धमतरी में आयोजित जिला स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव में प्रभारी मंत्री टंक राम वर्मा ने विद्यार्थियों को बड़ी सोच और समर्पण के साथ पढ़ाई करने का संदेश दिया। नवप्रवेशी छात्रों का स्वागत, निःशुल्क पाठ्यपुस्तक, गणवेश, साइकिल और दिव्यांग विद्यार्थियों को सहायक सामग्री वितरित की गई। पढ़ें पूरी विस्तृत खबर।
धमतरी (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। नवीन शैक्षणिक सत्र की शुरुआत केवल स्कूलों के खुलने का अवसर नहीं होती, बल्कि यह हजारों बच्चों के जीवन में नए सपनों, नई उम्मीदों और नई संभावनाओं का प्रारंभ भी होती है। इन्हीं भावनाओं के साथ धमतरी जिले के मराठा मंगल भवन में जिला स्तरीय ‘शाला प्रवेशोत्सव’ का भव्य आयोजन किया गया, जहां शिक्षा के प्रति उत्साह, सामाजिक सहभागिता और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की झलक साफ दिखाई दी।
समारोह में जिले के प्रभारी मंत्री श्री टंक राम वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों का तिलक लगाकर, पुष्प वर्षा कर और आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें जीवन की नई शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही, जिससे पूरा परिसर उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा से भर गया।
नवप्रवेशी विद्यार्थियों का हुआ आत्मीय स्वागत
शाला प्रवेशोत्सव का मुख्य उद्देश्य बच्चों में विद्यालय के प्रति अपनापन और शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करना था। कार्यक्रम की शुरुआत नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं के स्वागत से हुई। बच्चों के माथे पर तिलक लगाया गया, उन पर पुष्प वर्षा की गई और उन्हें विद्यालय परिवार का हिस्सा बनने पर शुभकामनाएं दी गईं।
इस दौरान बच्चों के चेहरों पर खुशी और उत्सुकता साफ दिखाई दे रही थी। अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों के मन से स्कूल का डर खत्म करते हैं और उनमें आत्मविश्वास पैदा करते हैं।
निःशुल्क पाठ्यपुस्तक, गणवेश और साइकिलों का वितरण
कार्यक्रम के दौरान मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें और शाला गणवेश वितरित किए। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक कारणों से किसी भी बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो।
इसी अवसर पर सरस्वती साइकिल योजना के तहत छात्राओं को साइकिलें भी वितरित की गईं। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों की छात्राओं को विद्यालय आने-जाने में सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि वे बिना किसी बाधा के नियमित रूप से अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।
साइकिल प्राप्त करने वाली छात्राओं ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि इससे उनकी पढ़ाई और भी आसान होगी तथा समय की बचत के साथ सुरक्षा भी बढ़ेगी।
दिव्यांग विद्यार्थियों को मिला आत्मविश्वास का संबल
समारोह का एक भावुक और प्रेरणादायक क्षण तब देखने को मिला, जब दिव्यांग विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरण एवं किट वितरित की गई।
मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब हर बच्चे को समान अवसर मिले। दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराई गई सहायक सामग्री केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि उनके आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि सरकार समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रही है, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे।
मेधावी विद्यार्थियों का हुआ सम्मान
शाला प्रवेशोत्सव के दौरान उन विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने शिक्षा, खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों एवं सह-शैक्षणिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जिले का नाम रोशन किया है।
सम्मान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रशस्ति-पत्र और पुरस्कार प्रदान किए गए। इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि ऐसे प्रतिभाशाली विद्यार्थी अन्य बच्चों के लिए प्रेरणा हैं और उनकी उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि मेहनत, अनुशासन और निरंतर प्रयास से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
“बड़े लक्ष्य तय करें और पूरी निष्ठा से पढ़ाई करें”
अपने प्रेरक संबोधन में प्रभारी मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में हमेशा बड़ा लक्ष्य तय करें और उसे पाने के लिए पूरी निष्ठा, अनुशासन और समर्पण के साथ मेहनत करें।
उन्होंने कहा कि आज का विद्यार्थी ही कल का वैज्ञानिक, शिक्षक, चिकित्सक, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी और राष्ट्र निर्माता बनेगा। इसलिए शिक्षा केवल परीक्षा में अच्छे अंक लाने का माध्यम नहीं, बल्कि एक बेहतर समाज और मजबूत राष्ट्र के निर्माण का सबसे प्रभावी आधार है।
उन्होंने विद्यार्थियों से मोबाइल और अन्य अनावश्यक गतिविधियों में समय बर्बाद करने के बजाय नियमित अध्ययन, पुस्तक पढ़ने और अपने व्यक्तित्व के विकास पर ध्यान देने की अपील की।
संत और तीन मजदूरों की प्रेरक कथा से दिया जीवन का संदेश
अपने संबोधन को और अधिक प्रेरणादायक बनाते हुए मंत्री श्री वर्मा ने संत और तीन मजदूरों की एक प्रसिद्ध कथा सुनाई।
उन्होंने बताया कि एक संत ने तीन मजदूरों से पूछा कि वे क्या कर रहे हैं। पहले मजदूर ने कहा कि वह पत्थर तोड़ रहा है। दूसरे ने कहा कि वह अपनी रोजी-रोटी कमा रहा है। वहीं तीसरे मजदूर ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया कि वह एक ऐसा बांध बना रहा है, जिससे हजारों लोगों को पानी मिलेगा और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित होगा।
मंत्री ने कहा कि तीनों एक ही काम कर रहे थे, लेकिन उनकी सोच अलग थी। तीसरे मजदूर की सकारात्मक सोच, दूरदृष्टि और स्पष्ट लक्ष्य ने उसके साधारण कार्य को राष्ट्रसेवा का स्वरूप दे दिया।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यदि वे भी अपने जीवन का उद्देश्य स्पष्ट रखेंगे और सकारात्मक सोच के साथ मेहनत करेंगे, तो वे निश्चित रूप से बड़ी सफलता हासिल करेंगे।
शिक्षा से ही विकसित होगा सशक्त समाज
मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि शिक्षा केवल व्यक्तिगत विकास का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति है। एक शिक्षित समाज ही आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत बन सकता है।
उन्होंने शिक्षकों से भी आग्रह किया कि वे केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित न रहें, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर नैतिक मूल्यों, अनुशासन, सामाजिक जिम्मेदारी और देशभक्ति की भावना भी विकसित करें।
साथ ही अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों की पढ़ाई में रुचि लें, नियमित रूप से विद्यालय से जुड़े रहें और बच्चों को सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराएं।
शाला प्रवेशोत्सव बना शिक्षा के प्रति जागरूकता का उत्सव

कार्यक्रम केवल औपचारिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि शिक्षा के महत्व को समाज तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बना। बच्चों के उत्साह, अभिभावकों की सहभागिता और शिक्षकों की सक्रिय भूमिका ने यह संदेश दिया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है।
समारोह के अंत में सभी विद्यार्थियों ने नियमित अध्ययन, अनुशासन का पालन करने और अपने माता-पिता, शिक्षकों तथा देश का नाम रोशन करने का संकल्प लिया।
