कोरबा जिला अस्पताल में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर चिकित्सकों ने प्रदर्शन किया। डॉक्टरों ने वर्तमान ₹16 हजार स्टाइपेंड को बढ़ाकर न्यूनतम ₹30 हजार करने की मांग उठाई और चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज किया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर।
कोरबा (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को अब प्रदेश के विभिन्न जिलों से समर्थन मिलने लगा है। इसी क्रम में शनिवार को जिला अस्पताल कोरबा में चिकित्सकों ने इंटर्न डॉक्टरों के समर्थन में प्रदर्शन करते हुए सरकार से स्टाइपेंड में सम्मानजनक वृद्धि की मांग की। प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था में इंटर्न डॉक्टर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन उन्हें मिलने वाला वर्तमान ₹16 हजार प्रतिमाह स्टाइपेंड उनकी जिम्मेदारियों और कार्यभार के अनुरूप नहीं है।
जिला अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में चिकित्सक एकत्रित हुए और इंटर्न डॉक्टरों के समर्थन में अपनी एकजुटता दिखाई। प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों ने कहा कि इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाकर कम से कम ₹30 हजार प्रतिमाह किया जाना चाहिए, ताकि उन्हें आर्थिक रूप से राहत मिल सके और वे बेहतर मनोबल के साथ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर सकें।
स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत कड़ी हैं इंटर्न डॉक्टर
प्रदर्शन में शामिल चिकित्सकों ने कहा कि मेडिकल शिक्षा पूरी करने के बाद इंटर्नशिप का एक वर्ष किसी भी डॉक्टर के लिए सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। इसी दौरान इंटर्न डॉक्टर अस्पताल की वास्तविक कार्यप्रणाली को समझते हैं और मरीजों की देखभाल से लेकर विभिन्न चिकित्सकीय प्रक्रियाओं में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि इंटर्न डॉक्टर प्रतिदिन ओपीडी में मरीजों की प्रारंभिक जांच करते हैं, वार्डों में भर्ती मरीजों की निगरानी करते हैं, वरिष्ठ चिकित्सकों के निर्देशों का पालन कर उपचार प्रक्रिया में सहयोग देते हैं और इमरजेंसी सेवाओं में भी लगातार ड्यूटी निभाते हैं। कई बार देर रात तक या लगातार कई घंटों तक ड्यूटी करना भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा होता है।
कार्यभार के मुकाबले स्टाइपेंड बेहद कम

प्रदर्शन के दौरान चिकित्सकों ने बताया कि वर्तमान में इंटर्न डॉक्टरों को प्रतिमाह ₹16 हजार का स्टाइपेंड दिया जाता है, जो आज की महंगाई और उनकी जिम्मेदारियों को देखते हुए बेहद कम है। उनका कहना है कि मेडिकल शिक्षा पूरी करने में वर्षों की मेहनत और भारी आर्थिक खर्च लगता है। इसके बावजूद इंटर्नशिप के दौरान मिलने वाला स्टाइपेंड उनकी बुनियादी आवश्यकताओं को भी पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
चिकित्सकों ने कहा कि कई अन्य राज्यों में इंटर्न डॉक्टरों को इससे अधिक स्टाइपेंड दिया जा रहा है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के इंटर्न डॉक्टर भी लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि कम से कम ₹30 हजार प्रतिमाह स्टाइपेंड निर्धारित किया जाना चाहिए, जिससे उन्हें आर्थिक दबाव से कुछ राहत मिल सके।
मरीजों की सेवा में निभाते हैं महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
प्रदर्शन में शामिल डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि अस्पताल की व्यवस्था केवल वरिष्ठ चिकित्सकों के भरोसे नहीं चलती, बल्कि इंटर्न डॉक्टर भी स्वास्थ्य सेवाओं की एक मजबूत कड़ी हैं। ओपीडी में मरीजों की प्रारंभिक जांच, वार्ड में नियमित राउंड, मरीजों की स्थिति की निगरानी, दवाइयों से संबंधित प्रक्रिया में सहयोग, मेडिकल रिकॉर्ड तैयार करना और इमरजेंसी की स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराना जैसी कई जिम्मेदारियां इंटर्न डॉक्टर निभाते हैं।
उनका कहना है कि कई बार मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने में सबसे पहले इंटर्न डॉक्टर ही सक्रिय भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें सम्मानजनक स्टाइपेंड मिलना चाहिए।
सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग
प्रदर्शन के दौरान चिकित्सकों ने राज्य सरकार से मांग की कि इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में जल्द वृद्धि की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो इससे न केवल इंटर्न डॉक्टरों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
डॉक्टरों ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक है कि मेडिकल छात्रों और इंटर्न डॉक्टरों को बेहतर कार्य वातावरण और आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जाए।
आंदोलन तेज करने की दी चेतावनी
आंदोलन का समर्थन कर रहे चिकित्सकों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उनका कहना है कि प्रदेशभर में डॉक्टरों का समर्थन लगातार बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज हो सकता है।
हालांकि प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि मरीजों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा, लेकिन यदि आंदोलन लंबा खिंचता है तो अस्पतालों की कुछ स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में मरीजों को जांच, परामर्श या अन्य सेवाओं के लिए अतिरिक्त प्रतीक्षा का सामना करना पड़ सकता है।
स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा

विशेषज्ञों का मानना है कि इंटर्न डॉक्टर किसी भी सरकारी अस्पताल की कार्यप्रणाली का अहम हिस्सा होते हैं। वे चिकित्सा शिक्षा और व्यावहारिक प्रशिक्षण के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ऐसे में उनके कार्य के अनुरूप उचित स्टाइपेंड उपलब्ध कराना न केवल उनके हित में होगा, बल्कि भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को भी मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
फिलहाल प्रदेशभर में इंटर्न डॉक्टरों की स्टाइपेंड वृद्धि की मांग चर्चा का विषय बनी हुई है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं कि इस मांग पर कब और किस प्रकार का निर्णय लिया जाता है।