बालकोनगर (वंदे छत्तीसगढ़ मीडिया) ।बालकोनगर में भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक रथयात्रा इस वर्ष भी पूरे श्रद्धा, उत्साह और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुई। पिछले 45 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रही इस धार्मिक परंपरा में इस बार भी हजारों श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र की सुसज्जित प्रतिमाओं को भव्य रथ पर विराजमान कर नगर भ्रमण कराया गया। पूरे नगर में ‘जय जगन्नाथ’ के जयघोष, भजन-कीर्तन और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।
उत्कल भारती समिति के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य रथयात्रा में बालको के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी (धातु) श्री निकेत श्रीवास्तव सहित प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और नगर के हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। सभी ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र की विशेष पूजा-अर्चना से हुई। इसके बाद तीनों विग्रहों को पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार आकर्षक ढंग से सजाए गए रथ पर विराजमान किया गया। श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं और जयघोष के साथ भगवान का स्वागत किया।
रथयात्रा का सबसे भावुक क्षण तब देखने को मिला जब बालको के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी (धातु) श्री निकेत श्रीवास्तव ने भगवान का आशीर्वाद लेने के बाद स्वयं श्रद्धालुओं के साथ रथ की रस्सी पकड़कर रथ खींचा। उनके साथ बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी और स्थानीय नागरिक भी रथ खींचने की परंपरा में शामिल हुए। श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान जगन्नाथ का रथ खींचना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है और इससे जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
रथयात्रा के आगे पारंपरिक कर्मा नृत्य दल की रंगारंग प्रस्तुति आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। ढोल, मांदर और अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर थाप पर कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुति दी। वहीं भजन मंडलियों द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे भक्तिमय भजनों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। नगर के विभिन्न मार्गों पर श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर पुष्प वर्षा की और रथयात्रा का स्वागत किया।
यह भव्य रथयात्रा राम मंदिर से प्रारंभ होकर बालकोनगर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए रामलीला मैदान स्थित श्री गुंडिचा मंदिर पहुंची। वहां वैदिक परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र की विधिवत स्थापना की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में उपस्थित रहे और पूजा-अर्चना में शामिल हुए।
आयोजन समिति ने जानकारी दी कि 16 जुलाई से 24 जुलाई तक श्री गुंडिचा मंदिर में प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान, विशेष पूजा, भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा महाप्रसाद वितरण का आयोजन किया जाएगा। इन आयोजनों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। समिति ने सभी श्रद्धालुओं से कार्यक्रमों में भाग लेकर धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने की अपील भी की है।
बालकोनगर की भगवान जगन्नाथ रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक एकता का भी प्रतीक बन चुकी है। पिछले 45 वर्षों से लगातार आयोजित हो रही यह परंपरा विभिन्न समाजों, वर्गों और आयु वर्ग के लोगों को एक सूत्र में बांधने का कार्य कर रही है। यही कारण है कि हर वर्ष इस आयोजन में लोगों की भागीदारी लगातार बढ़ती जा रही है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि भाईचारे, प्रेम और सामाजिक एकता का संदेश देने वाला महोत्सव भी है। बालकोनगर में वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
