रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ के पहचान सिरिफ घना जंगल, लोक संस्कृति अउ खनिज संपदा तक सीमित नई हे। ए माटी के असली महक ओकर पारंपरिक खानपान मं घलो बसाय हवय। अइसनेच एक लोकप्रिय अउ सदियों ले घर-घर मं बनत आवत व्यंजन आय – देहरौरी रोटी। चांउर अउ उड़द दार ले बने ए स्वादिष्ट रोटी अपन अलग बनावट, हल्का खमीर वाला सुवाद अउ पौष्टिकता बर पहिचान रखथे।
गांव के रसोई ले निकलके अब देहरौरी रोटी शहर के होटल, फूड फेस्टिवल अउ छत्तीसगढ़ी भोजन परोसइया कई रेस्टोरेंट तक पहुंच गे हे। ए सिरिफ एक व्यंजन नई, बल्कि छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक विरासत अउ अपन माटी संग जुड़ाव के प्रतीक घलो आय।
का आय देहरौरी रोटी?
देहरौरी रोटी एक पारंपरिक किण्वित (फर्मेंटेड) व्यंजन आय। एला चांउर अउ उड़द दार के घोल ले बनाय जाथे। गरम तवा मं घोल ला फैलाके धीमी आंच मं पकाय जाथे, जेन ले ए रोटी ऊपर ले हल्का कुरकुरा, भीतर ले नरम अउ बीच मं सुंदर जालीदार बनथे।
ए रोटी के सुवाद डोसा ले अलग होथे। हल्का खमीर उठे के कारण ए मं अलग किसिम के सोंधापन अउ स्वाद मिलथे, जेन ह एला खास बनाथे।
छत्तीसगढ़ के तिहार अउ परंपरा संग जुड़ाय हे देहरौरी
देहरौरी रोटी के छत्तीसगढ़ी संस्कृति मं विशेष स्थान हे। गांव-गांव मं अक्ती, हरेली, तीजा, पोरा, छेरछेरा जइसने तिहार मन मं एला बनाय के परंपरा आज घलो जीवित हे।
बुजुर्ग मन कहिथें कि नवा धान के चांउर ले बने पहिली देहरौरी रोटी भगवान ला अर्पित करे के बाद परिवार मं खाय जाथे। ए परंपरा किसान के प्रकृति, धरती अउ अन्नदाता के प्रति सम्मान ला दर्शाथे।
अइसने बनथे देहरौरी रोटी
देहरौरी बनाय बर करीब तीन भाग चांउर अउ एक भाग उड़द दार ला अलग-अलग कई घंटा तक भिगोय जाथे। ओकर बाद दूनों ला पीसके गाढ़ा घोल तैयार करे जाथे।
ए घोल ला रातभर या लगभग 8–10 घंटा रखे जाथे, ताकि ओकर मं प्राकृतिक रूप ले खमीर उठ सकय। बिहान नमक, जीरा अउ इच्छा अनुसार हरी मिर्च मिलाके गरम तवा ऊपर फैलाय जाथे। धीमी आंच मं पकाय के बाद ऊपर ले घी लगा के परोसे जाथे।
देहरौरी रोटी टमाटर-लहसुन के चटनी, तिल के चटनी, आलू के भाजी, दार या दही संग खाय जाय त ओकर सुवाद अउ बढ़ जाथे।
सुवाद संग सेहत के घलो खजाना
देहरौरी रोटी मं चांउर ले शरीर ला ऊर्जा मिलथे, जबकि उड़द दार प्रोटीन के अच्छा स्रोत माने जाथे। खमीर उठे के कारण ए व्यंजन पाचन बर घलो सहज माने जाथे।
कम तेल मं बने के कारण एला हल्का भोजन पसंद करे वाला लोग घलो पसंद करथें। गर्मी के दिन मं गांव के लोग एला दही या चटनी संग खाके ताजगी महसूस करथें।
गांव ले शहर तक बढ़त लोकप्रियता
पहिली जिहां देहरौरी सिरिफ गांव के घर-घर मं बनत रहिस, अब शहर के छत्तीसगढ़ी भोजन परोसइया होटल अउ फूड फेस्टिवल मं घलो एला खूब पसंद करे जावत हे।
स्थानीय व्यंजन मन के बढ़त मांग के कारण देहरौरी अब प्रदेश के पहचान बनत जावत हे। बाहिर ले आवइया पर्यटक घलो छत्तीसगढ़ी थारी संग ए पारंपरिक रोटी के स्वाद जरूर लेना चाहथें।
महिला स्व-सहायता समूह मन बर बनत आय के जरिया
प्रदेश के कई जिला मं महिला स्व-सहायता समूह मन पारंपरिक व्यंजन बनाके रोजगार कमावत हें। देहरौरी रोटी घलो ए सूची मं तेजी ले जुड़त जावत हे।
घरेलू स्वाद, कम लागत अउ बढ़त मांग के कारण कई महिला मन देहरौरी बनाके स्थानीय बाजार, मेलों अउ सांस्कृतिक कार्यक्रम मन मं बेचत हें। ए ले ओमन के आर्थिक स्थिति मजबूत होवत हे अउ छत्तीसगढ़ी खानपान के प्रचार घलो बढ़त हे।
नई पीढ़ी ला अपन स्वाद संग जोड़ना जरूरी
आज के समय मं फास्ट फूड के बढ़त चलन के बीच अइसने पारंपरिक व्यंजन मन ला बचाय रखना जरूरी हो गे हे। देहरौरी रोटी सिरिफ भोजन नई, बल्कि छत्तीसगढ़ के लोकजीवन, खेती-किसानी अउ संस्कृति के जीवंत पहचान आय।
अगर घर-परिवार मं छोटे मन ला बचपन ले अइसने व्यंजन के स्वाद मिलही, त ओमन अपन संस्कृति संग घलो जुड़े रहिहीं। ए सिरिफ एक रोटी नई, बल्कि माटी, मेहनत अउ अपनपन के स्वाद आय, जेन हर निवाला मं छत्तीसगढ़ के आत्मा ला महसूस कराथे।
घर मं अइसने बनाव देहरौरी रोटी
सामग्री:
- 3 कप चांउर
- 1 कप उड़द दार
- स्वाद अनुसार नमक
- 1 चम्मच जीरा
- बारीक कटे हरी मिर्च (इच्छा अनुसार)
- घी या थोड़ा तेल
बनाय के तरीका:
- चांउर अउ उड़द दार ला अलग-अलग 5–6 घंटा भिगो देवव।
- दूनों ला पीसके गाढ़ा घोल बना लेवव।
- घोल ला रातभर या 8–10 घंटा खमीर उठे बर छोड़ देवव।
- बिहान नमक, जीरा अउ हरी मिर्च मिलावव।
- गरम तवा ऊपर हल्का तेल लगाके घोल ला गोल-गोल फैलावव।
- धीमी आंच मं पकावव अउ ऊपर ले घी लगाके चटनी या दही संग गरम-गरम परोसव।
