गरियाबंद में विश्व आदिवासी दिवस को लेकर कांग्रेस विधायक जनक ध्रुव ने भाजपा और आरएसएस पर आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और अस्मिता के विरोध का आरोप लगाया। जानिए उन्होंने जल, जंगल और जमीन को लेकर क्या कहा और इस पूरे राजनीतिक बयान के क्या मायने हैं।
गरियाबंद (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। विश्व आदिवासी दिवस को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। गरियाबंद जिले में कांग्रेस विधायक जनक ध्रुव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और पहचान के विरोध का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के गौरव, इतिहास, संघर्ष और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। ऐसे अवसर का विरोध करना आदिवासी अस्मिता का विरोध करने के समान है।
जनक ध्रुव ने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर जीवन जीता आया है। जल, जंगल और जमीन उनके जीवन का आधार हैं और इन्हीं के संरक्षण के लिए समाज ने हमेशा संघर्ष किया है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय के लिए जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। जल उनके अस्तित्व की सांस है, जमीन उनकी पहचान है और संस्कृति उनकी आत्मा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आदिवासी समाज को केवल चुनावी राजनीति और वोट बैंक के नजरिए से देखती है। उनके अनुसार जब आदिवासी समाज अपनी संस्कृति, परंपराओं और अधिकारों के संरक्षण की बात करता है, तब उसका समर्थन करने के बजाय विरोध का माहौल बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि यह सोच आदिवासी समाज की भावनाओं के अनुरूप नहीं है।
विश्व आदिवासी दिवस का महत्व बताया

कांग्रेस विधायक ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस हर वर्ष आदिवासी समाज को अपनी ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक योगदान को याद करने का अवसर प्रदान करता है। यह दिन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और समाज की परंपराओं को आगे बढ़ाने का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में आदिवासी समाज का इतिहास, संस्कृति और परंपराएं राज्य की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यहां की लोककलाएं, लोकनृत्य, रीति-रिवाज और प्राकृतिक जीवन शैली देशभर में अपनी अलग पहचान रखती हैं। ऐसे में विश्व आदिवासी दिवस का महत्व और भी बढ़ जाता है।
जल, जंगल और जमीन को बताया जीवन का आधार

जनक ध्रुव ने अपने संबोधन में कहा कि आदिवासी समाज का प्रकृति से संबंध केवल आजीविका तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी सांस्कृतिक और सामाजिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के बिना आदिवासी समाज की परंपराओं और जीवनशैली की कल्पना नहीं की जा सकती।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय सदियों से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता आया है। जंगलों की रक्षा, प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग और प्रकृति के प्रति सम्मान उनकी जीवन शैली का हिस्सा रहा है। यही कारण है कि आदिवासी समाज की संस्कृति आज भी पर्यावरण संरक्षण का एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जाती है।
भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
अपने बयान में कांग्रेस विधायक ने भाजपा और आरएसएस पर आरोप लगाते हुए कहा कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को लेकर सकारात्मक सोच अपनाने के बजाय विरोध का वातावरण तैयार किया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई समाज अपनी संस्कृति और विरासत का सम्मान करता है तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए, न कि उसका विरोध।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज देश की सांस्कृतिक विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उसकी परंपराओं का सम्मान सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों को करना चाहिए।
आदिवासी समाज की भूमिका पर दिया जोर
जनक ध्रुव ने कहा कि देश की स्वतंत्रता से लेकर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तक आदिवासी समाज का योगदान हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि अनेक आदिवासी वीरों ने देश और समाज के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। ऐसे समाज की सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देना लोकतांत्रिक मूल्यों का भी हिस्सा है।
उन्होंने युवाओं से भी अपनी भाषा, संस्कृति, लोककला और पारंपरिक ज्ञान को सुरक्षित रखने का आह्वान किया। उनके अनुसार आधुनिकता के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत बनाए रखना समय की आवश्यकता है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ी चर्चा
विश्व आदिवासी दिवस को लेकर दिए गए जनक ध्रुव के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दे लंबे समय से छत्तीसगढ़ की राजनीति के केंद्र में रहे हैं। ऐसे में इस तरह के बयान आने वाले समय में राजनीतिक बहस को और गति दे सकते हैं।
हालांकि, इस मामले में भाजपा की ओर से इस खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि भविष्य में किसी पक्ष की ओर से आधिकारिक बयान जारी किया जाता है, तो उसे भी खबर में शामिल किया जाएगा ताकि पाठकों तक सभी पक्षों की जानकारी निष्पक्ष रूप से पहुंच सके।
विश्व आदिवासी दिवस केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं बल्कि आदिवासी समाज की पहचान, विरासत और योगदान को सम्मान देने का अवसर माना जाता है। गरियाबंद में कांग्रेस विधायक जनक ध्रुव द्वारा दिए गए बयान ने इस विषय को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है। फिलहाल जनक ध्रुव ने जल, जंगल और जमीन को आदिवासी समाज की आत्मा बताते हुए उनकी संस्कृति और अस्मिता के संरक्षण पर जोर दिया है।
