बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग ने रेंज स्तरीय समीक्षा बैठक में न्यायालयीन समन-वारंट की तामिली, ई-समन, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, ई-साक्ष्य और लंबित मामलों के त्वरित निराक
बिलासपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। बिलासपुर रेंज में पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) राम गोपाल गर्ग ने बुधवार को रेंज स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में बिलासपुर रेंज के अंतर्गत आने वाले सभी जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) एवं पुलिस अधीक्षकों (एसपी) ने भाग लिया।
रेंज स्तरीय पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रियाओं में तेजी लाना, डिजिटल पुलिसिंग को मजबूत करना तथा लंबित मामलों के समयबद्ध निराकरण को सुनिश्चित करना रहा। बैठक के दौरान आईजी ने पुलिस अधिकारियों को कई प्रशासनिक एवं तकनीकी दिशा-निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग ही बेहतर पुलिसिंग की पहचान है।
डिजिटल पुलिसिंग को मिलेगी नई गति
बैठक के दौरान आईजी राम गोपाल गर्ग ने कहा कि बदलते समय के साथ पुलिस व्यवस्था में भी तकनीकी संसाधनों का अधिकतम उपयोग आवश्यक हो गया है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि न्यायालयीन प्रक्रियाओं में अनावश्यक विलंब को समाप्त करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग किया जाए।
उन्होंने विशेष रूप से ई-समन (e-Summons), वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आधारित न्यायिक प्रक्रिया (न्याय श्रुति) तथा ई-साक्ष्य (Digital Evidence Collection) जैसे मॉड्यूल पर गंभीरता से कार्य करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि इन व्यवस्थाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से न केवल पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ेगी बल्कि न्यायिक प्रक्रिया भी अधिक तेज और पारदर्शी बनेगी।
समन और वारंट की तामिली पर विशेष जोर
बैठक में न्यायालयों से जारी होने वाले समन एवं वारंट की समयबद्ध तामिली की भी विस्तार से समीक्षा की गई। आईजी ने अधिकारियों से कहा कि न्यायालयीन आदेशों के पालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने निर्देश दिए कि सभी जिलों में समन एवं वारंट की तामिली की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा लंबित प्रकरणों की सूची तैयार कर उनका प्राथमिकता के आधार पर निराकरण सुनिश्चित किया जाए। इससे न्यायालयों में लंबित मामलों के निपटारे की गति भी तेज होगी।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी न्यायिक प्रक्रिया आसान
समीक्षा बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालयीन कार्यवाही को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी चर्चा की गई। आईजी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन मामलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध है, वहां उसका अधिकतम उपयोग किया जाए।
उन्होंने कहा कि इससे पुलिस बल का समय बचेगा, सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होगी तथा आरोपियों और गवाहों की पेशी प्रक्रिया अधिक सुगम बन सकेगी। इसके साथ ही न्यायालयों के कार्यभार को भी व्यवस्थित करने में सहायता मिलेगी।
ई-साक्ष्य के वैज्ञानिक संकलन पर दिए निर्देश
बैठक के दौरान डिजिटल साक्ष्यों के संग्रहण और संरक्षण को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। आईजी ने कहा कि आज अधिकांश अपराधों में मोबाइल, सीसीटीवी फुटेज, सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और डिजिटल रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में सामने आते हैं।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ई-साक्ष्य के संग्रहण, संरक्षण और प्रस्तुतिकरण की प्रक्रिया निर्धारित मानकों के अनुरूप हो ताकि न्यायालय में साक्ष्य की विश्वसनीयता बनी रहे और अभियोजन पक्ष मजबूत हो।
पारदर्शी और जवाबदेह पुलिसिंग पर बल

आईजी राम गोपाल गर्ग ने बैठक में कहा कि पुलिस विभाग का उद्देश्य केवल अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई करना ही नहीं बल्कि जनता का विश्वास भी मजबूत करना है। इसके लिए प्रत्येक अधिकारी को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी ईमानदारी, संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ करना होगा।
उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग केवल सुविधा के लिए नहीं बल्कि जवाबदेही बढ़ाने का भी प्रभावी माध्यम है। प्रत्येक जिले में डिजिटल मॉड्यूल की नियमित समीक्षा की जाए ताकि किसी प्रकार की कमी समय रहते दूर की जा सके।
टीम भावना से कार्य करने का आह्वान

समीक्षा बैठक के दौरान आईजी ने सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों एवं पुलिस अधीक्षकों से टीम भावना के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पुलिसिंग केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं बल्कि सामूहिक प्रयास का परिणाम होती है।
उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक मॉड्यूल में शत-प्रतिशत गुणवत्ता, शुद्धता एवं समयबद्धता सुनिश्चित की जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही या विलंब से विभाग की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है, इसलिए सभी अधिकारी नियमित निगरानी रखें।
लंबित मामलों के त्वरित निराकरण की रणनीति
बैठक में विभिन्न जिलों में लंबित मामलों की स्थिति की समीक्षा भी की गई। आईजी ने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक जिले में लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा कर प्राथमिकता के आधार पर उनका निराकरण किया जाए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि थानों में अनावश्यक पेंडेंसी कम करना विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए तकनीकी संसाधनों का बेहतर उपयोग और प्रभावी मॉनिटरिंग आवश्यक होगी।
प्रशासनिक एवं सुरक्षा व्यवस्था पर भी हुई चर्चा
समीक्षा बैठक के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था, सुरक्षा संबंधी तैयारियों तथा विभिन्न अभियानों की प्रगति पर भी चर्चा की गई। आईजी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ पुलिसिंग के प्रत्येक क्षेत्र में गुणवत्ता और अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने कहा कि जनता को समय पर न्याय दिलाने में पुलिस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसके लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर समन्वय तथा प्रभावी नेतृत्व आवश्यक है।
अधिकारियों को दिए गए स्पष्ट निर्देश
बैठक के समापन पर आईजी राम गोपाल गर्ग ने सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों एवं पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया कि समीक्षा बैठक में दिए गए सभी दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में इन व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा की जाएगी और प्रगति के आधार पर मूल्यांकन भी किया जाएगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि तकनीकी माध्यमों के अधिकाधिक उपयोग से पुलिसिंग की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा, न्यायिक प्रक्रियाएं अधिक प्रभावी बनेंगी तथा थानों में लंबित मामलों की संख्या में कमी आएगी। इससे आम नागरिकों को बेहतर और त्वरित पुलिस सेवाएं उपलब्ध कराने के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।
