खरसिया में पूर्व सैनिक संगठन “सिपाही”, पूर्व सैनिक महासभा और विभिन्न राष्ट्रभक्त संगठनों द्वारा सैनिकों के सम्मान में रक्षा सूत्र संग्रहण कार्यक्रम आयोजित किया गया। छात्राओं और महिलाओं ने सीमा पर तैनात भारतीय सैनिकों के लिए राखियां समर्पित कर देशभक्ति और सम्मान का अनूठा संदेश दिया। पढ़ें पूरी खबर।
रायगढ़ (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) जिले के खरसिया में भारतीय सेना के जवानों के सम्मान और उनके प्रति देशवासियों की भावनाओं को अभिव्यक्त करने के उद्देश्य से एक प्रेरणादायी रक्षा सूत्र संग्रहण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन का नेतृत्व पूर्व सैनिक संगठन “सिपाही”, पूर्व सैनिक महासभा तथा विभिन्न राष्ट्रभक्त सामाजिक संगठनों ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश की सीमाओं पर दिन-रात तैनात सैनिकों तक देश की बहनों का स्नेह, सम्मान और विश्वास पहुंचाना था, ताकि उन्हें यह एहसास हो सके कि पूरा देश उनके त्याग और समर्पण के साथ खड़ा है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राओं, महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पूर्व सैनिकों तथा नागरिकों ने भाग लिया। सभी ने सैनिकों के प्रति अपने सम्मान और कृतज्ञता को रक्षा सूत्रों के माध्यम से व्यक्त किया। कार्यक्रम का वातावरण देशभक्ति के भाव से ओत-प्रोत रहा और उपस्थित लोगों ने सैनिकों के प्रति अपने सम्मान को शब्दों के साथ-साथ भावनाओं के माध्यम से भी व्यक्त किया।
छात्राओं ने सैनिकों को माना अपना भाई
रक्षा सूत्र संग्रहण अभियान की सबसे भावुक झलक तब देखने को मिली जब विद्यालयों और महाविद्यालयों की छात्राओं ने भारतीय सेना के जवानों के नाम अपनी राखियां समर्पित कीं। छात्राओं ने कहा कि सीमा पर तैनात प्रत्येक सैनिक केवल देश का रक्षक ही नहीं, बल्कि हर भारतीय बहन का भाई भी है।
उन्होंने कहा कि जब सैनिक अपने परिवार से दूर रहकर देश की सुरक्षा का दायित्व निभाते हैं, तब देश की बहनों का भी यह कर्तव्य बनता है कि वे उनके प्रति अपने स्नेह और विश्वास को व्यक्त करें। रक्षा सूत्र इसी भावनात्मक संबंध का प्रतीक है, जो केवल एक धागा नहीं बल्कि विश्वास, सुरक्षा और अपनत्व का संदेश लेकर जाता है।
महिलाओं ने प्रेम, सम्मान और विश्वास के साथ जुटाए रक्षा सूत्र

कार्यक्रम में विभिन्न महिला संगठनों की बहनों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। उन्होंने बड़ी संख्या में रक्षा सूत्र एकत्र किए और उन्हें सैनिकों तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
महिलाओं ने कहा कि रक्षा बंधन केवल परिवार तक सीमित रहने वाला पर्व नहीं है, बल्कि यह उन सभी लोगों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर भी है जो समाज और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर देते हैं। सीमा पर तैनात सैनिकों के कारण ही देश के नागरिक सुरक्षित वातावरण में अपने परिवार के साथ त्योहार मना पाते हैं। ऐसे में सैनिकों के लिए भेजी जाने वाली प्रत्येक राखी उनके प्रति देशवासियों की कृतज्ञता का प्रतीक है।
पूर्व सैनिकों ने साझा किए अपने अनुभव

कार्यक्रम में उपस्थित पूर्व सैनिकों ने अपने सैन्य जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि सीमाओं पर तैनात जवानों के लिए देशवासियों का प्रेम और सम्मान सबसे बड़ी प्रेरणा होता है। उन्होंने बताया कि जब सैनिकों तक बच्चों और बहनों द्वारा भेजी गई राखियां तथा शुभकामना संदेश पहुंचते हैं, तो उनका मनोबल कई गुना बढ़ जाता है।
पूर्व सैनिकों ने कहा कि सेना केवल हथियारों के बल पर नहीं, बल्कि पूरे देश के विश्वास और समर्थन के बल पर भी मजबूत बनती है। ऐसे सामाजिक अभियान नागरिकों और सैनिकों के बीच भावनात्मक संबंध को और अधिक मजबूत करते हैं।
आयोजकों ने बताया कार्यक्रम का उद्देश्य
कार्यक्रम के आयोजकों ने कहा कि रक्षा सूत्र संग्रहण अभियान का उद्देश्य केवल राखियां एकत्र करना नहीं, बल्कि समाज में राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यबोध और सैनिकों के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करना है।
उन्होंने कहा कि सीमा पर तैनात जवान कठिन मौसम, विषम परिस्थितियों और परिवार से दूर रहकर देश की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। ऐसे में समाज का यह नैतिक दायित्व है कि समय-समय पर उनके प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया जाए।
आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान एकत्र किए गए रक्षा सूत्र निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से भारतीय सेना के जवानों तक पहुंचाए जाएंगे, ताकि रक्षा बंधन के अवसर पर उन्हें देश की बहनों का स्नेह और शुभकामनाएं मिल सकें।
हर रक्षा सूत्र बना विश्वास और संकल्प का प्रतीक

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि प्रत्येक रक्षा सूत्र केवल एक धागा नहीं बल्कि देश की करोड़ों बहनों के विश्वास, प्रेम और आशीर्वाद का प्रतीक है। यह संदेश देता है कि पूरा देश अपने सैनिकों के साथ खड़ा है और उनके त्याग का सम्मान करता है।
उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपराओं में रक्षा बंधन का विशेष महत्व है। जब यही परंपरा सैनिकों के सम्मान से जुड़ती है, तब यह राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति का सशक्त संदेश बन जाती है।
युवाओं को मिला राष्ट्रसेवा का संदेश
कार्यक्रम में मौजूद युवाओं और विद्यार्थियों से भी देशहित में अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि हर नागरिक सैनिक नहीं बन सकता, लेकिन हर नागरिक अपने कर्तव्यों का पालन करके राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
युवाओं से समाज सेवा, अनुशासन, राष्ट्रीय एकता और देशहित के कार्यों में सक्रिय भागीदारी की अपील की गई। साथ ही उन्हें सैनिकों के त्याग और बलिदान से प्रेरणा लेने का संदेश भी दिया गया।
समाज में सकारात्मक संदेश देने वाला आयोजन

खरसिया में आयोजित यह रक्षा सूत्र संग्रहण कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि समाज में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सहभागिता और सैनिकों के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करने वाला अभियान बनकर सामने आया।
छात्राओं, महिलाओं, पूर्व सैनिकों और सामाजिक संगठनों की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि भारतीय सैनिक केवल सीमाओं के प्रहरी नहीं, बल्कि पूरे देश के सम्मान और सुरक्षा के प्रतीक हैं। उनके प्रति सम्मान व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।
रक्षा बंधन के पावन अवसर पर इस प्रकार के आयोजन समाज में देशभक्ति, सामाजिक समरसता और सैनिकों के प्रति कृतज्ञता की भावना को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। खरसिया का यह प्रयास निश्चित रूप से अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बनेगा और देश के वीर जवानों तक यह संदेश पहुंचाएगा कि उनका पूरा देश हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ा है।
