केंद्र सरकार के नई गाइडलाइन बाद अब हाथी मन ले खराब होए फसल घलो प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना मं शामिल होही। कोरबा सहित हाथी प्रभावित जिला के किसान मन ल मिलही राहत।
कोरबा (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। बरसात सुरू होतेच जंगल ले हाथी मन के दल गांव अऊ खेत-खार के लगे पहुंचना सुरू हो जाथे। ए समय मं किसान मन अपन धान सहित दूसर खरीफ फसल के रोपाई मं जुटे रहिथें, फेर हाथी मन के खेत मं घुसके फसल रौंद देय के घटना घलो लगातार सामने आवत रहिथे। हर साल हजारों किसान मन के महीना भर के मेहनत कुछ घंटा मं चौपट हो जाथे। ए समस्या ल देखते अब केंद्र सरकार किसान मन बर एक बड़े राहत के फैसला करे हवय।
अब तक हाथी मन ले खराब होए फसल बर किसान मन ल अलग-अलग विभाग मं मुआवजा बर आवेदन करना पड़त रहिस, फेर कई मामला मं राहत समय मं नइ मिलत रहिस। अब केंद्र सरकार के नई गाइडलाइन लागू होए के बाद जंगली हाथी मन ले नष्ट होए फसल घलो प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दायरा मं आ जाही। ए फैसला ले कोरबा सहित छत्तीसगढ़ के हाथी प्रभावित जिला मन के हजारों किसान मन ल सीधा फायदा मिलही।
हाथी ले नुकसान अब बीमा योजना मं घलो शामिल

केंद्र सरकार साफ कर दिस हवय कि जिहां जंगली हाथी मन के कारण फसल बर लगातार खतरा बने रहिथे, ओ जिला मन मं अब हाथी ले होए नुकसान के बीमा दावा घलो स्वीकार करे जाही। याने अब किसान मन सिरिफ प्राकृतिक आपदा जइसे अतिवृष्टि, सूखा, ओलावृष्टि या बाढ़ लेच नइ, बल्कि वन्यजीव मन के हमला ले खराब होए फसल के भरपाई घलो बीमा योजना के माध्यम ले पा सकहीं।
ए फैसला खासकर ओ किसान परिवार मन बर राहत ले कम नइ कहे जा सकय, जिहां हर साल हाथी मन के दल रातों-रात खेत मं घुसके पूरा फसल ल बर्बाद कर देथें।
कोरबा समेत हाथी प्रभावित इलाका के किसान मन ल मिलही सबसे जियादा फायदा
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला बरसों ले हाथी प्रभावित इलाका के रूप मं चिन्हांकित हवय। बरसात अऊ खरीफ सीजन मं जंगल ले निकले हाथी मन गांव-गांव घूमत खेत मं पहुंच जाथें। धान, मक्का अऊ दूसर फसल मन ल भारी नुकसान पहुंचथे।
सिरिफ कोरबा नइ, बल्कि रायगढ़, जशपुर, सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, धरमजयगढ़ इलाका सहित कई जिला मं हर साल हाथी मन के उत्पात देखे जाथे। ए नई व्यवस्था लागू होए के बाद ए सब इलाका के किसान मन ल बीमा के माध्यम ले आर्थिक राहत मिल सकेही।

बीमा के लाभ पाए बर का करना होही?
कृषि विभाग किसान मन ल समझाइस हवय कि बीमा के लाभ अपने-आप नइ मिलही। नुकसान होए के बाद तय प्रक्रिया के पालन करना जरूरी होही।
नई गाइडलाइन मुताबिक जइसनेच हाथी मन फसल ल नुकसान पहुंचाही, किसान ल 72 घंटा के भीतर ए घटना के जानकारी देना जरूरी होही।
जानकारी देय बर किसान मन ये माध्यम मन के उपयोग कर सकथें—
- कृषि विभाग के स्थानीय कार्यालय
- संबंधित बीमा कंपनी
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के टोल-फ्री नंबर
- अधिकृत मोबाइल एप
- ऑनलाइन पोर्टल
समय मं सूचना देना सबसे जरूरी बात आय। यदि किसान तय समय के भीतर जानकारी नइ देही, त बीमा दावा प्रभावित हो सकथे।
सर्वे के बाद सीधे बैंक खाता मं आही रकम
सूचना मिलतेच कृषि विभाग अऊ बीमा कंपनी के अधिकारी मन संयुक्त रूप ले नुकसान के सर्वे करहीं। खेत मं पहुंचके फसल के वास्तविक नुकसान के आंकलन करे जाही।
सर्वे रिपोर्ट तैयार होए के बाद पात्र किसान मन के दावा स्वीकृत करे जाही अऊ बीमा राशि सीधे किसान के बैंक खाता मं जमा कर दी जाही। ए व्यवस्था ले किसान मन ल अलग-अलग कार्यालय के चक्कर काटे के जरूरत घलो कम हो जाही।
खरीफ सीजन मं राहत के खबर
अभी पूरा छत्तीसगढ़ मं खरीफ सीजन के रोपाई तेजी ले चलत हवय। किसान मन धान के रोपा लगाय मं व्यस्त हवंय। ए समय मं बरसात बढ़तेच हाथी मन के गतिविधि घलो बढ़ जाथे।
कई गांव मं किसान मन रातभर खेत के रखवाली करथें, फेर झुंड मं आए हाथी मन के सामने काकरो बस नइ चलय। कई बेर पूरा खेत एके रात मं उजड़ जाथे।
ए हालत मं केंद्र सरकार के ए नई गाइडलाइन किसान मन बर बड़ा भरोसा लेके आए हवय। अब फसल चौपट होए के बाद कम से कम आर्थिक नुकसान के कुछ भरपाई बीमा योजना के माध्यम ले मिल सकही।
किसान मन बर जागरूक रहना घलो जरूरी
कृषि विशेषज्ञ मन के कहना हवय कि किसान मन अपन फसल के बीमा समय मं जरूर करावंय। साथे नुकसान होए के स्थिति मं बिना देरी सूचना देवंय।
खेत के फोटो, वीडियो अऊ घटना के जानकारी सुरक्षित रखे ले दावा प्रक्रिया मं आसानी होथे। जरूरत पड़ने मं स्थानीय कृषि अधिकारी अऊ ग्राम पंचायत के माध्यम ले घलो मदद ले सकथें।
खेती मं बढ़ही भरोसा, कम होही आर्थिक नुकसान
कृषि प्रधान छत्तीसगढ़ मं हजारों परिवार खेती ऊपर निर्भर हवंय। हाथी मन के कारण हर साल करोड़ों रुपिया के फसल नुकसान होथे। ए नुकसान ले किसान मन के आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाथे।
अब जंगली हाथी मन ले खराब होए फसल ल प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना मं शामिल करे के फैसला किसान मन बर राहत के नया रास्ता खोल दिस हवय। यदि किसान समय मं सूचना देहीं अऊ निर्धारित प्रक्रिया के पालन करहीं, त नुकसान के बाद आर्थिक सहायता मिलना आसान हो जाही।
कोरबा सहित हाथी प्रभावित पूरा इलाका के किसान मन अब उम्मीद करत हवंय कि ए नई व्यवस्था जमीन मं सही तरीका ले लागू होही अऊ बीमा दावा बिना अनावश्यक देरी के स्वीकृत होही। यदि ए व्यवस्था प्रभावी ढंग ले लागू होथे, त हर साल हाथी मन के उत्पात ले परेशान हजारों किसान परिवार मन ल निश्चित रूप ले बड़ा सहारा मिलही।
