मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने वन महोत्सव-2026 के तहत नया रायपुर में ‘पीपल फॉर पीपुल’ अभियान की शुरुआत की। अपनी मां के नाम पीपल का पौधा लगाकर उन्होंने प्रदेशवासियों से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से जुड़ने और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।
रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए प्रदेशवासियों से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से जुड़ने का आह्वान किया है। वन महोत्सव-2026 के शुभारंभ अवसर पर नया रायपुर में आयोजित वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने अपनी माता के नाम पर पीपल का पौधा लगाकर ‘पीपल फॉर पीपुल’ अभियान की शुरुआत की। इस अभियान के तहत लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में 2500 से अधिक पीपल के पौधों का रोपण किया गया, जो राज्य में हरित विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। यदि हर व्यक्ति अपनी मां के नाम एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल का संकल्प ले, तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ हरियाली की नई मिसाल बन सकता है।
मां के सम्मान से जुड़ा पर्यावरण संरक्षण का संदेश

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में मां और प्रकृति दोनों को जीवनदायिनी माना गया है। जिस प्रकार मां जीवन देती है, उसी प्रकार वृक्ष पूरी मानवता को जीवन प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान इसी भावना का विस्तार है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण को मातृ सम्मान से जोड़कर जनभागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी मां के नाम पौधा लगाता है, तो उसके प्रति भावनात्मक जुड़ाव भी बढ़ता है। यही जुड़ाव पौधे के संरक्षण और संवर्धन को सुनिश्चित करता है।
पीपल फॉर पीपुल अभियान की हुई शुरुआत

वन महोत्सव-2026 के दौरान मुख्यमंत्री ने पीपल फॉर पीपुल अभियान की शुरुआत करते हुए स्वयं पीपल का पौधा लगाया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, वन विभाग के कर्मचारियों, सामाजिक संगठनों, विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों ने भी पौधारोपण किया।
कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग 2500 से अधिक पीपल के पौधे लगाए गए। यह वृक्षारोपण लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में किया गया, जिससे आने वाले समय में यह क्षेत्र हरित पट्टी के रूप में विकसित होगा।
पीपल का धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय परंपरा में पीपल के वृक्ष को अत्यंत पवित्र माना गया है। धार्मिक दृष्टि से इसका विशेष महत्व है, वहीं वैज्ञानिक रूप से भी यह पर्यावरण के लिए बेहद उपयोगी वृक्षों में शामिल है।
उन्होंने बताया कि पीपल जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी घनी छाया, लंबी आयु और विभिन्न पक्षियों एवं जीव-जंतुओं के लिए सुरक्षित आश्रय इसे प्रकृति का अनमोल उपहार बनाते हैं।
पीपल का वृक्ष वायु की गुणवत्ता सुधारने, तापमान नियंत्रित करने तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। यही कारण है कि राज्य सरकार ने इस वर्ष पीपल के अधिकाधिक पौधे लगाने का विशेष अभियान शुरू किया है।
प्रधानमंत्री के आह्वान से जनआंदोलन बना अभियान
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2024 से प्रारंभ हुआ ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान आज पूरे देश में जनआंदोलन का रूप ले चुका है।
उन्होंने कहा कि इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पर्यावरण संरक्षण को भावनात्मक रूप से समाज से जोड़ा गया है। जब लोग अपनी मां के सम्मान में पौधा लगाते हैं तो उसके संरक्षण की जिम्मेदारी भी स्वयं उठाते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने भी इस अभियान में उल्लेखनीय योगदान दिया है और लाखों लोगों ने उत्साहपूर्वक इसमें भागीदारी निभाई है।
दो वर्षों में 7 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों के दौरान छत्तीसगढ़ में 7 करोड़ से अधिक पौधों का रोपण किया जा चुका है। वहीं वर्ष 2026 के लिए राज्य सरकार ने ढाई करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
उन्होंने कहा कि यह केवल आंकड़ों का विषय नहीं है, बल्कि प्रदेश की जलवायु, वन संपदा और भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक दीर्घकालिक निवेश है।
सरकार का प्रयास है कि वृक्षारोपण को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रखकर इसे जनसहभागिता का अभियान बनाया जाए, ताकि हर गांव, हर शहर और हर परिवार इस हरित क्रांति का हिस्सा बने।
पौधे लगाने के साथ उनका संरक्षण भी जरूरी
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट कहा कि केवल पौधे लगा देना पर्याप्त नहीं है। यदि उनकी नियमित देखभाल नहीं होगी तो वृक्षारोपण का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।
उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने घरों, खेतों की मेड़, विद्यालयों, महाविद्यालयों, कार्यालयों, पंचायत परिसरों, सार्वजनिक स्थलों तथा आसपास उपलब्ध खाली भूमि पर पौधे लगाएं और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी निभाएं।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक यदि अपने लगाए हुए पौधे को वृक्ष बनने तक संरक्षित रखे तो आने वाले वर्षों में पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य स्वतः पूरा हो जाएगा।
जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने का प्रभावी माध्यम
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान और प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। इन परिस्थितियों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और हरित क्षेत्र का विस्तार सबसे प्रभावी समाधान है।
उन्होंने कहा कि वृक्ष न केवल कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं, बल्कि वर्षा चक्र को संतुलित रखने, भूजल स्तर बढ़ाने, मिट्टी के संरक्षण और जैव विविधता को सुरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जनभागीदारी से सफल होगा हरित छत्तीसगढ़ का संकल्प
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस अभियान को व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में अपनाएं। प्रत्येक परिवार कम से कम एक पौधा अपनी मां के नाम अवश्य लगाए और उसके संरक्षण का संकल्प भी ले।
उन्होंने कहा कि जब समाज और सरकार मिलकर प्रकृति संरक्षण के लिए कार्य करेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, हरियाली और स्वस्थ पर्यावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा।
वन महोत्सव-2026 के दौरान शुरू हुआ यह अभियान केवल पौधारोपण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और भावनात्मक जुड़ाव का ऐसा संदेश है जो पर्यावरण संरक्षण को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास करता है।
