मरवाही क्षेत्र में दो जंगली हाथी देर रात बालिका छात्रावास परिसर में घुस गए। हाथियों ने बाउंड्री वॉल और गार्ड रूम को नुकसान पहुंचाया। प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए 58 छात्राओं को सुरक्षित छात्रावास में शिफ्ट किया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
मरवाही (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही क्षेत्र में शनिवार देर रात एक ऐसी घटना सामने आई जिसने छात्राओं, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों की सांसें थाम दीं। जंगल से निकलकर आए दो जंगली हाथी अचानक एक बालिका छात्रावास परिसर में घुस गए। हाथियों ने छात्रावास की सुरक्षा बाउंड्री वॉल को कई स्थानों से तोड़ दिया और परिसर में स्थित गार्ड रूम को भी नुकसान पहुंचाया। घटना के दौरान छात्रावास में मौजूद छात्राओं के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
हालांकि प्रशासन, पुलिस और वन विभाग की त्वरित कार्रवाई के चलते बड़ा हादसा टल गया। एहतियात के तौर पर छात्रावास में रह रही सभी 58 छात्राओं को आधी रात में ही सुरक्षित दूसरे छात्रावास में स्थानांतरित कर दिया गया। राहत की बात यह रही कि इस पूरी घटना में किसी भी छात्रा, कर्मचारी या अधिकारी को किसी प्रकार की शारीरिक चोट नहीं आई।
देर रात अचानक परिसर में पहुंचे हाथी

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, शनिवार देर रात जंगल की दिशा से आए दो जंगली हाथी सीधे छात्रावास परिसर में प्रवेश कर गए। हाथियों की मौजूदगी का पता चलते ही छात्रावास में रहने वाली छात्राओं और कर्मचारियों में भय का माहौल बन गया। रात के सन्नाटे में हाथियों की आवाज और उनके उत्पात से परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
बताया जा रहा है कि हाथियों ने परिसर की बाउंड्री वॉल को करीब पांच अलग-अलग स्थानों से क्षतिग्रस्त कर दिया। इसके अलावा उन्होंने गार्ड रूम के दरवाजे और खिड़कियों को भी तोड़ दिया। परिसर में नुकसान पहुंचाने के बाद दोनों हाथी कुछ समय तक वहीं घूमते रहे, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई।
प्रशासन ने दिखाई तत्परता, छात्राओं को सुरक्षित निकाला
घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम तत्काल मौके पर पहुंच गई। अधिकारियों ने स्थिति का आकलन करने के बाद सबसे पहले छात्राओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी।
रात में ही सभी 58 छात्राओं को सुरक्षित तरीके से दूसरे छात्रावास में शिफ्ट किया गया। प्रशासन ने इस पूरी प्रक्रिया को बेहद सावधानी के साथ अंजाम दिया ताकि किसी भी छात्रा को कोई नुकसान न पहुंचे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अधिकारियों और कर्मचारियों ने पूरी रात मौके पर डटे रहकर छात्राओं का मनोबल बनाए रखा और उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वन विभाग ने की घेराबंदी, हाथियों की गतिविधियों पर रखी नजर
घटना के बाद वन विभाग की टीम ने तत्काल इलाके की घेराबंदी कर दी। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि दोनों हाथी छात्रावास परिसर से निकलकर आसपास की आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश न कर सकें।
वन अमले ने पूरी रात हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी रखी। साथ ही स्थानीय ग्रामीणों को भी सतर्क रहने और हाथियों के पास न जाने की सलाह दी गई। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की।
बड़ा हादसा टला, लेकिन बढ़ी चिंता
हालांकि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन जिस तरह हाथी छात्रावास परिसर तक पहुंच गए, उसने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते प्रशासन सक्रिय नहीं होता तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश के मौसम में जंगलों में भोजन और आवागमन के मार्ग बदलने के कारण हाथियों का रिहायशी इलाकों की ओर रुख करना बढ़ जाता है। यही कारण है कि वन क्षेत्रों से लगे गांवों और संस्थानों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है।
मरवाही क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही बनी चुनौती

मरवाही और आसपास के वन क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों से जंगली हाथियों की सक्रियता लगातार बढ़ी है। कई बार हाथियों के दल गांवों में प्रवेश कर फसलों, मकानों और अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचा चुके हैं। वन विभाग लगातार निगरानी और अलर्ट व्यवस्था पर काम कर रहा है, लेकिन हाथियों की अनिश्चित गतिविधियों के कारण चुनौती बनी रहती है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वन क्षेत्र से लगे स्कूल, छात्रावास और गांवों के आसपास सुरक्षा उपायों को और मजबूत किए जाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
छात्राओं और अभिभावकों में चिंता
घटना की सूचना मिलते ही छात्राओं के अभिभावकों में भी चिंता बढ़ गई। हालांकि प्रशासन द्वारा सभी छात्राओं को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की सूचना मिलने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली। कई अभिभावकों ने प्रशासन और वन विभाग की त्वरित कार्रवाई की सराहना की, वहीं भविष्य में छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग भी उठाई।
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी
घटना के बाद प्रशासन और वन विभाग ने छात्रावास परिसर का निरीक्षण किया। क्षतिग्रस्त बाउंड्री वॉल और अन्य हिस्सों की मरम्मत कराए जाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। साथ ही वन क्षेत्र से लगे संवेदनशील संस्थानों में अतिरिक्त निगरानी, रात्रिकालीन गश्त और सुरक्षा उपायों को मजबूत करने पर भी विचार किया जा रहा है।
फिलहाल वन विभाग की टीम हाथियों की लोकेशन पर लगातार नजर बनाए हुए है और स्थानीय लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रही है। प्रशासन का कहना है कि जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती, तब तक आवश्यक सुरक्षा इंतजाम जारी रहेंगे।
