रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ले आज संसद भवन मं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ले सौजन्य भेंट करिन। ए दौरान दुनों नेता मन के बीच छत्तीसगढ़ के समग्र विकास, बस्तर के कायाकल्प अउ राज्य मं चलत महत्वपूर्ण अधोसंरचना, औद्योगिक अउ सामाजिक विकास परियोजना मन ला लेके विस्तार ले चर्चा होइस। मुख्यमंत्री साय ले प्रधानमंत्री मोदी के सामने बदलत छत्तीसगढ़ के तस्वीर अउ खासकर बस्तर क्षेत्र के विकास के रोडमैप रखत हुए केंद्र सरकार ले तीन महत्वपूर्ण प्रस्ताव मन मं सहयोग अउ सकारात्मक पहल के आग्रह करिन।
मुख्यमंत्री ले कहिस कि सुरक्षा, विश्वास अउ विकास ला एक संग लेके चले के रणनीति के परिणाम अब बस्तर मं दिखाई देत हवय। जेन बस्तर क्षेत्र ले एक समय नक्सल हिंसा अउ विकास के कमी के चुनौती झेले रहिस, उही इलाका अब धीरे-धीरे शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रेल, बिजली, हवाई सेवा, रोजगार, आजीविका, खेल अउ पर्यटन जइसने क्षेत्र मं आगू बढ़त हवय।
सरकार के लक्ष्य अब ए बदलाव ला सिर्फ कुछ साल तक सीमित नई रखके स्थायी विकास के रूप मं आगू बढ़ाना हवय, ताकि बस्तर के दूरस्थ गांव तक शासन के योजना पहुंचय अउ क्षेत्र के लोगन ला विकास के मुख्यधारा ले पूरी तरह जोड़े जा सकय।
राजनांदगांव मं 10,500 करोड़ के गैस आधारित यूरिया परियोजना के प्रस्ताव
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने राजनांदगांव मं प्रस्तावित करीब 10,500 करोड़ रुपिया के गैस आधारित यूरिया परियोजना ला जल्द स्वीकृति देए के आग्रह करिन। मुख्यमंत्री के मुताबिक, परियोजना बर जरूरी जमीन उपलब्ध करा दे गे हवय अउ राज्य सरकार के स्तर ले जरूरी स्वीकृति प्रक्रिया घलो पूरा करे जा चुके हवय।
ए परियोजना के स्वीकृति मिलथे अउ काम आगू बढ़थे, त छत्तीसगढ़ के संग आसपास के राज्य मन के किसान मन ला घलो उर्वरक के उपलब्धता मं फायदा होए के उम्मीद हवय। किसान मन ला खेती के समय खाद बर दूसर राज्य ऊपर निर्भरता कम हो सकथे अउ समय मं उर्वरक उपलब्ध होए ले कृषि उत्पादन ला घलो बढ़ावा मिल सकथे।
ए परियोजना के दूसरा महत्वपूर्ण पहलू रोजगार अउ औद्योगिक गतिविधि ले जुड़त हवय। करीब 10,500 करोड़ रुपिया के निवेश वाला परियोजना ले प्रत्यक्ष रोजगार के संग अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर घलो बन सकथे। परियोजना के आसपास परिवहन, लॉजिस्टिक्स, सर्विस सेक्टर अउ दूसर सहायक कारोबार मन के विकास के संभावना बने रहिही।
मुख्यमंत्री साय ले प्रधानमंत्री ले आग्रह करिस कि परियोजना ला जल्द स्वीकृति मिलय, ताकि राज्य मं औद्योगिक निवेश के वातावरण अउ मजबूत होवय अउ किसान मन ला उर्वरक के उपलब्धता के फायदा मिल सकय।
बस्तर के 461 गांव ला स्थायी बिजली ग्रिड ले जोड़े के मांग
मुख्यमंत्री साय ले बस्तर सहित संवेदनशील क्षेत्र के अइसन 461 गांव के मुद्दा घलो प्रधानमंत्री के सामने रखिन, जिहां पहिली सुरक्षा अउ कठिन भौगोलिक परिस्थिति के कारण स्थायी बिजली ग्रिड पहुंचाना संभव नई हो पाय रहिस।
वर्तमान मं इन गांव मन मं ऑफ-ग्रिड माध्यम ले बिजली के व्यवस्था करे जावत हवय। फेर मुख्यमंत्री के कहना हवय कि दूरस्थ गांव मन के स्थायी विकास बर नियमित अउ भरोसेमंद बिजली आपूर्ति जरूरी हवय। ए कारण ले इन गांव मन ला स्थायी विद्युत ग्रिड ले जोड़ना जरूरी हवय।
अगर इन गांव मन तक स्थायी बिजली ग्रिड पहुंच जाथे, त एकर सीधा असर गांव के रोजमर्रा के जीवन ऊपर पड़ही। बिजली उपलब्ध होए ले स्कूल मन मं पढ़ई के सुविधा बेहतर हो सकही, स्वास्थ्य केंद्र मन मं जरूरी उपकरण चलाए जा सकही अउ मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट अउ डिजिटल सेवा मन के विस्तार ला घलो गति मिल सकथे।
