छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन (CGTA) ने संयुक्त संचालक शिक्षा एच.आर. सोम को ज्ञापन सौंपकर शिक्षकों की पदोन्नति, वरिष्ठता सूची की त्रुटियों और गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति की मांग की। जानिए बैठक में क्या हुआ, क्या मिला आश्वासन और शिक्षा व्यवस्था पर इसका क्या पड़ेगा असर।
छत्तीसगढ़ (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) में लंबे समय से पदोन्नति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे शिक्षकों की उम्मीदें एक बार फिर बढ़ गई हैं। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन (CGTA) के प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त संचालक (शिक्षा) एच.आर. सोम से मुलाकात कर शिक्षकों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की और मांगों का ज्ञापन सौंपा।
बैठक में शिक्षकों ने केवल पदोन्नति का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि वरिष्ठता सूची में मौजूद त्रुटियों, लंबित दावा-आपत्तियों तथा लगातार बढ़ते गैर-शैक्षणिक कार्यों से शिक्षण व्यवस्था पर पड़ रहे प्रभाव को भी प्रमुखता से रखा। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यदि इन समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता पर पड़ेगा।
पदोन्नति प्रक्रिया जल्द पूरी करने का मिला आश्वासन
बैठक के दौरान संयुक्त संचालक (शिक्षा) एच.आर. सोम ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि वरिष्ठता सूची से संबंधित प्राप्त सभी दावा-आपत्तियों का नियमानुसार निराकरण किया जाएगा। इसके बाद आवश्यक संशोधन करते हुए प्रचलित नियमों के अनुसार पदोन्नति की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा।
यह आश्वासन ऐसे समय में आया है जब प्रदेश के हजारों शिक्षक लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। कई शिक्षकों का कहना है कि वर्षों की सेवा के बावजूद उन्हें पदोन्नति नहीं मिल पाई, जिससे उनके कैरियर की प्रगति प्रभावित हुई है।
शिक्षकों का मानना है कि समय पर पदोन्नति होने से न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा बल्कि स्कूलों में प्रशासनिक कार्यों का संचालन भी अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा।
वरिष्ठता सूची में त्रुटियों पर जताई चिंता
प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठता सूची में सामने आई विभिन्न विसंगतियों का मुद्दा भी विस्तार से उठाया। उनका कहना था कि कई शिक्षकों के नाम, नियुक्ति तिथि, सेवा अवधि और अन्य विवरणों में त्रुटियां होने के कारण उन्हें पदोन्नति और अन्य सेवा संबंधी लाभ मिलने में कठिनाई हो रही है।
एसोसिएशन ने मांग की कि सभी दावा-आपत्तियों का निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से परीक्षण किया जाए ताकि किसी भी पात्र शिक्षक के साथ अन्याय न हो।
प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि यदि वरिष्ठता सूची पूरी तरह सही होगी तो भविष्य में पदोन्नति और स्थानांतरण जैसी प्रक्रियाओं में भी विवाद की संभावना काफी कम हो जाएगी।
गैर-शैक्षणिक कार्यों से पढ़ाई हो रही प्रभावित
बैठक का सबसे अहम मुद्दा शिक्षकों पर लगातार बढ़ते गैर-शैक्षणिक कार्यों का रहा।
CGTA ने संयुक्त संचालक को बताया कि वर्तमान समय में शिक्षकों को पढ़ाने के अलावा कई प्रकार के ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रशासनिक कार्यों में लगाया जा रहा है। इनमें विभिन्न पोर्टलों पर जानकारी अपलोड करना, प्रतिदिन फोटो और वीडियो भेजना, गूगल वर्कशीट भरना, एक्सेल शीट तैयार करना तथा एक ही जानकारी को अलग-अलग माध्यमों से उपलब्ध कराना शामिल है।
शिक्षकों का कहना है कि कई बार एक ही जानकारी को ऑनलाइन पोर्टल, ऑफलाइन रिपोर्ट, गूगल शीट और एक्सेल फॉर्मेट में अलग-अलग जमा करना पड़ता है, जिससे अनावश्यक रूप से समय और ऊर्जा दोनों खर्च होती हैं।
उनका कहना है कि यदि यही समय विद्यार्थियों को पढ़ाने और उनकी शैक्षणिक प्रगति पर लगाया जाए तो शिक्षा की गुणवत्ता में बेहतर सुधार देखने को मिल सकता है।
“शिक्षक का समय कक्षा में लगे, कागजी प्रक्रिया में नहीं”
प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि शिक्षक का मूल दायित्व विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है। यदि शिक्षक का अधिकांश समय केवल रिपोर्टिंग और दस्तावेज तैयार करने में बीतेगा तो कक्षा शिक्षण प्रभावित होना स्वाभाविक है।
शिक्षकों ने सुझाव दिया कि विभाग एकीकृत डिजिटल व्यवस्था विकसित करे, जिसमें एक बार जानकारी दर्ज करने पर वही सभी आवश्यक रिपोर्टों में उपयोग हो सके। इससे दोहराव कम होगा और शिक्षकों को विद्यार्थियों के साथ अधिक समय बिताने का अवसर मिलेगा।
शिक्षा व्यवस्था के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा
विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता केवल नई योजनाएं शुरू करने से नहीं बढ़ती, बल्कि शिक्षकों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त समय और संसाधन उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है।
यदि शिक्षक प्रशासनिक और तकनीकी कार्यों में अधिक व्यस्त रहेंगे तो विद्यार्थियों की व्यक्तिगत शैक्षणिक जरूरतों, कमजोर छात्रों की अतिरिक्त तैयारी और नवाचार आधारित शिक्षण गतिविधियों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा सकेगा।
इसी कारण देश के विभिन्न राज्यों में समय-समय पर शिक्षकों के गैर-शैक्षणिक कार्यों को सीमित करने की मांग उठती रही है।
शिक्षकों की प्रमुख मांगें
प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा विभाग के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं—
- लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जाए।
- वरिष्ठता सूची में प्राप्त दावा-आपत्तियों का शीघ्र निराकरण किया जाए।
- वरिष्ठता सूची में सभी त्रुटियों का पारदर्शी तरीके से संशोधन किया जाए।
- शिक्षकों पर बढ़ते गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ कम किया जाए।
- एक ही जानकारी बार-बार विभिन्न प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था समाप्त की जाए।
- शिक्षकों को अधिक समय कक्षा शिक्षण के लिए उपलब्ध कराया जाए।
शिक्षा विभाग की ओर से सकारात्मक संकेत
बैठक के बाद शिक्षकों ने उम्मीद जताई कि विभाग उनके सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगा। वहीं संयुक्त संचालक (शिक्षा) द्वारा पदोन्नति प्रक्रिया को जल्द पूरा करने और दावा-आपत्तियों के निराकरण का दिया गया आश्वासन शिक्षकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग कब तक वरिष्ठता सूची का अंतिम प्रकाशन करता है और पदोन्नति प्रक्रिया को धरातल पर आगे बढ़ाता है। साथ ही, गैर-शैक्षणिक कार्यों को लेकर विभाग क्या व्यावहारिक कदम उठाता है, यह भी शिक्षकों और शिक्षा जगत के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
