नई दिल्ली (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। साल 2027 के 2 अगस्त के दिन आसमान म एक अइसन खगोलीय घटना होय वाली हवय, जेनला देखे बर दुनिया भर के खगोल प्रेमी अउ विज्ञान म रुचि रखे वाले मन बेसब्री ले इंतजार करथें। ए दिन लगने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण 21वीं सदी के सबसे लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण मन म ले एक होही। ग्रहण के पूर्णता वाले इलाका म चंद्रमा कुछ समय बर सूर्य ला पूरी तरह ढक लेही, जेनसे दिन के उजाला अचानक कम होके अंधियारा जइसन माहौल बन जाही।
वैज्ञानिक गणना के मुताबिक, ए पूर्ण सूर्य ग्रहण के अधिकतम अवधि करीब 6 मिनट 23 सेकंड तक हो सकथे। ए लंबा अवधि के कारण 2 अगस्त 2027 के सूर्य ग्रहण खगोलीय विज्ञान के नजर ले बेहद खास घटना माने जा रहिस। हालांकि, ए बात ला साफ समझना जरूरी हवय कि पूर्ण सूर्य ग्रहण के पूरा नजारा हर जगह ले नइ दिखही। जिहां चंद्रमा सूर्य ला पूरी तरह ढकही, ओ जगह म पूर्ण ग्रहण दिखही, जबकि भारत जइसन देश के बड़े हिस्सा म ए घटना आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप म नजर आही।
जब दिन म कुछ पल बर छा जाही रात जइसन अंधियारा
पूर्ण सूर्य ग्रहण तब होथे, जब चंद्रमा पृथ्वी अउ सूर्य के बीच म आ जाथे अउ कुछ खास भौगोलिक इलाका ले देखे पर चंद्रमा सूर्य के पूरा डिस्क ला ढक लेथे। ए दौरान कुछ समय बर सूरज के तेज रोशनी रुक जाथे अउ आसमान म अंधियारा छा जाथे।
पूर्णता के दौरान सूर्य के चमकदार बाहरी वातावरण, जेनला कोरोना कहे जाथे, ला बिना सीधे सूर्य के तेज रोशनी के बाधा के देखे जा सकथे। ए दृश्य वैज्ञानिक मन बर खास महत्व रखथे, काबर सूर्य के कोरोना के अध्ययन ले सूर्य के बाहरी वातावरण अउ ओकर गतिविधि के बारे म महत्वपूर्ण जानकारी मिलथे।
ए समय आसपास के वातावरण म घलो बदलाव महसूस हो सकथे। तापमान म कुछ कमी आ सकथे अउ दिन के उजाला अचानक घटे के कारण वातावरण कुछ देर बर असामान्य रूप ले अंधियारा नजर आ सकथे। हालांकि, ए अनुभव हर जगह एक जइसन नइ होही अउ ग्रहण के असर स्थानीय मौसम अउ स्थान ऊपर निर्भर करही।
कहां-कहां दिखही पूर्ण सूर्य ग्रहण?
2 अगस्त 2027 के पूर्ण सूर्य ग्रहण के पूर्णता वाला पथ अटलांटिक महासागर ले आगे बढ़त दक्षिणी यूरोप अउ उत्तरी अफ्रीका के कुछ हिस्सा ले होके पश्चिम एशिया अउ अफ्रीका के कुछ क्षेत्र तक जाही। NASA के ग्रहण संबंधी गणना के मुताबिक, पूर्ण ग्रहण के पथ म स्पेन, जिब्राल्टर, मोरक्को, अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, लीबिया, मिस्र, सऊदी अरब, यमन अउ सोमालिया के कुछ क्षेत्र शामिल रहिहीं।
ए क्षेत्र मन म जेन जगह पूर्णता के पथ के बीच म रहिहीं, उहां चंद्रमा सूर्य ला पूरी तरह ढकते नजर आही। ग्रहण के सबसे लंबा पूर्ण चरण के अवधि करीब 6 मिनट 23 सेकंड तक पहुंच सकथे। NASA के गणना म सबसे लंबा पूर्णता अवधि के स्थान लगभग 6 मिनट 23.2 सेकंड बताय गे हवय।
इही कारण ले दुनिया भर के खगोल वैज्ञानिक अउ ग्रहण प्रेमी मन ए घटना ला खास महत्व देथें। पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान वैज्ञानिक अवलोकन के साथे आम लोग बर घलो ए एक दुर्लभ प्राकृतिक दृश्य होथे।
भारत म पूर्ण नइ, आंशिक सूर्य ग्रहण दिखही
भारत के लोगन बर ए खबर म सबसे जरूरी बात ये हवय कि 2 अगस्त 2027 के भारत म पूर्ण सूर्य ग्रहण नइ दिखही। देश के अलग-अलग हिस्सा म चंद्रमा सूर्य के कुछ हिस्सा ला ढकते नजर आही, मतलब भारत म ए घटना आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप म दिखाई देही।
भारत म ग्रहण के समय अउ सूर्य के ढके गे हिस्सा म जगह के हिसाब ले अंतर रहिही। उदाहरण के तौर पर नई दिल्ली म आंशिक ग्रहण करीब 3 बजके 52 मिनट ले शुरू होके 5 बजके 3 मिनट तक चल सकथे। वहीं मध्य प्रदेश के भोपाल म ग्रहण करीब 3 बजके 54 मिनट ले शुरू होके 5 बजके 18 मिनट तक रह सकथे।
छत्तीसगढ़ म घलो ए सूर्य ग्रहण आंशिक रूप म देखे जा सकथे। उपलब्ध खगोलीय गणना के मुताबिक, राज्य म ग्रहण के शुरुआत करीब शाम 4 बजे के आसपास हो सकथे अउ अलग-अलग स्थान के हिसाब ले एकर समाप्ति के समय म अंतर रह सकथे। ए कारण ले अपन शहर या जिला के सही समय बर स्थानीय खगोलीय गणना ला देखना बेहतर होही।
आखिर काबर खास हवय 2027 के सूर्य ग्रहण?
2027 के पूर्ण सूर्य ग्रहण के सबसे खास बात एकर लंबा पूर्णता अवधि आय। पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य ला पूरी तरह ढकथे, फेर ए स्थिति कुछ मिनट ले जियादा समय तक बने रहना दुर्लभ होथे। ए ग्रहण के अधिकतम पूर्णता अवधि करीब 6 मिनट 23 सेकंड बताय गे हवय, जेनला 21वीं सदी के उल्लेखनीय लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण मन म गिने जाथे।
ग्रहण के लंबाई के पीछे सूर्य, चंद्रमा अउ पृथ्वी के आपसी स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाथे। चंद्रमा जब पृथ्वी के अपेक्षाकृत नजदीक रहिथे, त आकाश म ओकर दिखाई देय वाला आकार कुछ बड़े नजर आथे। इही तरह सूर्य अउ पृथ्वी के दूरी म बदलाव के कारण सूर्य के दिखाई देय वाला आकार म घलो थोड़ा अंतर आथे। जब ए स्थिति अइसन बनथे कि चंद्रमा सूर्य ला पूरी तरह ढक पाथे, त पूर्ण ग्रहण के अवधि लंबा हो सकथे।
