिलते ही रेलवे कार्यालयों में कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच हलचल बढ़ गई। कई अधिकारी देर रात तक कार्यालय में मौजूद रहे। हालांकि अधिकांश कर्मचारियों ने इस विषय पर सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहने से इनकार किया।
रेलवे से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल किसी भी अधिकारी के खिलाफ किसी प्रकार की आधिकारिक कार्रवाई या गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।
शिकायत के बाद क्या होती है CBI की प्रक्रिया?
किसी भी भ्रष्टाचार संबंधी शिकायत मिलने के बाद सीबीआई सामान्यतः पहले तथ्यों का सत्यापन करती है। यदि शिकायत प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होती है, तो उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाती है।
इस प्रक्रिया के दौरान संबंधित रिकॉर्ड, भुगतान दस्तावेज, आधिकारिक नोटशीट, इलेक्ट्रॉनिक डेटा और संबंधित अधिकारियों के बयान भी जांच का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। यदि पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो एजेंसी आगे की कार्रवाई करती है।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
फिलहाल इस पूरे मामले में कई जानकारियां सूत्रों के आधार पर सामने आई हैं। न तो सीबीआई और न ही रेलवे प्रशासन ने अभी तक विस्तृत आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। इसलिए जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
यदि एजेंसी की ओर से आगे कोई आधिकारिक जानकारी जारी की जाती है, तो उससे मामले की वास्तविक स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
रेलवे जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक विभाग में भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतें हमेशा गंभीर मानी जाती हैं। भिलाई के पीपी यार्ड में वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ मिली कथित रिश्वत शिकायत पर सीबीआई की जांच शुरू होना इस बात का संकेत है कि एजेंसी मामले की हर पहलू से जांच करना चाहती है। फिलहाल जांच जारी है और सभी की नजर अब सीबीआई की आधिकारिक रिपोर्ट तथा रेलवे प्रशासन की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।
