सारंगढ़-बिलाईगढ़ में बिना मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस संचालित सहयोग ब्लड सेंटर पर CDSCO मुंबई और खाद्य एवं औषधि प्रशासन रायगढ़ की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई की। ब्लड कंपोनेंट निर्माण एवं विक्रय में अनियमितता मिलने पर सामग्री जब्त, मामले की विस्तृत जांच जारी। पढ़ें पूरी खबर।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) । छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। शिकायत मिलने के बाद सीडीएससीओ (CDSCO) मुंबई तथा खाद्य एवं औषधि प्रशासन रायगढ़ की संयुक्त जांच टीम ने बुधवार को सहयोग ब्लड सेंटर, सारंगढ़ में औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि ब्लड सेंटर आवश्यक मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस के बिना ही ब्लड कंपोनेंट का निर्माण और विक्रय कर रहा था। प्रारंभिक जांच में नियमों के उल्लंघन के संकेत मिलने पर टीम ने मौके पर उपलब्ध संबंधित सामग्री को तत्काल जब्त कर लिया और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी।
यह कार्रवाई स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ब्लड बैंक और ब्लड कंपोनेंट से जुड़ी सेवाएं सीधे मरीजों के जीवन से जुड़ी होती हैं, इसलिए इनके संचालन में किसी भी प्रकार की अनियमितता को गंभीरता से देखा जाता है।
शिकायत के आधार पर हुई संयुक्त कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, संबंधित विभाग को सहयोग ब्लड सेंटर के संचालन को लेकर शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि केंद्र में आवश्यक वैधानिक अनुमति के बिना ब्लड कंपोनेंट तैयार किए जा रहे हैं और उनका वितरण भी किया जा रहा है।
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए सीडीएससीओ मुंबई और खाद्य एवं औषधि प्रशासन रायगढ़ की संयुक्त टीम ने बिना पूर्व सूचना के केंद्र का निरीक्षण किया। जांच के दौरान अधिकारियों ने ब्लड सेंटर में उपलब्ध दस्तावेज, लाइसेंस, स्टॉक रजिस्टर, संचालन संबंधी रिकॉर्ड तथा अन्य अभिलेखों का बारीकी से परीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि केंद्र के पास ब्लड कंपोनेंट निर्माण के लिए आवश्यक निर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) लाइसेंस उपलब्ध नहीं था। इसके बावजूद संबंधित गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।
बिना लाइसेंस ब्लड कंपोनेंट निर्माण को माना गया गंभीर मामला
विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य रक्त संग्रहण और ब्लड कंपोनेंट निर्माण दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। ब्लड कंपोनेंट निर्माण के लिए विशेष तकनीकी सुविधाएं, प्रशिक्षित विशेषज्ञ, गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था और वैधानिक अनुमति अनिवार्य होती है।
यदि किसी संस्थान द्वारा निर्धारित मानकों और लाइसेंस के बिना ब्लड कंपोनेंट तैयार किए जाते हैं, तो इससे मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं। यही कारण है कि इस प्रकार के मामलों में नियामक एजेंसियां तत्काल हस्तक्षेप करती हैं।
अधिकारियों ने सामग्री की जब्ती की कार्रवाई की
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के सहायक औषधि नियंत्रक ने बताया कि जांच के दौरान प्राप्त तथ्यों के आधार पर संयुक्त टीम ने औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियमावली, 1945 के प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की।
निरीक्षण के दौरान उपलब्ध संबंधित सामग्री को नियमानुसार जब्त किया गया। इसके साथ ही विभिन्न दस्तावेजों और रिकॉर्ड को भी जांच के दायरे में लिया गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि केंद्र द्वारा कब से और किस स्तर तक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।
दस्तावेजों की भी हो रही गहन जांच
जांच टीम केवल मौके पर उपलब्ध सामग्री तक सीमित नहीं है। अधिकारियों द्वारा ब्लड सेंटर के संचालन से जुड़े रिकॉर्ड, लाइसेंस संबंधी दस्तावेज, अनुमति पत्र, स्टॉक विवरण, तकनीकी प्रक्रियाओं तथा अन्य प्रशासनिक अभिलेखों का भी परीक्षण किया जा रहा है।
यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि ब्लड कंपोनेंट का निर्माण और विक्रय बिना वैध अनुमति के किया गया, तो संबंधित प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा पूरा प्रकरण
खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद संपूर्ण प्रकरण आवश्यक दस्तावेजों, साक्ष्यों तथा जांच रिपोर्ट के साथ माननीय न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।
यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों अथवा संस्थान के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल विभाग ने किसी अंतिम निष्कर्ष की घोषणा नहीं की है और जांच पूरी होने तक सभी तथ्यों का परीक्षण किया जा रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं में नियामक व्यवस्था का महत्व
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लड बैंक और ब्लड कंपोनेंट से जुड़ी सेवाएं अत्यंत संवेदनशील होती हैं। दुर्घटना, ऑपरेशन, प्रसूति, कैंसर, थैलेसीमिया और अन्य गंभीर बीमारियों के उपचार में सुरक्षित रक्त और उसके घटकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
ऐसे में इन सेवाओं का संचालन केवल निर्धारित मानकों और वैधानिक अनुमति के साथ ही किया जाना चाहिए। समय-समय पर निरीक्षण और नियामकीय कार्रवाई का उद्देश्य किसी संस्थान को परेशान करना नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करना होता है।
प्रशासन ने जांच पूरी होने तक संयम बरतने की अपील की
अधिकारियों ने कहा है कि मामला जांच के अधीन है और सभी तथ्यों का परीक्षण किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसलिए किसी भी प्रकार के निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जाना चाहिए।
इस कार्रवाई के बाद जिले में स्वास्थ्य संस्थानों के संचालन और लाइसेंस संबंधी नियमों के पालन को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि भविष्य में अन्य संस्थानों का भी निरीक्षण किया जा सकता है ताकि सभी केंद्र निर्धारित कानूनी मानकों के अनुरूप संचालित हों।
