बस्तर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। बस्तर के घना जंगल, सरल-सहज जनजीवन, अनूठी सामाजिक व्यवस्था अउ सदियों पुराना जनजातीय विरासत के पहचान अब देश के सर्वोच्च संवैधानिक मंच राष्ट्रपति भवन तक पहुंच गे हे। बस्तर के माटी म बसे लोककला, परंपरा अउ संस्कृति के राष्ट्रीय स्तर म सम्मान मिलना न केवल बस्तर, बल्कि पूरा छत्तीसगढ़ बर गर्व के बात आय।
नारायणपुर जिला के पारंपरिक मांझी-चालकी अउ ‘बस्तर पंडुम’ प्रतियोगिता के विजेता मन के एक विशेष प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली पहुंचिस, जिहां प्रतिनिधिमंडल के सदस्य मन देश के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ले सौजन्य भेंट करिन। ए खास मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल बस्तर के जीवंत जनजातीय परंपरा, लोककला, पारंपरिक आभूषण अउ सदियों पुराना सामाजिक व्यवस्था के बारे म राष्ट्रपति ल जानकारी दिस।
ये मुलाकात बस्तर के सांस्कृतिक इतिहास बर एक यादगार पल बन गे। राष्ट्रपति भवन जइसन देश के सर्वोच्च मंच म बस्तर के पारंपरिक संस्कृति के प्रतिनिधित्व होए ले बस्तर के लोकजीवन अउ जनजातीय विरासत ल राष्ट्रीय पहचान मिले के रद्दा अउ मजबूत होइस।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व म प्रतिनिधिमंडल पहुंचिस राष्ट्रपति भवन
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ल बस्तर के समृद्ध सांस्कृतिक पहचान ले रूबरू कराए बर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व म प्रतिनिधिमंडल 30 जुलाई 2026 ल राष्ट्रपति भवन पहुंचिस। प्रतिनिधिमंडल म बस्तर पंडुम के विजेता, पारंपरिक मांझी-चालकी अउ पद्मश्री सम्मानित कलाकार शामिल रहिन।
प्रतिनिधिमंडल के ये यात्रा सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नइ रहिस, बल्कि ये बस्तर के माटी, संस्कृति अउ परंपरा के राष्ट्रीय मंच म सम्मान के एक महत्वपूर्ण अवसर रहिस। राष्ट्रपति भवन म बस्तर के प्रतिनिधि मन अपन पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था अउ सांस्कृतिक विरासत के बारे म जानकारी साझा करिन।
ये पल खासतौर ले नारायणपुर जिला अउ समूचा बस्तर संभाग बर गर्व के रहिस। बस्तर के जनजातीय संस्कृति के वो पहलू, जेन ल पीढ़ी-दर-पीढ़ी सहेज के रखे गे हे, ओकर परिचय देश के सर्वोच्च मंच म होइस।
27 जुलाई ल नारायणपुर ले शुरू होइस दिल्ली यात्रा
प्रतिनिधिमंडल के दिल्ली यात्रा के शुरुआत 27 जुलाई 2026 ल नारायणपुर ले होइस। नगरपालिका अध्यक्ष इंद्रप्रसाद बघेल ह हरी झंडी दिखाके प्रतिनिधिमंडल ल नई दिल्ली बर रवाना करिन।
प्रतिनिधिमंडल के रवाना होवत समय नारायणपुर जिला म उत्साह अउ गर्व के माहौल रहिस। जिला के लोगन बर ये अवसर खास रहिस, काबर कि बस्तर के पारंपरिक मांझी-चालकी व्यवस्था अउ बस्तर पंडुम के विजेता मन ल देश के राष्ट्रपति ले भेंट करे के मौका मिलत रहिस।
