छत्तीसगढ़ सरकार समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करे के दिशा मं तेजी ले काम करत हे। डॉ. रंजना प्रकाश देसाई के अध्यक्षता मं गठित समिति के पहिली बैठक संपन्न होइस। जानव UCC का आय, का बदलही अऊ छत्तीसगढ़ के जनता ऊपर का असर पड़ सकथे।
रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ सरकार अब समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड – UCC) लागू करे के दिशा मं तेजी ले आगू बढ़त दिखत हे। सरकार के ओर ले गठित उच्चस्तरीय समिति के पहिली बैठक शुक्रवार के दिन मुख्य सचिव कार्यालय मं संपन्न होइस। करीब दू घंटा ले जियादा चले ये बैठक ला परिचयात्मक बैठक माने जावत हे, जिहां समिति के सदस्य मन UCC के प्रारूप, कानूनी पहलू अऊ आगे के कार्ययोजना ऊपर शुरुआती चर्चा करिन।

समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) डॉ. रंजना प्रकाश देसाई दिल्ली ले वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम ले बैठक मं जुड़िन। बैठक मं उत्तराखंड के पूर्व आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, सदस्य एम.के. राउत, अधिवक्ता मोहन पवार अऊ सदस्य ज्योति रानी सिंह उपस्थित रहिन। बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ के सामाजिक, सांस्कृतिक अऊ कानूनी परिस्थिति ला ध्यान मं रखके समान नागरिक संहिता के संभावित स्वरूप ऊपर शुरुआती विचार-विमर्श करे गीस।
छत्तीसगढ़ देश के पांचवां राज्य बन सकथे
अभी तक उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करे वाला पहिली राज्य बन चुके हे। ओकर बाद गुजरात, असम अऊ मध्य प्रदेश मं घलो UCC लागू करे के दिशा मं काम चलत हे। अब छत्तीसगढ़ सरकार घलो ये दिशा मं तेजी ले कदम बढ़ा दिस हे।
अगर समिति अपन रिपोर्ट देथे अऊ ओकर आधार ऊपर सरकार विधानसभा मं विधेयक लाके पारित करा लेथे, त छत्तीसगढ़ देश के पांचवां राज्य बन सकथे जिहां समान नागरिक संहिता लागू होही। एखर से राज्य के नागरिक कानून मं एकरूपता लाय के सरकार के मंशा साफ दिखत हे।
का होथे समान नागरिक संहिता (UCC)?

यूनिफॉर्म सिविल कोड, मतलब समान नागरिक संहिता, अइसन कानून आय जेन मं देश के सबो नागरिक बर एके समान नागरिक नियम लागू होथे, चाहे ओमन काकर धर्म, जाति या समुदाय ले संबंध रखत होवंय।
अभी भारत मं अलग-अलग धर्म के लोग मन बर विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेना, भरण-पोषण अऊ संपत्ति बंटवारा जइसन मामला मं अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू होथे। UCC लागू होय के बाद अइसन नागरिक मामला मं सबो नागरिक बर एक समान नियम लागू हो सकही।
सरकार के मानना हे कि एखर ले कानूनी प्रक्रिया आसान होही, न्याय मं एकरूपता आही अऊ महिला मन सहित सबो नागरिक मन ला समान अधिकार मिलही।
संविधान के अनुच्छेद-44 मं मिलथे आधार
समान नागरिक संहिता के अवधारणा भारत के संविधान के अनुच्छेद-44 ले जुड़ाय हवय। संविधान के नीति-निर्देशक तत्व मं उल्लेख हे कि राज्य ला प्रयास करना चाही कि देश मं सबो नागरिक बर समान नागरिक संहिता लागू होवय।
हालांकि ये बाध्यकारी प्रावधान नई आय, फेर संविधान निर्मातामन के सोच रहिस कि भविष्य मं नागरिक कानून मं समानता लाय जाए। अब अलग-अलग राज्य अपन परिस्थिति के हिसाब ले ये दिशा मं पहल करत हें।
पहिली बैठक मं का-का ऊपर होइस चर्चा?
समिति के पहिली बैठक मुख्य रूप ले परिचयात्मक रहिस। बैठक मं सदस्य मन अपन-अपन अनुभव साझा करिन अऊ आने वाला समय मं का तरीका ले सुझाव जुटाय जाही, समाज के अलग-अलग वर्ग ले राय ली जाही अऊ कानूनी पहलू मन के अध्ययन करे जाही, ए ऊपर चर्चा होइस।
समिति अब प्रदेश के विभिन्न सामाजिक संगठन, महिला समूह, कानूनी विशेषज्ञ, शिक्षाविद, धार्मिक प्रतिनिधि अऊ आम नागरिक मन ले सुझाव ले सकथे। ये सुझाव के आधार ऊपर UCC के प्रारूप तैयार करे के संभावना जताय जात हे।
सरकार के का तर्क हे?
राज्य सरकार के कहना हे कि समान नागरिक संहिता लागू होय ले नागरिक कानून मं एकरूपता आही। अलग-अलग व्यक्तिगत कानून के कारण होवत भ्रम कम होही अऊ न्यायिक प्रक्रिया जियादा सरल अऊ पारदर्शी बनही।
सरकार ए घलो मानथे कि महिला मन के अधिकार मजबूत होही, परिवारिक विवाद के समाधान मं एक समान प्रक्रिया बनही अऊ नागरिक मन ला समान कानूनी संरक्षण मिलही।
UCC ऊपर अलग-अलग राय घलो सामने आवत हे
जिहां एक ओर कई लोग समान नागरिक संहिता ला समान अधिकार अऊ आधुनिक कानून व्यवस्था के दिशा मं जरूरी कदम मानत हें, उहें दूसर ओर कुछ सामाजिक अऊ धार्मिक संगठन अपन परंपरा अऊ व्यक्तिगत कानून ऊपर असर पड़े के आशंका जतावत हें।
विशेषज्ञ मन के कहना हे कि अइसन कानून बनाय के पहिली समाज के सबो वर्ग ले व्यापक चर्चा जरूरी हे, ताकि कानून बनाय के प्रक्रिया मं सबके भागीदारी रहय अऊ भविष्य मं विवाद के संभावना कम होवय।
आगे का होही?
समिति अब अलग-अलग पक्ष मन ले सुझाव लेही, कानूनी अध्ययन करही अऊ छत्तीसगढ़ के परिस्थिति के अनुरूप अपन रिपोर्ट तैयार करही। रिपोर्ट सरकार ला सौंपे के बाद ओकर अध्ययन होही। अगर सरकार उचित समझही त विधानसभा मं विधेयक प्रस्तुत करे जाही।
विधेयक पारित होय के बाद राज्यपाल के मंजूरी मिलते ही समान नागरिक संहिता कानून के रूप मं लागू हो सकथे।
प्रदेश के नजर अब समिति के अगला कदम ऊपर
समान नागरिक संहिता देशभर मं लंबे समय ले चर्चा के विषय बने हवय। अब छत्तीसगढ़ मं घलो एखर प्रक्रिया औपचारिक रूप ले शुरू होगे हे। समिति के पहिली बैठक ले साफ संकेत मिलत हे कि सरकार ए विषय ला गंभीरता ले लेवत हे।
अब सबके नजर समिति के आगामी बैठक, जनसुनवाई अऊ अंतिम रिपोर्ट ऊपर टिकी रहिही। आने वाला समय मं साफ होही कि छत्तीसगढ़ मं UCC के स्वरूप का रहिही अऊ एखर असर प्रदेश के नागरिक मन ऊपर कइसने पड़ही।
