नई दिल्ली (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया)। कारगिल युद्ध के खत्म होय ल अब 27 साल ले जियादा समय बीत गे हवय, फेर साल 1999 के वो ऐतिहासिक जंग ले जुड़े कई कहानी आज घलो लोगन के सामने धीरे-धीरे आथें। कारगिल युद्ध के इतिहास मं भारतीय सेना के बहादुरी, जवान मन के बलिदान अउ देश के एकजुटता के कहानी तो अक्सर सुनाए जाथे, लेकिन ए युद्ध के शुरुआती दौर मं सरकार अउ सेना के सामने का-काबर चुनौती रहिस, ए बात के कई पहलू अब भी कम चर्चा मं आथे।
तत्कालीन भारतीय सेना प्रमुख जनरल वेद प्रकाश मलिक ह अपन किताब मं कारगिल युद्ध के शुरुआती समय के घटनाक्रम के बारे मं कई महत्वपूर्ण बात के जिक्र करे हवंय। जनरल मलिक के मुताबिक, कारगिल के पहाड़ी इलाका मं भारतीय सैनिक एक तरफ दुश्मन के कब्जा जमाए बैठे घुसपैठियन के खिलाफ लड़ई लड़त रहिन, त दूसर तरफ राजधानी दिल्ली मं सैन्य मुख्यालय के भीतर एक अलग तरह के संघर्ष चलत रहिस।
ए संघर्ष सीधे बंदूक अउ गोली के नइ, बल्कि सही जानकारी जुटाए, जमीनी हालात के सही आकलन करे अउ सरकार के सामने युद्ध के असली तस्वीर रखे के रहिस। जनरल मलिक ह शुरुआती रिपोर्ट्स मं असंतुलन के बात कहत जमीनी स्तर मं स्थिति के सीधे आकलन के जरूरत ऊपर जोर देय रहिन।
21 मई के बैठक मं साफ होइस घुसपैठ के असली तस्वीर
कारगिल संकट के शुरुआती दौर मं स्थिति धीरे-धीरे गंभीर होत गे। बटालिक सेक्टर मं शुरू होए लड़ई जल्दे ही 121 (आई) इन्फैंट्री ब्रिगेड के कई इलाका तक फैल गे। सेना के सामने अब सवाल सिरिफ कुछ घुसपैठियन ल खदेड़े के नइ रहिस, बल्कि घुसपैठ के असली पैमाना अउ दुश्मन के रणनीति समझना भी जरूरी हो गे रहिस।
21 मई के आर्मी हेडक्वार्टर के ऑपरेशंस रूम मं चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी यानी सीओएससी के बैठक होइस। ए बैठक के बाद घुसपैठ के तस्वीर काफी हद तक साफ होय लगिस।
सेना के अनुमान के मुताबिक, एक हजार ले जियादा घुसपैठिए अलग-अलग इलाका मं मौजूद हो सकत रहिन। इन घुसपैठियन के पास आधुनिक हथियार, मोर्टार अउ आर्टिलरी सपोर्ट जइसन सैन्य संसाधन होय के अनुमान लगाय गे रहिस। इनकर मौजूदगी के चलते नेशनल हाईवे अउ एलओसी के नजदीक स्थित सैन्य चौकी तक पहुंचइया सप्लाई रूट्स मं भी बाधा पैदा होवत रहिस।
सबसे हैरान करे वाली बात ये रहिस कि एलओसी मं तैनात कई चौकी मन ल शुरू मं ए घुसपैठ के भनक तक नइ लग पाय रहिस। जब स्थिति के गंभीरता सामने आई, त सेना ह प्रभावित इलाका मं अतिरिक्त बटालियन भेजे के काम तेजी ले शुरू कर दिस।
घुसपैठिए मन मुजाहिदीन के भेष मं रहिन, फेर तरीका बता देत रहिस असली पहचान
