बिलासपुर में आयोजित मूलनिवासी महापंचायत में 20 सामाजिक संगठनों ने OBC आरक्षण, आदिवासी अधिकार, बोधघाट परियोजना, फर्जी ग्रामसभाओं और संविधान से जुड़े मुद्दों पर प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
बिलासपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ में सामाजिक और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर एक बार फिर बड़ा जनआंदोलन आकार लेता दिखाई दे रहा है। बिलासपुर के सरकंडा स्थित चंद्रा भवन में मूलनिवासी संघ (भारत) के तत्वावधान में आयोजित ‘मूलनिवासी महापंचायत’ में प्रदेशभर से आए लगभग 20 सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। महापंचायत में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) तथा अल्पसंख्यक समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई और भविष्य की रणनीति तय की गई।
बैठक में शामिल संगठनों ने आरोप लगाया कि प्रदेश के मूलनिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों का लगातार हनन हो रहा है और शासन-प्रशासन की कई नीतियों से सामाजिक न्याय प्रभावित हो रहा है। इस संबंध में संयुक्त रूप से बड़े जनआंदोलन की रूपरेखा तैयार करते हुए अगस्त माह में व्यापक अभियान चलाने का निर्णय लिया गया।
विश्व मूलनिवासी दिवस से शुरू होगा जन-जागरूकता अभियान
महापंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि विश्व मूलनिवासी दिवस के अवसर पर पूरे छत्तीसगढ़ के सभी संभागों में महापंचायतों का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को उनके संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और आरक्षण से जुड़े मुद्दों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों का कहना था कि यह अभियान केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गांव-गांव और शहर-शहर जाकर लोगों को संविधान में मिले अधिकारों की जानकारी भी दी जाएगी। इसके बाद प्रदेश स्तर पर व्यापक आंदोलन और ‘छत्तीसगढ़ जाम’ जैसे कार्यक्रम आयोजित करने की रणनीति बनाई जाएगी।
OBC को 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग प्रमुख मुद्दा
महापंचायत में सबसे प्रमुख मांग अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 प्रतिशत आरक्षण तत्काल प्रभाव से लागू करने की रही। वक्ताओं ने कहा कि लंबे समय से इस विषय पर मांग उठाई जा रही है, लेकिन अब तक अपेक्षित निर्णय नहीं लिया गया है।
प्रतिनिधियों का कहना था कि सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए OBC समाज को संविधान के अनुरूप उसका अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने सरकार से इस विषय पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।
फर्जी ग्रामसभाओं के जरिए प्राकृतिक संसाधनों के दोहन का आरोप
महापंचायत में आदिवासी क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि कुछ क्षेत्रों में कथित तौर पर फर्जी ग्रामसभाओं के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग और खनन संबंधी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे स्थानीय आदिवासी समुदायों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
प्रतिनिधियों ने मांग की कि ग्रामसभा की स्वायत्तता और संवैधानिक अधिकारों का पूरी तरह पालन किया जाए तथा किसी भी परियोजना में स्थानीय समुदाय की वास्तविक सहमति सुनिश्चित की जाए।
बोधघाट परियोजना को लेकर भी जताई चिंता
महापंचायत में बस्तर क्षेत्र की प्रस्तावित बोधघाट परियोजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई। उपस्थित संगठनों ने दावा किया कि इस परियोजना से बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार प्रभावित हो सकते हैं।
प्रतिनिधियों ने परियोजना के संभावित सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विकास कार्यों के साथ स्थानीय लोगों के अधिकार, पुनर्वास और आजीविका की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने इस विषय पर व्यापक जनसंवाद और पारदर्शिता की भी मांग की।
धर्म स्वतंत्रता कानून और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दे भी उठे
महापंचायत में संविधान, सामाजिक समानता और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। उपस्थित संगठनों ने धर्म स्वतंत्रता कानून को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हुए इसे वापस लेने की मांग रखी।
इसके साथ ही अनुसूचित जाति समाज के खिलाफ होने वाले कथित जातीय अत्याचारों और हिंसा की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए कानून का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है तथा पीड़ितों को समय पर न्याय मिलना चाहिए।
जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों की रिहाई की मांग
महापंचायत में नक्सल मामलों में गिरफ्तार आदिवासियों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। संगठनों ने आरोप लगाया कि कई निर्दोष आदिवासी लंबे समय से विभिन्न मामलों में जेलों में बंद हैं।
प्रतिनिधियों ने मांग की कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष समीक्षा कर निर्दोष लोगों को शीघ्र न्याय दिलाया जाए। साथ ही न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर भी जोर दिया गया।
साझा मंच पर दिखी सामाजिक एकजुटता

महापंचायत की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता विभिन्न सामाजिक संगठनों की एकजुटता रही। SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक समाज से जुड़े प्रतिनिधियों ने एक मंच पर आकर सामाजिक न्याय, संवैधानिक अधिकार और समान अवसर जैसे मुद्दों पर सामूहिक आवाज बुलंद की।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि आने वाले समय में विभिन्न जिलों में जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि समाज के अधिक से अधिक लोग इन विषयों पर अपनी राय रख सकें और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचा सकें।
आने वाले दिनों में बढ़ सकती है आंदोलन की गतिविधियां
महापंचायत में लिए गए निर्णयों के बाद यह स्पष्ट संकेत मिला है कि अगस्त माह में प्रदेशभर में कई सामाजिक और जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। यदि मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है, तो आंदोलन को और व्यापक रूप देने की तैयारी भी की जा रही है।
राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विभिन्न संगठनों की यह एकजुटता बनी रहती है, तो आने वाले समय में यह मुद्दा प्रदेश की सामाजिक और राजनीतिक चर्चाओं का महत्वपूर्ण विषय बन सकता है।
हालांकि, इन मांगों और आरोपों पर संबंधित सरकारी पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे मुद्दों पर संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से समाधान निकालना सभी पक्षों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
