कोरबा के युवा पर्वतारोही हरीश कुमार पोर्ते ने लद्दाख की 6,200 मीटर ऊंची कांग यात्से-2 चोटी पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराया। इससे पहले उन्होंने माउंट यूनाम भी फतह की थी। जानिए उनकी सफलता की पूरी प्रेरणादायक कहानी।
छत्तीसगढ़ (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) के कोरबा जिले ने एक बार फिर देश को गर्व करने का अवसर दिया है। पाली विकासखंड के ग्राम लोहड़िया निवासी युवा पर्वतारोही हरीश कुमार पोर्ते ने अपनी मेहनत, साहस और अदम्य इच्छाशक्ति के बल पर लद्दाख की प्रसिद्ध और चुनौतीपूर्ण कांग यात्से-2 (Kang Yatse-II) चोटी को सफलतापूर्वक फतह कर भारत का तिरंगा शिखर पर लहराया है। लगभग 6,200 मीटर (20,341 फीट) की ऊंचाई पर स्थित इस पर्वत पर चढ़ाई करना किसी भी पर्वतारोही के लिए आसान नहीं माना जाता।
हरीश की इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार और गांव, बल्कि पूरे कोरबा जिले और छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया है। उनकी इस सफलता पर क्षेत्र में खुशी का माहौल है और लोग उन्हें बधाइयां दे रहे हैं।
एक महीने में दो बड़ी पर्वत चोटियों पर विजय
हरीश कुमार पोर्ते का यह अभियान इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले 4 जुलाई को उन्होंने हिमाचल प्रदेश की 6,111 मीटर ऊंची माउंट यूनाम चोटी पर भी सफलतापूर्वक चढ़ाई की थी। लगातार दो ऊंची पर्वत चोटियों को फतह कर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो कठिन से कठिन मंजिल भी हासिल की जा सकती है।
लगातार मिल रही इन सफलताओं ने उन्हें प्रदेश के उभरते हुए पर्वतारोहियों की सूची में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है।
कांग यात्से-2 क्यों मानी जाती है चुनौतीपूर्ण?
लद्दाख के मार्का वैली क्षेत्र में स्थित कांग यात्से-2 हिमालय की उन चोटियों में शामिल है, जहां मौसम हर पल बदलता रहता है। यहां ऑक्सीजन का स्तर सामान्य क्षेत्रों की तुलना में काफी कम होता है। तेज बर्फीली हवाएं, फिसलन भरे ग्लेशियर, ऊबड़-खाबड़ रास्ते और अत्यधिक ठंड पर्वतारोहियों की परीक्षा लेते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार इस चोटी पर सफल चढ़ाई के लिए केवल शारीरिक ताकत ही नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती, धैर्य और सही रणनीति भी बेहद जरूरी होती है।
खराब मौसम के बीच भी नहीं हारी हिम्मत
अपनी सफलता के बाद हरीश कुमार पोर्ते ने बताया कि अभियान के दौरान मौसम कई बार चुनौती बनकर सामने आया। कई स्थानों पर तेज हवाएं, बर्फबारी और कठिन चढ़ाई ने टीम की परीक्षा ली। बावजूद इसके पूरी टीम ने संयम बनाए रखा और एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते हुए आगे बढ़ती रही।
उन्होंने कहा कि पर्वतारोहण केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि टीमवर्क का परिणाम होता है। यदि पूरी टीम एकजुट होकर काम करे तो बड़ी से बड़ी चुनौती को भी पार किया जा सकता है।
टीम और प्रशिक्षकों का जताया आभार
हरीश ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने साथियों और मार्गदर्शकों को दिया। उन्होंने विशेष रूप से नेपाल के अनुभवी पर्वतारोही मिग्मा शेरपा, बलजीत मैम तथा युवा पर्वतारोही वीरेंद्र का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान मिले मार्गदर्शन, अनुभव और सहयोग ने इस कठिन लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पर्वतारोहण जैसे जोखिमपूर्ण अभियान में अनुभवी टीम का साथ सफलता की सबसे बड़ी कुंजी होता है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बने हरीश
आज के समय में जहां अधिकांश युवा डिजिटल दुनिया तक सीमित होते जा रहे हैं, वहीं हरीश कुमार पोर्ते ने कठिन परिस्थितियों में अपनी मेहनत और लगन से यह संदेश दिया है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता।
उनकी सफलता उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है जो खेल, एडवेंचर स्पोर्ट्स या पर्वतारोहण में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने जुनून को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया।
कोरबा और छत्तीसगढ़ का बढ़ा सम्मान
हरीश की इस उपलब्धि पर कोरबा जिले के लोगों में उत्साह देखा जा रहा है। स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और खेल प्रेमियों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्होंने पूरे प्रदेश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना यह साबित करता है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती। जरूरत केवल अवसर, मेहनत और आत्मविश्वास की होती है।
तिरंगे के साथ दिया देशभक्ति का संदेश
कांग यात्से-2 के शिखर पर पहुंचकर हरीश कुमार पोर्ते ने भारत का तिरंगा फहराया। यह पल उनके लिए भावुक करने वाला था। उन्होंने कहा कि इतनी ऊंचाई पर तिरंगे को लहराते देखना जीवन के सबसे यादगार क्षणों में से एक है।
उन्होंने अपनी इस सफलता को देश और प्रदेश के नाम समर्पित करते हुए कहा कि भविष्य में भी वे और ऊंची पर्वत चोटियों को फतह कर भारत का नाम रोशन करने का प्रयास जारी रखेंगे।
भविष्य की नई चुनौतियों के लिए तैयार
लगातार दो सफल अभियानों के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि हरीश आने वाले समय में देश और विदेश की अन्य प्रतिष्ठित पर्वत चोटियों पर भी अभियान चलाएंगे। यदि उन्हें उचित प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग मिलता है तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी छत्तीसगढ़ और भारत का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।
उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि छोटे गांवों से निकलने वाले युवा भी बड़े सपने देख सकते हैं और उन्हें साकार कर सकते हैं।
