नारायणपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। घनघोर जंगल, लगातार होवत मूसलाधार बरसात, उफनत नाला अउ कीचड़ ले भर गे रास्ता… अइसने कठिन परिस्थिति मं जिहां सामान्य आदमी पहुंचना घलो मुश्किल हो जाथे, ओही जगह मं भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के 53वीं वाहिनी के जवान मन एक बार फेर साबित कर दिस कि वर्दी सिरिफ सुरक्षा के प्रतीक नइ, बल्कि मानवता अउ सेवा के घलो सबसे मजबूत पहचान आय।
नारायणपुर जिला के बेनूर क्षेत्र के अति-संवेदनशील अउ दुर्गम गांव धुरबेड़ा मं 22 बछर के गर्भवती महिला सुधी मंडावी ला अचानक तेज प्रसव पीड़ा सुरू होगे। लगातार बरसात के कारण गांव तक जाय वाला रद्दा पूरी तरह कीचड़ मं बदल गे रहिस। जगह-जगह नालामन उफान मं रहिन, जेनकर से एंबुलेंस के गांव तक पहुंचना असंभव होगे रहिस।
जइसेच ए बात के सूचना ITBP तक पहुंचिस, जवान मन एक पल के देरी नइ करिन अउ तुरंत राहत अभियान सुरू कर दीन।
सूचना मिलतेच सक्रिय होइस ITBP अउ पुलिस टीम
मिली जानकारी के मुताबिक, घटना के जानकारी मिलतेच ITBP 53वीं वाहिनी के सेनानी संजय कुमार के मार्गदर्शन मं तत्काल रेस्क्यू अभियान चलाय गे। कोडेनार अउ अडिंगपार ले ITBP अउ पुलिस के संयुक्त टीम ला धुरबेड़ा गांव बर रवाना करे गे।
जवान मन जानत रहिन कि मौसम खराब हवय, रद्दा पूरी तरह बंद हवय अउ हर कदम मं खतरा बने हवय। फेर घलो ओमन के प्राथमिकता एकेच रहिस—गर्भवती महिला ला समय रहते सुरक्षित अस्पताल पहुंचाना।
घना जंगल अउ उफनत नाला पार करत गांव पहुंचिन जवान
रेस्क्यू टीम ला गांव तक पहुंचई बर कई कठिन चुनौती के सामना करे ला परिस। लगातार बरसात के चलते जंगल के संकरा रास्ता फिसलनदार होगे रहिस। कई जगह पानी के तेज बहाव रहिस, त कई जगह कीचड़ मं पैर टिकाना मुश्किल होवत रहिस।
फेर घलो जवान मन हिम्मत नइ हारिन। जोखिम उठावत ओमन घना जंगल पार करिन, उफनत नाला लांघिन अउ आखिरकार धुरबेड़ा गांव पहुंचके सुधी मंडावी तक पहुंच गइन।
गांव पहुंचतेच जवान मन महिला के हालत देखिन अउ बिना समय गंवाए रेस्क्यू के अगला चरण सुरू करिन।
स्ट्रेचर मं कई किलोमीटर पैदल चलके बचाइन जान
गांव ले सड़क तक वाहन पहुंचना संभव नइ रहिस। अइसने हालत मं जवान मन गर्भवती महिला ला सावधानीपूर्वक स्ट्रेचर मं लिटाइन अउ बारी-बारी ले कई किलोमीटर तक कंधा मं उठाके पैदल चलिन।
बरसात लगातार होवत रहिस, रास्ता फिसलत रहिस, नाला मं पानी के बहाव तेज रहिस, फेर जवान मन के हौसला कमजोर नइ परिस। महिला के सुरक्षा ला ध्यान मं रखत हर कदम संभल-संभल के बढ़ाय गे।
घंटों के कठिन मेहनत के बाद रेस्क्यू टीम महिला ला मुख्य सड़क तक सुरक्षित ले आए।
फील्ड अस्पताल कुतुल के सहयोग ले पहुंचाइन अस्पताल
