पद्म विभूषण पंडवानी गायिका तीजन बाई का रायपुर एम्स में निधन। जानिए उनके जीवन, संघर्ष, उपलब्धियों, पद्म विभूषण सम्मान, पंडवानी कला और छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति में उनके अमूल्य योगदान की पूरी कहानी।
रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ के लोक संस्कृति ला देस अउ दुनिया भर मं नई पहचान देवइया, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पंडवानी गायिका अउ पद्म विभूषण सम्मान ले सम्मानित तीजन बाई अब हमन के बीच नइ रहिन। रविवार के बिहान करीब 3:15 बजे रायपुर के एम्स अस्पताल मं इलाज के दौरान उनकर निधन होगे। वो लंबे समय ले अस्वस्थ चलत रहिन अउ अस्पताल मं इलाजरत रहिन। उनकर निधन के खबर मिलतेच छत्तीसगढ़ सहित पूरा देस के कला, साहित्य अउ संस्कृति जगत मं शोक के लहर फैल गे।
तीजन बाई सिरिफ एक कलाकार नइ रहिन, बल्कि वो छत्तीसगढ़ के माटी, बोली, परंपरा अउ लोक संस्कृति के सबसे मजबूत पहचान रहिन। अपन आवाज, अद्भुत अभिनय अउ पंडवानी के जीवंत प्रस्तुति ले वो महाभारत के कथा ला एतका प्रभावशाली ढंग ले सुनावत रहिन कि सुनइया अपन आप ला कुरुक्षेत्र के मैदान मं महसूस करे लगथे।
साधारण परिवार ले निकलके दुनिया भर मं कमाइस पहचान
तीजन बाई के जनम 24 अप्रैल 1956 ला दुर्ग जिला के गनियारी गांव मं एक साधारण परिवार मं होय रहिस। बचपन लेच उनला महाभारत के कथा सुनना अउ गाना के गजब लगाव रहिस। गांव-घर के माहौल मं बड़े होवत-होवत वो पंडवानी कला ला अपन जीवन बना लिहिन।
जऊन समय मं महिलामन के मंच मं आके पंडवानी गाना आसान नइ रहिस, ओ समय तीजन बाई अपन हिम्मत, मेहनत अउ आत्मविश्वास के दम मं समाज के कई रूढ़ धारणामन ला तोड़िन। कठिन परिस्थिति के बावजूद वो अपन कला ले कभू समझौता नइ करिन अउ धीरे-धीरे अपन अलग पहचान बना लिहिन।
पंडवानी ला दुनिया के मंच तक पहुंचाइन
तीजन बाई के आवाज सिरिफ छत्तीसगढ़ तक सीमित नइ रहिस। वो भारत के अलग-अलग राज्य मन के संग-संग दुनिया के कई बड़े देसमन मं पंडवानी के प्रस्तुति देवत रहिन। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, रूस, ऑस्ट्रेलिया अउ जर्मनी जइसन कई देसमन मं उनकर कार्यक्रम होइस, जिहां लोगन मन छत्तीसगढ़ के लोक संस्कृति अउ पंडवानी कला के दीवाना होगे।
उनकर प्रस्तुति मं सिरिफ गायन नइ, बल्कि अभिनय, संवाद, भाव-भंगिमा अउ चरित्र चित्रण के अद्भुत संगम दिखत रहिस। एही कारण ले विदेशी मंच मं घलो उनकर खूब सराहना होइस अउ पंडवानी कला ला अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलिस।
छत्तीसगढ़ के संस्कृति के सबसे बड़े दूत रहिन तीजन बाई
छत्तीसगढ़ के लोक संस्कृति के जऊन सम्मान आज राष्ट्रीय अउ अंतरराष्ट्रीय स्तर मं मिलत हे, ओमा तीजन बाई के योगदान ला कभू भुलाय नइ जा सकय। वो जहां-जहां गइन, ओतके अपन माटी, बोली, परंपरा अउ लोक संस्कृति के गौरव ला संग ले गइन।
पंडवानी के माध्यम ले वो महाभारत के कथा ला एतका सहज अउ रोचक ढंग ले प्रस्तुत करत रहिन कि हर उमर के लोग मंत्रमुग्ध हो जावत रहिन। उनकर कला आने वाली पीढ़ी बर प्रेरणा के स्रोत बने रही।
कई राष्ट्रीय सम्मान ले होय रहिन सम्मानित
भारतीय लोक कला अउ संस्कृति मं अतुलनीय योगदान बर तीजन बाई ला समय-समय मं कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करे गीस। भारत सरकार ह उनकर योगदान ला सम्मान देत हुए पद्मश्री, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, पद्मभूषण अउ बाद मं देस के दूसर सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण ले सम्मानित करिस।
ए सम्मान सिरिफ तीजन बाई के नइ, बल्कि पूरा छत्तीसगढ़ अउ ओकर लोक संस्कृति बर गर्व के बात रहिस।
कला जगत मं शोक के माहौल
तीजन बाई के निधन के समाचार मिलतेच कलाकार, साहित्यकार, संस्कृति प्रेमी, सामाजिक संगठन अउ आम जनता गहरा दुख व्यक्त करत हें। सोशल मीडिया मं घलो हजारों लोगन मन श्रद्धांजलि अर्पित करत उनकर योगदान ला याद करत हें।
लोक कला के जानकार मन के मुताबिक, तीजन बाई के जाना छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक इतिहास बर एक अपूरणीय क्षति आय। उनकर जगा भरना बेहद कठिन होही।
हमेशा जिंदा रही उनकर आवाज
कहिथें कि कलाकार अपन कला के माध्यम ले अमर हो जाथे। तीजन बाई घलो अपन पंडवानी, अपन आवाज अउ अपन अद्भुत प्रस्तुति के माध्यम ले हमेशा लोगन के दिल मं जिंदा रहिहीं। जब-जब पंडवानी के चर्चा होही, तीजन बाई के नाम सबसे पहिली याद करे जाही।
छत्तीसगढ़ अपन ए महान बेटी ला कभू नइ भुला सकय। उनकर जीवन संघर्ष, मेहनत, समर्पण अउ कला के प्रति लगन आने वाली पीढ़ी बर हमेशा प्रेरणा बनके रहिही।