कारगिल युद्ध के शुरुआती दौर मं घुसपैठिए अपन असली पहचान छिपाय बर मुजाहिदीन जइसन कपड़ा पहिनके सामने आइन। मकसद रहिस कि भारत ल ये लगे कि एलओसी पार करके कुछ आतंकी या स्थानीय लड़ाका घुस आए हवंय।
फेर जइस-जइस लड़ई आगे बढ़त गे, भारतीय सेना के सामने कई अइसन संकेत आइन, जेनसे ये साफ होवत गे कि मामला सिरिफ आतंकवादी घुसपैठ के नइ आय। घुसपैठियन के काम करे के तरीका, सैन्य रणनीति, हथियार मन के इस्तेमाल अउ मोर्चाबंदी ले संकेत मिलत रहिस कि ये लोग अच्छी तरह प्रशिक्षित सैनिक रहिन।
ए बात के एक महत्वपूर्ण सुराग 17 मई के मिलिस। एविएशन रिसर्च सेंटर द्वारा खींचे गे एक हवाई तस्वीर मं पाकिस्तान सेना के एक हेलीकॉप्टर एलओसी पार करके भारतीय इलाका के तरफ उड़त दिखाई दिस। ए तस्वीर भारतीय पक्ष बर एक महत्वपूर्ण संकेत रहिस अउ ए ले पाकिस्तान सेना के संभावित सीधा जुड़ाव के आशंका अउ मजबूत होइस।
हालांकि उस समय भारतीय एजेंसियन के पास पर्याप्त हवाई अउ सैटेलाइट तस्वीर उपलब्ध नइ रहिस। ए कारण ले घुसपैठियन के सही संख्या, उनकर वास्तविक स्थिति अउ कऊन-कऊन इलाका मं उनकर कब्जा हवय, ए सबके सटीक आकलन करे मं सेना ल दिक्कत के सामना करना पड़िस।
18 मई के सीसीएस बैठक, सरकार ह सेना ल देइस साफ निर्देश
स्थिति के गंभीरता ल देखत 18 मई के कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी यानी सीसीएस के बैठक बुलाई गे। उस समय देश मं प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सरकार रहिस।
सरकार के सामने चुनौती बहुत बड़ी रहिस। एक तरफ भारतीय जमीन मं घुसपैठ कर चुके दुश्मन मन ल बाहर खदेड़ना जरूरी रहिस, त दूसर तरफ ए बात के भी ध्यान रखे जाना रहिस कि मामला एक बड़े युद्ध मं न बदल जाए।
सरकार ह भारतीय सेना ल साफ निर्देश दिस कि घुसपैठियन ल हर हाल मं भारतीय क्षेत्र ले बाहर निकाले जाना चाही। हालांकि साथ मं संयम बरते अउ तनाव ल अउ जियादा बढ़े ले रोके के निर्देश भी रहिस।
ए फैसला उस समय के अंतरराष्ट्रीय अउ कूटनीतिक परिस्थिति ल ध्यान मं रखके महत्वपूर्ण मानल जाथे। भारत नइ चाहत रहिस कि कारगिल संकट एक व्यापक युद्ध के रूप ले अउ ज्यादा फैल जाए।
तीनों सेनाओं के संयुक्त इस्तेमाल के सुझाव ऊपर भी होइस चर्चा
कारगिल युद्ध के शुरुआती दौर मं सेना के भीतर ए बात ऊपर भी विचार होवत रहिस कि ए लड़ई मं सिरिफ थल सेना के भरोसे रहना पर्याप्त होही या नइ।
सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल चंद्र शेखर ह भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर, फाइटर जेट्स अउ नौसेना के संसाधन के भी इस्तेमाल करे के सुझाव देय रहिन। हालांकि सीसीएस ह उस समय ए प्रस्ताव ल मंजूरी नइ दिस।
ए फैसला के पीछे सरकार के व्यापक रणनीतिक सोच रहिस। ट्रैक-2 वार्ता, कूटनीतिक प्रयास अउ तनाव ल नियंत्रित रखे के नीति के चलते तीनों सेनाओं के व्यापक इस्तेमाल के फैसला तत्काल नइ हो सकिस।
