कोरबा (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) । छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले का प्रसिद्ध दादर ग्राम एक बार फिर श्रद्धा, संस्कृति और परंपरा के अनुपम संगम का साक्षी बना। यहां सोमवार को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के पावन रथ द्वितीया (बहुड़ा रथ) पर्व को पूरे धार्मिक उत्साह और भव्यता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जिले ही नहीं बल्कि आसपास के कई गांवों और शहरों से हजारों श्रद्धालु दादर पहुंचे और भगवान के रथ को खींचकर पुण्य लाभ अर्जित किया।
रथयात्रा के नौ दिन बाद भगवान जगन्नाथ की अपने मूल मंदिर में वापसी के इस पावन पर्व को देखने और इसमें शामिल होने के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी थी। पूरा गांव “जय जगन्नाथ” के जयघोष से गूंज उठा और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
विशेष पूजा-अर्चना के बाद निकला बहुड़ा रथ
पर्व की शुरुआत सुबह मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष पूजा-अर्चना के साथ हुई। भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा का आकर्षक श्रृंगार किया गया। रंग-बिरंगे फूलों, पारंपरिक वस्त्रों और सुंदर सजावट से सुसज्जित तीनों रथ श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने रहे।
पूजा संपन्न होने के बाद जैसे ही रथ यात्रा प्रारंभ हुई, हजारों श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ रथ की रस्सियां थाम लीं। “जय जगन्नाथ” और “हरि बोल” के जयकारों के बीच रथ गांव के प्रमुख मार्गों से होकर निकला। रास्ते भर श्रद्धालु भगवान के दर्शन करते रहे और आशीर्वाद प्राप्त करते रहे।
महिलाओं ने आरती उतारी, युवाओं ने बिखेरी लोक संस्कृति की छटा
रथ यात्रा के दौरान गांव की महिलाओं ने जगह-जगह भगवान की आरती उतारकर मंगल कामना की। कई स्थानों पर रंगोली सजाई गई और दीप प्रज्ज्वलित कर भगवान का स्वागत किया गया।
युवा पारंपरिक नगाड़ों और ढोल की थाप पर लोकनृत्य करते हुए यात्रा के साथ आगे बढ़ते रहे। धार्मिक गीतों और भजनों की मधुर धुनों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं में भगवान के प्रति अपार श्रद्धा और उत्साह स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था।
तीन दिवसीय मेला बना लोगों के आकर्षण का केंद्र
रथ द्वितीया पर्व के साथ ही दादर गांव में तीन दिवसीय विशाल मेले का भी आयोजन किया गया, जहां सुबह से देर रात तक लोगों की भीड़ बनी रही।
मेले में बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार के झूले, खिलौनों की दुकानें, बर्तन, घरेलू सामान, मिठाइयों और स्थानीय व्यंजनों के स्टॉल लगाए गए थे। युवाओं और बच्चों के बीच “मौत का कुआं” विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
स्थानीय व्यापारियों के लिए भी यह मेला आर्थिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण साबित हुआ। दूर-दराज से आए दुकानदारों ने अपने उत्पादों की बिक्री की और मेले में खरीदारी करने वालों की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली।
महाप्रसाद वितरण से मिला सेवा का संदेश
पर्व के दौरान श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद की विशेष व्यवस्था की गई थी। बड़ी संख्या में भक्तों को खिचड़ी, खीर और मालपुआ का प्रसाद वितरित किया गया।
महाप्रसाद ग्रहण करने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। आयोजन समिति और स्वयंसेवकों ने पूरी व्यवस्था को सुव्यवस्थित तरीके से संभाला, जिससे किसी भी श्रद्धालु को असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।
लोक कलाकारों ने बांधा समां
धार्मिक आयोजन के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। स्थानीय लोक कलाकारों ने छत्तीसगढ़ी लोकगीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
भक्ति, संस्कृति और लोक परंपरा का यह सुंदर संगम दादर के रथ द्वितीया पर्व को और भी विशेष बना गया। दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों का तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया।
प्रशासन ने संभाली सुरक्षा व्यवस्था
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। पूरे मेले और रथ मार्ग पर पुलिस बल तैनात रहा।
यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष रूट प्लान तैयार किया गया था। वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम भी पूरे समय मेले में मौजूद रही ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
हर वर्ष जुटते हैं हजारों श्रद्धालु
ग्राम पंचायत के सरपंच ने बताया कि दादर का रथ द्वितीया मेला कोरबा जिले के सबसे पुराने और प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल है। हर वर्ष लगभग 15 से 20 हजार श्रद्धालु यहां भगवान जगन्नाथ के दर्शन और रथ खींचने के लिए पहुंचते हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ की कृपा से गांव में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे, यही सभी ग्रामीणों की कामना है।
भक्तों की आस्था बनी आयोजन की सबसे बड़ी पहचान
रथ खींचने आए श्रद्धालु राजेश साहू ने बताया कि वे हर वर्ष पूरे परिवार के साथ इस मेले में शामिल होते हैं। उनके अनुसार भगवान के रथ को खींचना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि आत्मिक शांति और विश्वास का प्रतीक है।
कई श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और प्रदेश की खुशहाली की कामना की।
अगले वर्ष तक रहेगा इंतजार
रथ द्वितीया पर्व के साथ भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा पुनः अपने मूल मंदिर में विराजमान हो गए। इसके साथ ही इस वर्ष का धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ और श्रद्धालुओं ने अगले आषाढ़ माह में फिर से रथयात्रा में शामिल होने का संकल्प लिया।
दादर का यह ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन केवल एक पर्व नहीं बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और सनातन परंपराओं का जीवंत उदाहरण है, जो हर वर्ष हजारों लोगों को आस्था के एक सूत्र में बांध देता है।
