भोरमदेव मंदिर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के धार्मिक अनुष्ठान पर कांग्रेस की टिप्पणी को लेकर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अमित चिमनानी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस भगवान शिव की आराधना को नहीं रोक सकती और सनातन परंपरा पर राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण है। पढ़ें पूरी खबर।
रायपुर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर धार्मिक आस्था और राजनीतिक बयानबाजी को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। कवर्धा स्थित विश्व प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा किए गए धार्मिक अनुष्ठान को लेकर कांग्रेस की ओर से की गई टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा विरोध जताया है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अमित चिमनानी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भगवान शिव की आराधना को रोकने की ताकत कांग्रेस में नहीं है और सनातन परंपराओं पर सवाल उठाना करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का अपमान है।
उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा-पाठ और आराधना करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। मुख्यमंत्री द्वारा भोरमदेव मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान करना उनकी व्यक्तिगत आस्था का विषय है और इसे राजनीतिक रंग देना उचित नहीं कहा जा सकता।
भोरमदेव मंदिर से जुड़ी है प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत
अमित चिमनानी ने अपने बयान में कहा कि भोरमदेव मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यहां हर वर्ष हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं, जिनमें प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से भी श्रद्धालु शामिल होते हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करना किसी राजनीतिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के प्रति उनकी आस्था का प्रतीक है।
“भगवान शिव की पूजा सनातन संस्कृति की आत्मा”
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि भगवान शिव की उपासना भारत की सनातन परंपरा की मूल धारा है। देशभर में करोड़ों लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार अमरनाथ, केदारनाथ, बद्रीनाथ, काशी विश्वनाथ, महाकाल और अन्य प्रमुख शिवधामों में दर्शन करने जाते हैं। उसी प्रकार छत्तीसगढ़ के श्रद्धालुओं के लिए भोरमदेव मंदिर अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है।
उन्होंने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी आस्था के अनुसार पूजा-अर्चना करने की स्वतंत्रता देता है। ऐसे में किसी धार्मिक आयोजन पर राजनीतिक टिप्पणी करना लोकतांत्रिक मूल्यों और धार्मिक स्वतंत्रता की भावना के विपरीत है।
कांग्रेस की टिप्पणी को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
अमित चिमनानी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया मंच से मुख्यमंत्री के धार्मिक अनुष्ठान पर जिस प्रकार की टिप्पणी की गई, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार किसी भी राजनीतिक दल को जनता की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि धार्मिक आस्था किसी दल या विचारधारा की बपौती नहीं होती। करोड़ों लोग भगवान शिव में विश्वास रखते हैं और उनकी पूजा करते हैं। ऐसे में किसी धार्मिक आयोजन का उपहास उड़ाना या उस पर प्रश्नचिह्न लगाना समाज में अनावश्यक विवाद पैदा करने का प्रयास माना जाएगा।
“धार्मिक विषयों पर राजनीति करना उचित नहीं”
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन धार्मिक आस्था को राजनीति का माध्यम बनाना उचित नहीं है। उनका कहना था कि सरकार की नीतियों और प्रशासनिक निर्णयों पर राजनीतिक बहस हो सकती है, लेकिन किसी व्यक्ति की पूजा-पद्धति या धार्मिक विश्वास पर टिप्पणी करना स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा नहीं मानी जा सकती।
उन्होंने कांग्रेस से आग्रह किया कि वह धार्मिक विषयों को राजनीतिक विवाद का हिस्सा बनाने के बजाय जनता के वास्तविक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करे।
सनातन परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के सम्मान की बात
अमित चिमनानी ने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से है। छत्तीसगढ़ की धरती आदिवासी संस्कृति, लोक परंपराओं और धार्मिक विरासत से समृद्ध रही है। ऐसे में प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर होने वाले आयोजनों का सम्मान किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सहित कोई भी जनप्रतिनिधि यदि किसी मंदिर, गुरुद्वारे, मस्जिद, चर्च या अन्य धार्मिक स्थल पर जाकर श्रद्धा प्रकट करता है तो उसे राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ी बहस
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के भोरमदेव मंदिर दौरे और धार्मिक अनुष्ठान को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। जहां कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है, वहीं भाजपा इसे सनातन आस्था पर टिप्पणी बताते हुए लगातार पलटवार कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर दिए जाने वाले बयान अक्सर राजनीतिक बहस को और तेज कर देते हैं। हालांकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी दलों को अपने विचार रखने का अधिकार है, लेकिन धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दों पर संतुलित भाषा और संयम बनाए रखना सामाजिक सौहार्द की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
जनता की धार्मिक भावनाओं के सम्मान की अपील
भाजपा प्रवक्ता ने अंत में कहा कि भगवान शिव करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं। इसलिए किसी भी दल को ऐसे विषयों पर टिप्पणी करते समय धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की आराधना सदियों से भारतीय संस्कृति का हिस्सा रही है और भविष्य में भी श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ पूजा-अर्चना करते रहेंगे।
उन्होंने दोहराया कि “कांग्रेस की इतनी ताकत नहीं कि वह भगवान शिव की आराधना को रोक सके। सनातन परंपरा भारत की आत्मा है और इसे कोई भी राजनीतिक बयान कमजोर नहीं कर सकता।”
दोनों पक्षों के रुख को समझना जरूरी
इस पूरे घटनाक्रम में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने राजनीतिक दृष्टिकोण सार्वजनिक किए हैं। जहां भाजपा इसे धार्मिक आस्था और सनातन परंपरा का विषय बता रही है, वहीं कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के धार्मिक आयोजन पर सवाल उठाए हैं। ऐसे मामलों में अंतिम राय बनाते समय पाठकों के लिए दोनों पक्षों के बयानों और तथ्यों को समझना महत्वपूर्ण है।