मुख्य सड़क पहुंचतेच कुतुल फील्ड अस्पताल के स्वास्थ्य टीम के सहयोग ले महिला ला तत्काल वाहन मं अस्पताल रवाना करे गे। समय रहते इलाज मिलगे के कारण महिला सुरक्षित चिकित्सा सुविधा तक पहुंच सकीस।
डॉक्टर मन के निगरानी मं महिला के उपचार सुरू करे गे। समय पर रेस्क्यू होए के कारण संभावित बड़ा खतरा टर गे।
ग्रामीण मन कहिन – संकट मं सबसे पहिली पहुंचथें जवान
धुरबेड़ा गांव के ग्रामीण मन ITBP अउ पुलिस टीम के काम के जमके सराहना करिन। ग्रामीण मन के कहना रहिस कि अइसने कठिन समय मं जिहां सामान्य सुविधा पहुंचना मुश्किल हो जाथे, ओही समय ITBP के जवान मन बिना अपन जान के चिंता करे गांव पहुंचथें।
ग्रामीण मन कहिन कि जवान सिरिफ सुरक्षा बल नइ हवंय, बल्कि संकट के घड़ी मं परिवार जइसने साथ निभाथें। ए रेस्क्यू अभियान ले गांव के लोगन मं सुरक्षा बल प्रति भरोसा अउ सम्मान अउ जियादा मजबूत होइस।
नक्सल प्रभावित इलाका मं मानवता के मिसाल
बेनूर अउ धुरबेड़ा इलाका नक्सल प्रभावित अउ बेहद संवेदनशील क्षेत्र माने जाथे। अइसने इलाका मं सुरक्षा अभियान चलावत-चलावत जरूरतमंद नागरिकमन के मदद करना आसान काम नइ होवय।
फेर ITBP के जवान मन बार-बार साबित करत हवंय कि सुरक्षा के संग-संग समाज सेवा घलो ओमन के जिम्मेदारी के महत्वपूर्ण हिस्सा आय। प्राकृतिक आपदा होवय, स्वास्थ्य संकट होवय या ग्रामीण सहायता—हर परिस्थिति मं जवान मन आगे बढ़के मदद करथें।
बरसात मं ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा अब घलो चुनौती
बस्तर संभाग के दूरस्थ इलाकामन मं हर बरसात के मौसम मं स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती बन जाथे। सड़क कट जाथे, पुलिया डूब जाथे अउ कई गांव बाहरी दुनिया ले घंटों या कई बेर दिनभर बर कट जाथें।
अइसने स्थिति मं सुरक्षा बल, स्वास्थ्य विभाग अउ स्थानीय प्रशासन के समन्वय ले चलत राहत अभियान ग्रामीणमन बर जीवनदान साबित होवत हवय। विशेषज्ञ मन घलो मानथें कि दुर्गम इलाकामन मं सड़क, पुल अउ आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधा के विस्तार अब घलो बहुत जरूरी हवय।
मानवता के असली पहचान
धुरबेड़ा गांव के ए घटना फेर एक बार बता दिस कि असली सेवा ओही आय जिहां बिना स्वार्थ के दूसर के जीवन बचाय बर हर कठिनाई के सामना करे जावय। ITBP 53वीं वाहिनी के जवान मन अपन कर्तव्य के संग मानवता के सर्वोच्च उदाहरण पेश करिन।
बरसात, जंगल अउ उफनत नालामन के बीच चलाय गे ए रेस्क्यू अभियान सिरिफ एक महिला के जान बचाय के कहानी नइ, बल्कि ए भरोसा के कहानी आय कि संकट के घड़ी मं देश के जवान हर परिस्थिति मं जनता के संग खड़े रहिथें। ए घटना न केवल नारायणपुर, बल्कि पूरा छत्तीसगढ़ बर गर्व के विषय आय।