27 जुलाई ले शुरू होके 30 जुलाई ल राष्ट्रपति भवन तक पहुंचे ये यात्रा बस्तर के सांस्कृतिक पहचान ल राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाए के एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होइस। प्रतिनिधिमंडल म शामिल सदस्य मन अपन साथ बस्तर के वो संस्कृति ल लेके दिल्ली पहुंचिन, जेन म जंगल, जल, जमीन अउ समुदाय के साथ गहिरा जुड़ाव देखे बर मिलथे।
बस्तर पंडुम के विजेता मन करिन पारंपरिक आभूषण के जानकारी साझा
राष्ट्रपति भवन म आयोजित मुलाकात के दौरान बस्तर पंडुम के विजेता मन घलो अपन कला अउ हुनर के प्रतिनिधित्व करिन। जनजातीय आभूषण विधा म विजेता मुंगड़ी कोर्राम अउ सुदनी दुग्गा ह बस्तर के पारंपरिक आभूषण के बारे म जानकारी साझा करिन।
बस्तर के जनजातीय समाज म आभूषण केवल सजावट के साधन नइ होवय, बल्कि ओकर संबंध समाज के परंपरा, पहचान अउ सांस्कृतिक जीवन ले घलो जुड़े रहिथे। अलग-अलग अवसर, उत्सव अउ सामाजिक परंपरा म पहिरे जाने वाले पारंपरिक आभूषण बस्तर के लोकजीवन के एक महत्वपूर्ण हिस्सा हें।
मुंगड़ी कोर्राम अउ सुदनी दुग्गा ह पारंपरिक आभूषण के सुंदरता के साथ-साथ ओकर सांस्कृतिक महत्व के बारे म जानकारी देके बस्तर के समृद्ध कला परंपरा ल राष्ट्रपति के सामने प्रस्तुत करिन।
मांझी-चालकी मन बताइन बस्तर के पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था
बस्तर के पहचान म ओकर पारंपरिक सामाजिक अउ स्वशासन व्यवस्था के विशेष महत्व हे। राष्ट्रपति भवन म पहुंचे प्रतिनिधिमंडल म बस्तर के अलग-अलग परगना के मांझी अउ चालकी मन घलो शामिल रहिन।
प्रतिनिधिमंडल म एड़का परगना के मांझी राजाराम, करंगाल परगना के मांझी सुधवाराम करंगा, गोटाली परगना के मांझी मंगतू राम ध्रुव, नूरदेश परगना के मांझी गुड्डू पोटाई अउ करंगाल परगना के चालकी सोमारू राम शामिल रहिन।
मांझी-चालकी बस्तर के पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण अंग माने जाथें। ये व्यवस्था गांव अउ समुदाय के सामाजिक जीवन, परंपरा, रीति-रिवाज अउ सामुदायिक निर्णय प्रक्रिया ले जुड़े रहिथे।
राष्ट्रपति भवन म मांझी-चालकी प्रतिनिधिमंडल ह बस्तर के पारंपरिक सामाजिक संरचना अउ रीति-रिवाज के बारे म जानकारी साझा करिन। ये अवसर बस्तर के उस अनूठा सामाजिक व्यवस्था ल देश के सर्वोच्च संवैधानिक मंच तक पहुंचाए के दृष्टि ले बेहद महत्वपूर्ण रहिस।
बस्तर के सांस्कृतिक विरासत ल मिलिस राष्ट्रीय पहचान
राष्ट्रपति भवन म बस्तर के प्रतिनिधिमंडल के मुलाकात ले नारायणपुर जिला के साथ-साथ पूरा बस्तर संभाग म खुशी अउ गर्व के माहौल हे। बस्तर के जनजातीय संस्कृति हमेशा ले अपन विशिष्ट पहचान बर देश-दुनिया म जाने जाथे, फेर राष्ट्रपति भवन जइसन राष्ट्रीय मंच म बस्तर के पारंपरिक संस्कृति के प्रतिनिधित्व होए ले ओकर महत्व अउ बढ़ गे हे।
विशेषज्ञ मन के मानना हे कि जब पारंपरिक कला, लोकसंस्कृति अउ जनजातीय परंपरा ल राष्ट्रीय स्तर के मंच मिलथे, त ओकर संरक्षण अउ संवर्धन के काम ल नई दिशा मिलथे। आज के समय म तेजी ले बदलत सामाजिक जीवन के बीच कई पारंपरिक कला अउ लोक परंपरा धीरे-धीरे सीमित होवत जावत हें। ऐसे म बस्तर पंडुम जइसन आयोजन अउ मांझी-चालकी जइसन पारंपरिक व्यवस्था के राष्ट्रीय स्तर म सम्मान मिलना नई पीढ़ी ल अपन जड़ अउ संस्कृति ले जुड़े रहे बर प्रेरित कर सकथे।
