छत्तीसगढ़ में बिजली दरों में वृद्धि, स्मार्ट मीटर और 400 यूनिट आधे बिजली बिल योजना को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर निशाना साधा। कोरबा में आयोजित प्रेस वार्ता में पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने बिजली दरें वापस लेने और स्मार्ट मीटर की प्रक्रिया रोकने की मांग की। पढ़िए पूरी खबर।
कोरबा (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)।छत्तीसगढ़ में बिजली दरों में हालिया वृद्धि, स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया और बिजली उपभोक्ताओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य सरकार की ऊर्जा नीतियों पर सवाल उठाते हुए इन्हें आम उपभोक्ताओं के लिए आर्थिक रूप से बोझिल बताया है। रविवार को कोरबा के टीपी नगर स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पार्टी नेताओं ने सरकार से बिजली दरों में की गई बढ़ोतरी वापस लेने, स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया तत्काल रोकने तथा कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में लागू 400 यूनिट तक आधे बिजली बिल की योजना को दोबारा लागू करने की मांग की।
प्रेस वार्ता में पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि बिजली केवल एक सुविधा नहीं बल्कि प्रत्येक परिवार की दैनिक जरूरत का अहम हिस्सा है। ऐसे में बिजली से जुड़े किसी भी निर्णय का सीधा असर आम नागरिकों के मासिक खर्च पर पड़ता है। उनका कहना था कि सरकार को ऐसे फैसले लेने से पहले उपभोक्ताओं की आर्थिक स्थिति और वर्तमान महंगाई को ध्यान में रखना चाहिए।
बिजली दरों में वृद्धि पर कांग्रेस ने जताई आपत्ति
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि हाल ही में बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी का असर केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे व्यवसायियों, दुकानदारों, किसानों और लघु उद्योगों पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा। उनका कहना था कि पहले से ही बढ़ती महंगाई के कारण आम लोगों का घरेलू बजट प्रभावित है और ऐसे समय में बिजली की दरें बढ़ाना लोगों की परेशानियों को और बढ़ाने वाला कदम साबित हो सकता है।
पार्टी नेताओं का कहना था कि बिजली की लागत बढ़ने का प्रभाव कई अन्य क्षेत्रों पर भी दिखाई देता है। छोटे उद्योगों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के खर्च बढ़ने से वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है, जिसका बोझ अंततः आम उपभोक्ताओं को ही उठाना पड़ता है।
स्मार्ट मीटर को लेकर भी उठाए सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस ने राज्य में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों को लेकर भी सवाल उठाए। पार्टी नेताओं का कहना था कि कई राज्यों में स्मार्ट मीटरों को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतें सामने आई हैं। कांग्रेस ने दावा किया कि लोगों के बीच यह आशंका बनी हुई है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल पहले की तुलना में अधिक आ सकते हैं।
कांग्रेस नेताओं ने सरकार से मांग की कि जब तक स्मार्ट मीटरों को लेकर उपभोक्ताओं की सभी शंकाओं का समाधान नहीं हो जाता और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से नहीं अपनाई जाती, तब तक इसकी स्थापना पर रोक लगाई जाए। उनका कहना था कि सरकार को पहले जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को तकनीकी जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए।
400 यूनिट तक आधे बिजली बिल की योजना फिर शुरू करने की मांग
प्रेस वार्ता में कांग्रेस ने अपनी पूर्व सरकार के दौरान लागू की गई 400 यूनिट तक आधे बिजली बिल की योजना का भी उल्लेख किया। नेताओं का कहना था कि इस योजना से लाखों उपभोक्ताओं को राहत मिली थी और घरेलू खर्च पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा था।
कांग्रेस ने राज्य सरकार से मांग की कि आम लोगों को राहत देने के लिए इस योजना को फिर से लागू किया जाए। पार्टी का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में जनता के हितों को प्राथमिकता देना चाहती है तो बिजली बिल में राहत देने वाले ऐसे कदमों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
‘महंगाई के दौर में राहत की जरूरत’
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान समय में खाद्य सामग्री, ईंधन, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में बिजली जैसी आवश्यक सेवा की कीमतों में वृद्धि आम परिवारों की आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त दबाव डालती है।
उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे निर्णय लेने चाहिए जिनसे आम नागरिकों को राहत मिले, न कि उनके मासिक खर्च में और बढ़ोतरी हो। कांग्रेस का कहना है कि उपभोक्ताओं के हित सर्वोपरि होने चाहिए और बिजली से जुड़े सभी फैसले जनता की सुविधा और आर्थिक क्षमता को ध्यान में रखकर लिए जाने चाहिए।
सरकार से प्रमुख मांगें
प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेताओं ने राज्य सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखीं। इनमें हाल ही में बढ़ाई गई बिजली दरों को वापस लेने, स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को तत्काल रोकने, 400 यूनिट तक आधे बिजली बिल की योजना को पुनः लागू करने तथा बिजली उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता देने की मांग शामिल रही।
पार्टी नेताओं ने कहा कि यदि इन मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो कांग्रेस भविष्य में जनता के हित में व्यापक जनआंदोलन की रणनीति भी बना सकती है।
ऊर्जा नीति पर राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत
छत्तीसगढ़ में बिजली दरों और स्मार्ट मीटर को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। एक ओर विपक्ष सरकार की ऊर्जा नीतियों पर सवाल उठा रहा है, वहीं आने वाले दिनों में सरकार की ओर से इन आरोपों और मांगों पर प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बिजली उपभोक्ताओं से जुड़े मुद्दे हमेशा जनहित से जुड़े रहे हैं। ऐसे में बिजली दर, स्मार्ट मीटर और राहत योजनाओं को लेकर होने वाली राजनीतिक बहस का प्रभाव प्रदेश की राजनीति के साथ-साथ आम लोगों पर भी देखने को मिल सकता है।
फिलहाल कांग्रेस ने सरकार से इन सभी मुद्दों पर पुनर्विचार करने और उपभोक्ताओं को राहत देने वाले फैसले लेने की अपील की है। अब यह देखना होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और ऊर्जा विभाग की आगामी नीतियों में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं।