ए के संग गांव के युवा मन बर लघु उद्योग अउ रोजगार के अवसर बढ़ सकथे। छोटे कारोबार, कृषि आधारित गतिविधि अउ ग्रामीण उद्यमिता ला बिजली के नियमित आपूर्ति ले बड़ा सहारा मिल सकथे।
मुख्यमंत्री साय ले केंद्र सरकार ले इन 461 गांव मन ला स्थायी बिजली ग्रिड ले जोड़े बर विशेष सहयोग के आग्रह करिन।
रायपुर या बस्तर मं AIIA स्थापना के प्रस्ताव
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने छत्तीसगढ़ मं ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) के स्थापना के प्रस्ताव घलो रखिन। मुख्यमंत्री ले आग्रह करिस कि ए संस्थान ला रायपुर या बस्तर मं स्थापित करे के दिशा मं सकारात्मक पहल करे जावय।
मुख्यमंत्री के कहना रहिस कि छत्तीसगढ़, खासकर बस्तर अउ प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र मन मं औषधीय वनस्पति अउ पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान के समृद्ध विरासत हवय। बस्तर के जंगल मन मं पाए जाने वाले कई तरह के औषधीय पौधा अउ वनस्पति स्थानीय जीवन अउ पारंपरिक उपचार पद्धति के महत्वपूर्ण हिस्सा रहिन।
अगर राष्ट्रीय स्तर के आयुर्वेद संस्थान छत्तीसगढ़ मं स्थापित होथे, त ए ले चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान अउ स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र मं नया संभावना खुल सकथे। साथ ही औषधीय वनस्पति के संरक्षण, वैज्ञानिक अध्ययन अउ स्थानीय स्तर मं रोजगार के अवसर घलो बढ़ सकथे।
बस्तर मं AIIA जइसने संस्थान के स्थापना होए ले क्षेत्र के पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान ला आधुनिक अनुसंधान ले जोड़ए के मौका मिल सकथे। ए ले स्थानीय वनवासी समुदाय मन के पारंपरिक ज्ञान ला राष्ट्रीय अउ अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाए के दिशा मं घलो काम हो सकथे।
‘बस्तर विजन’ के जरिए 5,542 गांव तक पहुंचत हवय सरकार
मुख्यमंत्री साय ले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने ‘बस्तर विजन’ के तहत होवत काम के विस्तृत जानकारी घलो साझा करिन। उन्होंने बताए कि ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ अउ ‘बस्तर मुहिम’ के जरिए बस्तर संभाग के करीब 5,542 गांव तक शासन के योजना अउ सरकारी सेवा पहुंचाए के काम करे जावत हवय।
सरकार के मुताबिक, इन पहल मन ले करीब 39 लाख लोगन ला फायदा पहुंचत हवय। उद्देश्य ये हवय कि जेन गांव मन मं पहिली प्रशासन के पहुंच सीमित रहिस, ओतके अब सरकारी योजना के लाभ सीधे पहुंचय।
इन योजना मन के तहत राशन, आयुष्मान भारत, जनधन खाता, वन अधिकार, प्रधानमंत्री आवास अउ केंद्र-राज्य सरकार के अलग-अलग जनकल्याणकारी योजना मन के लाभ पात्र परिवार मन तक पहुंचाए ऊपर जोर देए जावत हवय।
दूरस्थ अउ पहिली संवेदनशील माने जाने वाले गांव मन मं प्रशासन के पहुंच बढ़े ले ग्रामीण मन के बीच शासन के प्रति भरोसा मजबूत होए के बात मुख्यमंत्री ले कहीस।
सुरक्षा के संग विकास ला देए जावत हवय प्राथमिकता
मुख्यमंत्री साय ले प्रधानमंत्री के सामने बस्तर के विकास के रणनीति के बारे मं कहत हुए बताए कि अब क्षेत्र मं सुरक्षा के संग विकास ला बराबर महत्व देए जावत हवय। सरकार के सोच हवय कि सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करे ले ही स्थायी बदलाव नई आ सकय। जब तक गांव मन मं सड़क, बिजली, स्कूल, अस्पताल, रोजगार अउ सरकारी सेवा नई पहुंचही, तब तक विकास अधूरा रहिही।
ए कारण ले बस्तर मं सुरक्षा, विश्वास अउ विकास के तीनों पहलू ला एक संग लेके काम करे जावत हवय। सरकार के प्रयास हवय कि ग्रामीण मन के बीच प्रशासन के भरोसा बढ़य अउ सरकारी योजना मन के लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचय।