जनरल वीपी मलिक के नजर मं कारगिल जइसन कठिन भौगोलिक इलाका मं लड़ई ल सिरिफ थल सेना के माध्यम ले लड़ना आसान काम नइ रहिस। उनका मानना रहिस कि अगर थल सेना, वायु सेना अउ नौसेना मिलके एक संयुक्त रणनीति के तहत काम करित, त सैन्य कार्रवाई के असर अउ जियादा प्रभावी हो सकत रहिस।
हालांकि उस समय तीनों सेनाओं के सामने अपन-अपन चुनौती रहिस। संयुक्त अभियान के तैयारी, आपसी समन्वय अउ बदलत युद्ध परिस्थिति के बीच तत्काल फैसला लेना आसान नइ रहिस।
कारगिल युद्ध के शुरुआती दौर ले मिलिस कई महत्वपूर्ण सबक
कारगिल युद्ध के शुरुआती घटनाक्रम भारतीय सुरक्षा व्यवस्था बर कई महत्वपूर्ण सबक छोड़ गे। सबसे बड़े सबक मं एक रहिस कि सीमावर्ती इलाका मं खुफिया जानकारी, निगरानी अउ जमीनी रिपोर्ट के सटीकता केतना जरूरी हवय।
घुसपैठियन के शुरुआती पहचान मं देरी अउ उनकर वास्तविक संख्या के सही आकलन नइ हो पाना सुरक्षा व्यवस्था के सामने एक गंभीर चुनौती रहिस। बाद मं कारगिल समीक्षा समिति समेत कई स्तर मं युद्ध के घटनाक्रम के समीक्षा करे गे अउ खुफिया तंत्र अउ निगरानी व्यवस्था ल मजबूत करे के जरूरत ऊपर जोर देय गे।
कारगिल युद्ध ह ये भी दिखाइस कि पहाड़ी इलाका मं सैन्य अभियान कतेक कठिन होथे। ऊंचाई वाले इलाका मं दुश्मन के रणनीतिक बढ़त, खराब मौसम अउ कठिन भूगोल के बीच भारतीय सैनिक मन ह अदम्य साहस के परिचय देइन।
आज भी याद रखे जाथे कारगिल के शहीद मन के बलिदान
कारगिल युद्ध के कहानी सिरिफ सैन्य रणनीति अउ राजनीतिक फैसला के कहानी नइ आय। ये भारत के उन हजारों जवान मन के साहस अउ बलिदान के कहानी भी आय, जेन मन देश के सीमा के रक्षा बर अपन जान तक न्योछावर कर दिन।
जनरल वीपी मलिक के किताब मं सामने आए ए घटनाक्रम कारगिल युद्ध के शुरुआती दौर के एक अलग पहलू ल समझे मं मदद करथे। पहाड़ी मोर्चा मं दुश्मन ले लड़त भारतीय सेना अउ दिल्ली मं सैन्य मुख्यालय मं चलत रणनीतिक मंथन—दुनों मिलके कारगिल युद्ध के शुरुआती तस्वीर ल सामने लाथें।
27 साल ले जियादा समय बाद घलो कारगिल युद्ध ले जुड़े ए किस्सा देश के सुरक्षा इतिहास के महत्वपूर्ण हिस्सा बने हवय। ए घटनाक्रम ये याद दिलाथे कि युद्ध सिरिफ सीमा मं बंदूक चलाय के नाम नइ आय, बल्कि सही समय मं सही जानकारी, रणनीतिक फैसला, राजनीतिक इच्छाशक्ति अउ तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल भी जीत के राह तय करथे।
कारगिल युद्ध मं भारतीय सेना ह आखिरकार दुश्मन के घुसपैठ ल नाकाम करत भारतीय क्षेत्र ल वापस हासिल करिस। आज कारगिल के शहीद मन के बलिदान ल पूरा देश सम्मान के संग याद करथे, अउ उनकर साहस आने वाली पीढ़ी बर देशभक्ति अउ कर्तव्य के प्रेरणा बने रहिही।
