राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और भगवान गणेश की प्रतिमा भेंट की। इससे पहले उन्होंने राज्यसभा में डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच कथित रेफरल कमीशन यानी ‘कट मनी’ का मुद्दा उठाते हुए मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ की चिंता जताई थी।
नई दिल्ली (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई मुलाकात को अपने लिए यादगार बताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री से मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा करते हुए कहा कि उन्हें पीएम मोदी से मिलने का अवसर मिला और इस दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत बातचीत हुई। राघव चड्ढा ने प्रधानमंत्री के समय और मार्गदर्शन के लिए आभार भी जताया।
साझा की गई तस्वीर में राघव चड्ढा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान गणेश की प्रतिमा भेंट करते हुए नजर आ रहे हैं। तस्वीर सामने आने के बाद यह मुलाकात चर्चा में आ गई है। अपने सोशल मीडिया पोस्ट में चड्ढा ने इस मुलाकात को ऐसी सुबह बताया, जिसे वह हमेशा याद रखेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ बातचीत को समृद्ध बताते हुए कहा कि उन्हें उनके अनुभव और मार्गदर्शन से सीखने का अवसर मिला।
राघव चड्ढा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब चड्ढा हाल के दिनों में स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे को संसद में उठाने को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। 6 अगस्त को राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान उन्होंने डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच कथित तौर पर चलने वाले ‘कट मनी’ या रेफरल कमीशन के मुद्दे पर गंभीर चिंता जताई थी।
डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच ‘रेफरल कमीशन’ का मुद्दा
राज्यसभा में अपने वक्तव्य के दौरान राघव चड्ढा ने दावा किया था कि कुछ डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच ऐसा अनौपचारिक तंत्र विकसित हो गया है, जिसमें मरीजों को जांच के लिए किसी विशेष सेंटर पर भेजने के बदले डॉक्टरों को कमीशन दिए जाने की व्यवस्था कथित तौर पर मौजूद है।
चड्ढा ने इसे केवल डॉक्टर और डायग्नोस्टिक सेंटर के बीच का मामला नहीं बताया, बल्कि इसके अंतिम आर्थिक प्रभाव को मरीजों से जोड़ते हुए चिंता जताई। उनका कहना था कि यदि किसी जांच के लिए मरीज को किसी खास डायग्नोस्टिक सेंटर पर भेजने के पीछे आर्थिक प्रोत्साहन काम करता है, तो उस व्यवस्था का बोझ आखिरकार मरीज के इलाज के खर्च पर पड़ सकता है।
उन्होंने सदन में यह भी आरोप लगाया था कि कुछ मामलों में मरीज को इलाज के लिए नहीं, बल्कि जांच के लिए रेफर किए जाने पर डॉक्टर को तय राशि तक का भुगतान किया जाता है। उनके मुताबिक इस कथित व्यवस्था में कमीशन रेट, एजेंट और समानांतर इंसेंटिव सिस्टम जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं।
चड्ढा ने दावा किया था कि कुछ डायग्नोस्टिक सेंटर इन भुगतानों को अपने खातों में ‘मार्केटिंग एक्सपेंस’ के रूप में दिखाते हैं, जबकि दूसरी तरफ डॉक्टरों के स्तर पर इसे ‘रेफरल कमीशन’ के रूप में दर्ज किए जाने की बात कही गई। हालांकि, ऐसे आरोपों को संबंधित संस्थानों या नियामक एजेंसियों की जांच और सत्यापन के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
मरीज के बिल पर पड़ सकता है आर्थिक असर
रेफरल कमीशन का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि स्वास्थ्य सेवाओं में मरीज आम तौर पर डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता देता है। जब डॉक्टर किसी विशेष जांच या डायग्नोस्टिक सेंटर की सलाह देते हैं, तो मरीज अक्सर यह मानकर वहां जांच करवाता है कि यही उसके इलाज के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प है।
ऐसे में यदि किसी जांच की सलाह के पीछे किसी तरह का वित्तीय हित जुड़ा हो, तो मरीज के लिए यह समझना मुश्किल हो सकता है कि उसे जांच वास्तव में चिकित्सकीय जरूरत के कारण सुझाई गई है या किसी अन्य कारण से।
राघव चड्ढा ने इसी पहलू पर चिंता जताते हुए कहा था कि कथित कमीशन की भरपाई अंततः मरीज से लिए जाने वाले बिल के माध्यम से हो सकती है। यदि किसी जांच की कीमत में अतिरिक्त राशि किसी तरह शामिल होती है, तो इसका सीधा असर उस व्यक्ति पर पड़ सकता है जो पहले से ही इलाज के खर्च का सामना कर रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता का सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि गंभीर बीमारी या आपात स्थिति में मरीज और उसके परिवार के पास अक्सर इलाज से जुड़े आर्थिक फैसले लेने के लिए सीमित समय होता है। ऐसी स्थिति में जांच की कीमत, उसकी जरूरत और उपलब्ध विकल्पों की स्पष्ट जानकारी मरीज के हित में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
‘कट मनी’ पर बहस क्यों महत्वपूर्ण है?
स्वास्थ्य क्षेत्र में डॉक्टर और डायग्नोस्टिक सेंटर के बीच संबंध सामान्य तौर पर मरीजों को बेहतर जांच सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से होने चाहिए। लेकिन यदि किसी मरीज को जांच के लिए रेफर करने के बदले आर्थिक लाभ लेने की व्यवस्था कहीं मौजूद है, तो इससे चिकित्सा व्यवस्था में भरोसे और पारदर्शिता से जुड़े सवाल खड़े हो सकते हैं।
यहां यह अंतर समझना भी जरूरी है कि हर डॉक्टर द्वारा किसी खास लैब या डायग्नोस्टिक सेंटर की सलाह देने का मतलब यह नहीं है कि वहां कोई कमीशन व्यवस्था चल रही है। कई बार डॉक्टर किसी सेंटर की रिपोर्ट की गुणवत्ता, उपलब्ध तकनीक, विशेषज्ञता या सुविधा के आधार पर भी मरीज को वहां भेज सकते हैं।
इसी वजह से किसी भी मामले में वास्तविक स्थिति तय करने के लिए ठोस दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित संस्थानों की जांच जरूरी होगी। राघव चड्ढा द्वारा संसद में उठाया गया मुद्दा इसी व्यापक बहस को सामने लाता है कि मरीजों को इलाज और जांच से जुड़ी जानकारी कितनी पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
प्रधानमंत्री से मुलाकात पर क्या कहा राघव चड्ढा ने?
इन मुद्दों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा की। तस्वीर में वह प्रधानमंत्री को भगवान गणेश की प्रतिमा भेंट करते दिखाई दिए।
चड्ढा ने मुलाकात को यादगार बताते हुए प्रधानमंत्री के साथ हुई बातचीत के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से मिलने का उन्हें सौभाग्य मिला और इस दौरान विस्तृत एवं समृद्ध बातचीत हुई। उन्होंने प्रधानमंत्री के बहुमूल्य समय और मार्गदर्शन के लिए भी धन्यवाद दिया।
हालांकि, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि प्रधानमंत्री और राघव चड्ढा के बीच हुई बातचीत में किन-किन विषयों पर चर्चा हुई। इसलिए मुलाकात को किसी विशेष राजनीतिक या नीतिगत फैसले से जोड़कर देखना फिलहाल उचित नहीं होगा।
